ये हैं IAS ऑफिसर की पत्नी, बिहार में बाढ़ पीड़ितों के बीच कर रही ऐसे काम

पटना.उत्तरी बिहार में का कहर जारी है। बाढ़ प्रभावित एरिया में अब लोगों के घरों तक सांप और मगरमच्छ पहुंचना शुरु कर दिया। इसी बीच बिहार के सीतामढ़ी जिला में एक IAS ऑफिसर पत्नी दिन रात बाढ़ पीड़ितों के बीच रहकर उनकी सेवा कर रही है। इनके गांव का सड़क मार्ग से भी संपर्क टूट गया है। ये हैं IAS ऑफिसर की पत्नी, बिहार में बाढ़ पीड़ितों के बीच कर रही ऐसे काम

बाढ़ के कारण नहीं पहुंच पा रहे हैं यहां अधिकारी…

– सीतामढ़ी जिला के पंचायत सिंहवाहिनी पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में है।
– बाढ़ के कारण यहां पर कोई राहत काम ठीक से नहीं चल पा रहा है। 
– कोई अधिकारी भी बाढ़ प्रभावित इस क्षेत्र में नहीं आ रहे हैं। 
-इससे खिन्न आईएएस अधिकारी अमित जयसवाल की पत्नी रितू जयसवाल ने स्वंय ही बाढ़ पीड़ितों की सेवा का बीड़ा उठाया है। 
-रितू जयसवाल पंचायत सिंहवाहिनी की मुखिया हैं।

रितु ने फेसबुक पेज पर लिखी ये बातें

– रितु ने लिखा कि जैसा कि आप सब जानते हैं कि हमारा पंचायत सिंहवाहिनी पूर्णतः बाढ़ की चपेट में है।
– हमारा सड़क मार्ग से संपर्क तक बाहरी दुनिया से टूट चुका है।
– कई स्तर पर हेल्प मांग चुकी लेकिन शायद सरकार के पास राशि नही बची।
– उन्होंने लिखा कि कई दिनों से हमें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।
-गांव में जिसके पास जो कुछ है उसे हम आपस में बांट रहे हैं। 
-घर से लेकर स्कूल तक राहत शिविर में बदल गया है।

रितु के मुखिया बनने की ये है कहानी

– रितु गांव के विकास के काम की खुद निगरानी करती हैं। इसके लिए वह कभी बाइक ड्राइव करती दिखती हैं तो कभी ट्रैक्टर पर भी सवार हो जाती हैं।
– रितु की 1996 में 1995 बैच के आईएएस अरुण कुमार से हुई थी। 
– शादी के 15 साल तक जहां हसबैंड की पोस्टिंग होती थी रितु हर वक्त उनके साथ रहती थी।
– लेकिन वो अपने गांव से जुड़ी हुई थी, इसलिए अपने परिवार के साथ ससुराल के लिए निकल पड़ी। 
– वो जब अपने ससुराल नरकटिया गांव जा रही थी तो गांव पहुंचने से कुछ दूर पहले ही कार कीचड़ में फंस गई।
– कार निकालने की हर कोशिश बेकार होने पर बैलगाड़ी पर सवार होकर गांव के लिए निकली।
– कुछ दूर जाते ही बैलगाड़ी भी कीचड़ में फंस गई।
– इस घटना ने रितु को क्षेत्र के विकास के लिए कुछ करने को प्रेरित किया।

31 उम्मीदवारों को हराकर जीता था चुनाव

– इसके बाद रितु अपने पति का बंगला छोड़कर ससुराल में आकर बस गयी। 
– गांव के लिए कुछ करने के लिए उसने सबसे पहले गांव की लड़कियों को पढ़ाना शुरू कर दिया। 
– 2015 में नरकटिया गांव की 12 लड़कियां पहली बार मैट्रिक की परीक्षा पास की।
– 2016 में सिंहवाहिनी पंचायत से मुखिया पद के लिए रितु चुनाव लड़ी। 
– रितु के खिलाफ 32 उम्मीदवार थे। लोगों ने रितु को कहा तुम हार जाओगी। क्योंकि तुम्हारी जाति के इस पंचायत में मात्र तीन घर ही हैं।
– बिहार में वोट जाति के आधार पर मिलता है। लेकिन, रितु इससे परेशान नहीं हुई। 
– चुनाव मैदान में डटी रही और वो जीत गयी।
– रितु को उच्च शिक्षित मुखिया का अवॉर्ड भी मिल चुका है। इसके साथ ही उन्हें पंचायत के विकास के लिए भी कई अवॉर्ड मिले हैं।
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