राजस्थान: महिला आरक्षण के मुद्दे पर गहलोत ने मोदी सरकार को दी खुली चुनौती

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संबोधन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कई राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों को उठाया। मीडिया से बातचीत में गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जिस तरह दावा किया कि देश की महिलाएं कांग्रेस सहित विपक्षी दलों को कड़ा जवाब देंगी, यदि उन्हें अपनी बात पर इतना विश्वास है तो उन्हें लोकसभा भंग कर इस मुद्दे पर नया जनादेश लेने के लिए चुनाव करवाने चाहिए।

लोकतंत्र और जनादेश पर गहलोत का जोर
गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का अंतिम फैसला सर्वोपरि होता है और यदि सरकार को अपनी नीतियों और दावों पर भरोसा है तो उसे जनता के सामने जाकर समर्थन मांगने से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रही है, जबकि वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।

जातिगत जनगणना और परिसीमन पर केंद्र सरकार को घेरा
जातिगत जनगणना और परिसीमन के मुद्दे पर भी गहलोत ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि 2026 में प्रस्तावित जातिगत जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना ओबीसी वर्ग, विशेषकर ओबीसी महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है। गहलोत के अनुसार नई जनगणना से ही देश में विभिन्न वर्गों की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने आएगा, जिससे उनके लिए उचित प्रतिनिधित्व और आरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

सामाजिक न्याय और डेटा अपडेट पर बयान
उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक न्याय की दृष्टि से जातिगत आंकड़ों का अद्यतन होना बेहद आवश्यक है, अन्यथा पिछड़े वर्गों के अधिकारों का हनन होगा। गहलोत ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर इस प्रक्रिया में देरी कर रही है।

चुनाव आयोग और आचार संहिता पर गंभीर आरोप
इसके अलावा, गहलोत ने प्रधानमंत्री के संबोधन को पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों के बीच आचार संहिता का उल्लंघन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्षता से कार्य नहीं कर रहा और भाजपा के प्रभाव में काम कर रहा है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर सवाल उठ रहे हैं।

Back to top button