राजस्थान: कलाकार चंद्रशेखर सैन को राष्ट्रीय पुरस्कार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित

राजस्थान के प्रख्यात टेराकोटा एवं दृश्य कला कलाकार चंद्रशेखर सैन को 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित समारोह में उन्हें उनकी कलाकृति ‘My Entire World – I’ के लिए यह सम्मान प्रदान किया।

राजस्थान के प्रख्यात टेराकोटा एवं दृश्य कला कलाकार चंद्रशेखर सैन ने 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान अपनी टेराकोटा कलाकृति ‘My Entire World – I’ के लिए मिला। नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सैन को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया। इस उपलब्धि से राजस्थान की पारंपरिक मिट्टी कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

चंद्रशेखर सैन की पुरस्कृत कलाकृति ‘My Entire World – I’ टेराकोटा माध्यम में तैयार की गई एक विशिष्ट रचना है। इसमें कलाकार ने प्रकृति, जीवन, स्मृतियों और मानवीय भावनाओं को समकालीन कला दृष्टि के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। कलाकृति में पारंपरिक कला माध्यम और आधुनिक विचारों का प्रभावशाली समन्वय देखने को मिलता है। इसी रचनात्मकता और मौलिक अभिव्यक्ति के लिए सैन को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

समारोह में कला और संस्कृति जगत की प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित पुरस्कार समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल सहित कला और संस्कृति जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।

65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का आयोजन ललित कला अकादमी, नई दिल्ली की ओर से भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य देश के उत्कृष्ट कलाकारों की रचनात्मक उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना और भारतीय कला की विविधता को मंच प्रदान करना है।

6,175 प्रविष्टियों में से चुनी गईं 270 कलाकृतियां
आयोजकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के लिए देशभर से कुल 6,175 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं। इनमें से 270 कलाकृतियों का चयन प्रदर्शनी के लिए किया गया, जबकि केवल 20 कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया। ऐसे में चंद्रशेखर सैन का पुरस्कार के लिए चयन उनकी कलात्मक प्रतिभा, मौलिक सोच और टेराकोटा कला के क्षेत्र में योगदान को रेखांकित करता है।

राजस्थान की कला परंपरा को मिला राष्ट्रीय मंच
चंद्रशेखर सैन को मिला यह सम्मान राजस्थान की समृद्ध कला एवं शिल्प परंपरा के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। उनकी कलाकृतियों में राजस्थान की पारंपरिक मिट्टी कला और आधुनिक कलात्मक चिंतन का मेल दिखाई देता है। सैन लंबे समय से टेराकोटा और दृश्य कला के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने मिट्टी जैसे पारंपरिक माध्यम को समकालीन अभिव्यक्ति से जोड़कर अपनी अलग पहचान बनाई है।

Back to top button