राज्यसभा संसदीय दल के नेता पद से शरद की छुट्टी, JDU बोली- ये जरूरी था

नई दिल्ली.नीतीश कुमार से नाराज चल रहे पार्टी के सीनियर लीडर शरद यादव की राज्यसभा में जेडीयू संसदीय दल के नेता पद से छुट्टी हो गई है। उनकी जगह आरसीपी सिंह को जिम्मेदारी मिली है। बदलाव को लेकर शनिवार को जेडीयू सांसदों ने वाइस प्रेसिडेंट वेंकैया नायडू से मुलाकात की। इसके पहले जेडीयू चीफ ने कहा था कि उन्हें जहां जाना है चले जाएं, पार्टी अपना फैसला कर चुकी है। दूसरी ओर, अमित शाह ने नीतीश को नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) में शामिल होने का न्योता दिया। शाह ने शुक्रवार को उन्हें दिल्ली में अपने घर चाय पर बुलाया। बता दें कि नीतीश ने आरजेडी-कांग्रेस महागठबंधन से खुद को अलग करने के बाद बिहार में बीजेपी के साथ नई सरकार बनाई है। 4 साल बाद फिर नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी होगी। अहमद पटेल को बधाई दी थी…

-हालांकि, जेडीयू नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा- ”उन्हें (शरद यादव) को हटाया नहीं, रिप्लेस किया है। उनकी मौजूदा एक्टिविटीज को देखते हुए यह जरूरी था।”
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– शाह के इनविटेशन पर शरद ने कहा- ”मुझे कोई कमेंट नहीं करना है। दूसरों के बारे में बात न करें, मैं पब्लिक रैली में सिर्फ जनता से बात करने के लिए आया हूं।”
– गुजरात के राज्यसभा इलेक्शन में जेडीयू के एक MLA ने पार्टी का ऑर्डर ना मानकर कांग्रेस कैंडिडेट अहमद पटेल को वोट किया था। बाद में शरद ने पटेल को जीत की बधाई दी। जबकि इस घटनाक्रम के बाद नीतीश ने गुजरात के पार्टी प्रभारी को बर्खास्त कर दिया, जो शरद के करीबी थे। इसके बाद से ही शरद पर कार्रवाई की आशंका बढ़ गई थी।
अमित शाह ने ट्वीट किया
– बीजेपी प्रेसिडेंट ने शनिवार को ट्वीट किया- ”कल (शुक्रवार) JDU के नेशनल प्रेसिडेंट नीतीश कुमार से अपने घर पर मुलाकात हुई। मैंने उन्हें जेडीयू को NDA में शामिल करने का न्योता दिया है। मैंने उन्हें अपने घर चाय पर बुलाया था।”
18 राज्यों में BJP का दबदबा
– बीजेपी नेताओं की मानें तो बिहार में नीतीश का साथ मिलने के बाद 2019 के लिए बीजेपी की राह और मजबूत हो गई है। उन्होंने 2013 में एनडीए का 17 साल पुराना साथ छोड़ा था।
– बता दें कि देश के 13 राज्यों में बीजेपी की सरकार है। 5 राज्यों में पार्टी सरकार की सहयोगी है। दो राज्य ऐसे हैं, जहां की रूलिंग पार्टी के साथ बीजेपी के रिश्ते दोस्ताना नजर आ रहे हैं। पार्टी ठीक उसी राह पर है, जिस पर कभी कांग्रेस अपनी लोकप्रियता के दिनों में हुआ करती थी।
5 प्वाइंट में जानेंBJPकी राह कैसे मजबूत हुई
1) 70% आबादी, 58% इकोनॉमी पर बीजेपी का शासन
– बीजेपी को 2014 में लोकसभा चुनाव में 282 सीटें मिली थीं। सबसे ज्यादा 71 सीटें यूपी से मिली थीं, जहां इसी साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद उसी की सरकार है।
– जेडीयू के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाने के बाद अब बीजेपी देश की 70% आबादी और 58% इकोनॉमी पर शासन कर रही है, ऐसा मुकाम पहली बार हासिल किया है।
– बीजेपी देश के प्रमुख राज्यों में आगे बढ़ रही है। उसकी अलायंस पार्टियां 12 में से 7 राज्यों में सत्ता में हैं। और ये राज्य 20 से ज्यादा सांसद भेज सकते हैं।
2) जहां सरकार में शामिल नहीं, वहां भी सपोर्ट
– तमिलनाडु और ओडिशा जैसे स्टेट्स में बीजेपी की सरकार नहीं है। तमिलनाडु में AIADMK और ओडिशा में BJD की गवर्नमेंट है। लेकिन, इन दोनों पार्टियों का झुकाव भी बीजेपी की ओर ही दिख रहा है।
– राष्ट्रपति चुनाव में भी दोनों पार्टियों ने एनडीए के कैंडिडेट रामनाथ कोविंद के पक्ष में ही वोट डाले थे।
3) कांग्रेस के पास सिर्फ एक बड़ा स्टेट
– 130 साल पुरानी कांग्रेस के पास केवल एक बड़ा स्टेट कर्नाटक बचा हुआ है। लेकिन, यहां भी बीएस येदियुरप्पा की लीडरशिप में बीजेपी 2018 में मजबूत पोजिशन बनाने के लिए ओवरटाइम कर रही है। जिन राज्योें में नॉन-बीजेपी और कांग्रेस की सरकार है, उनमें केरल और प. बंगाल ही अहम हैं।
4) साउथ में भी बढ़ी पैठ
– बीजेपी की पैठ साउथ के राज्यों में भी बढ़ी है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु की रूलिंग पार्टियों के साथ बीजेपी के दोस्ताना रिश्ते हैं।
– आंध्र प्रदेश में एनडीए की सहयोगी टीडीपी की सरकार है। वहीं तेलंगाना की टीआरएस और तमिलनाडु की AIADMK के साथ बीजेपी के रिश्ते दोस्ताना नजर आ रहे हैं।
5) अपोजिशन का चेहरा कौन?
– सीनियर बीजेपी लीडर्स के मुताबिक, “गुड गवर्नेंस और ईमानदारी के लिए नीतीश जाने जाते हैं। ऐसे में एनडीए के खिलाफ एक यूनाइटेड अपोजिशन को तैयार करने में मुश्किल आएगी। सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर ऐसा कोई यूनाइटेड अपोजिशन बनता है तो 2019 में उसका चेहरा कौन होगा? अखिलेश, मायावती, ममता या लालू यादव? बीजेपी लीडर ने कहा कि इनमें से कोई भी करप्शन या गुड गवर्नेंस के मुद्दे पर हमसे नहीं टकरा सकता है। नीतीश का मामला अलग है।”





