मोदी को बड़ा झटका: लोक लुभावन बजट चुनाव में जीत की गारंटी नहीं

डॉ. हनुमंत यादव
प्रभारी वितमंत्री पीयूष गोयल द्वारा 1 फरवरी को प्रस्तुत मोदी सरकार के अंतिम  बजट में हर वर्ग को लुभाने के लिए लोक लुभावन बजट में घोषणाओं की बौछार कर दी गई है। वर्ष 2019-20 के 97.43 करोड़ रुपए के इस बजट में अप्रेल से जुलाई 2019 तक के चार माह में प्रस्तावित 34.17 करोड़ रुपए के व्यय के संसद से स्वीकृति मांगी गई है, इसलिए इसे अंतरिम बजट के नाम से संबोधित किया गया है । वैसे तो आम वित्तीय वर्षों में तीन या चार महीने के लिए कर्मचारियों के वेतन, भत्ते आदि स्थापना व्यय, रखरखाव व्यय एवं पूर्व से चल रही योजनाओं पर व्यय हेतु लेखानुदान प्रस्तुत किया जाता है।  किंतु पिछले डेढ़ दशकों से चुनावी वर्ष में अंतरिम बजट प्रस्तुत करने की परंपरा प्रारंभ चल निकली है, जिससे कि सत्तारूढ़ दल मतदाताओं को लुभानेवाली राहतों एवं कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा कर सके। जैसा कि अपेक्षा की जा रही थी मोदी सरकार के इस अंतरिम बजट में हर वर्ग के मतदाताओं को लोकलुभावन योजनाओं के माध्यम से रिझाने का प्रयास किया गया है।
उद्योगों में  लक्ष्य का 50 प्रतिशत रोजगार के अवसर सृजन नही हो पाए
मोदी सरकार मतदाताओं को रिझााने में कहां तक सफल हुई है, यह तो लोकसभा के चुनाव परिणाम ही बताएंगे। चूंकि 2018-19 का यह बजट अंतरिम बजट है, इसलिए विकास के मानदंडों पर इसकी समीक्षा संभव नही है । किंतु पिछले बजट की जीडीपी तथा रोजगार में वृद्धि पर एक नजर डालना जरूरी है। 2017-18 वित्तीय वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर लक्ष्यानुसार 7.2 प्रतिशत रही है, जिसे 2016-17 की 6.8 प्रतिशत वृद्धि दर की तुलना में संतोषजनक माना जा सकता है। किंतु रोजगार के मोर्चें प्रगति बहुत निराशाजनक रही है। उद्योगों में  लक्ष्य का 50 प्रतिशत रोजगार के अवसर सृजन नही हो पाए हैं।  पद संभालने के समय से ही वित्तमंत्री अरूण जेटली का वित्तीय अनुशासन पर जोर रहा है, परिणाम स्वरूप वे राजकोषीय घाटे को पिछले वर्ष जीडीपी के 3.5 प्रतिशत तक लाने में सफल रहे  थे । 2018-19 वर्ष में वास्तविक राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.4 प्रतिशत रहा,यद्यपि लक्ष्यानुसार कर राजस्व संग्रह न हो पाने के कारण राजकोषीय घाटा लक्ष्य से 0.1 प्रतिशत कम रहा, किंतु इसको 3.4 प्रतिशत तक सीमित रखना भी उपलब्धि कहा जा सकता है, क्योंकि डॉ. मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार सदैव ही  राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.0 प्रतिशत से नीचे लाने में असफल रही थी।
बजट में किसानों के लिए 75 हजार करोड़ रुपए की किसान सम्मान निधि स्थापित की जाने की घोषणा
इस अंतरिम बजट में किसान और मध्यम वर्गीय आयकर दाता  पर अधिक फोकस किये जाने के जो अनुमान लगाए जा रहे थे, वे  सही निकले। बजट में किसानों के लिए 75 हजार करोड़ रुपए की किसान सम्मान निधि स्थापित की जाने की घोषणा की गई है । इसके अंर्तगत बजट में 5.0 एकड़ से कम जोतवाले किसानों के खाते में साल में 6 हजार रुपए तीन किश्तों में जमा किए जाएंगे, जिसमें 2 हजार रुपए की पहली 2000 रुपए दिसंबर 2018 की राशि 31 मार्च से पूर्व जमा कर दी जाएगी, तथा दूसरी किश्त 30 जून  2019 में जमा कर दी जाएगी। इस राशि का हितग्राही किसान इस राशि को अपनी जरूरत उक्त राशि के उपयोग के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होगा । इससे 12 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे। गाय पालन को बढ़ावा देने के लिए बजट में 750 करोड़ रुपए का प्रावधान से राष्ट्रीय कामधेनु योजना प्रारंभ किए जाने का ऐलान किया गया है ।
इसके साथ ही सरकार ने पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए कर्ज के ब्याज में 2 प्रतिशत छूट का ऐलान भी किया गया है। संगठित क्षेत्र में काम करनेवाले मजदूरों को 7 हजार रुपए सालाना बोनस तथा 60 साल से ज्यादा उम्रवाले मजदूरों को हर महीने 3000 रुपए.की पेंशन दिए जाने का प्रस्ताव है । इस योजना से 10 करोड़ मजदूरों को लाभ होगा।  गर्भवती महिलाओं के लिए मातृवंदना योजना लागू किए जाने का ऐलान किया गया है। मध्यमवर्गीय आयकरदाता को आय पर आयकर की छूट की सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर कर 5.0 लाख कर दी गई है । मानक कटौती तथा आयकर में बचत व निवेश पर मिलने वाली छूट को मिलाकर अब 7.0 लाख रुपए तक की आय आयकर से मुक्त हो जाएगी । स्लैब में कोई बदलाव नही किया गया है, इसलिए 7.0 लाख रुपए सालाना से अधिक आय होने पर 20 प्रतिशत की आयकर की कटौती होगी । यह मध्यमवर्गीय आयकरदाता खासकर नौकरी पेशा आयकरदाता के लिए बहुत बड़ी राहत है।
बजट छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने वाले मतदातदाओं को शायद ही लुभा पाएगा
लोकसभा चुनाव के बाद किसी भी दल की सरकार केन्द्र में सत्तारूढ़ हो, आयकर की यह बढ़ी राहत आयकरदाता को हर हालत में मिलनी है, इसको अब कोई सरकार नकार नहीं सकती है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बजट छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने वाले मतदातदाओं को शायद ही लुभा पाएगा, क्योंकि ये मतदाता इन राज्यों के कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्रियों द्वारा शपथ ग्रहण करने के 24 घंटो के अन्दर कर्ज माफी और धान खरीदी पर बोनस देने की घोषणा से बहुत प्रभावित हैं । वे ही नही अन्य ग्रामीण मतदाताओं  खासकर किसानों पर बहुत अनुकूल प्रभाव पड़ा है । इन तीन राज्यों के 5 एकड़ से कम जोत वाले किसानों के राज्य सरकार ने कर्ज भी माफ  कर दिए, उनको धान की अच्छी कीमत भी मिल गई और अब बजट में घोषित केन्द्र सरकार द्वारा ं 2 हजार रुपए की तथाकथित किसान सम्मान निधि की दिसंबर 2018 में जमा की जानेवाली किश्त भी जो जल्द ही उनके खाते में जमा हो जाएगी, इन सबका  श्रेय भी वे अपने राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस दल की सरकारों को दे रहे हैं।इसलिए इन राज्यों में लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को वहां की दो तिहाई से अधिक सीटें मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
तेलांगाना में वहां के मतदाताओं की तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रति मतदाताओं कायम रहने वाली है । तेलंगाना के समान ही ओडीशा में नवीन पटनायक ने किसानों और कृषि मजदूरों के कल्याण के अच्छा काम किया है। उल्लेखनीय है कि  2004 के आम चुनाव के समय बाजपेयी सरकार तथा 2014 के आम चुनाव के समय डॉ. मनमोहन सिंह सरकार ने भी लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए ऐसे ही लोक लुभावन अंतरिम बजट प्रस्तुत किए थे। दोनों ही आम चुनाव में लोक लुभावन बजट सत्तारूढ़ दल को पुन: सत्तारूढ़ करवाने में असफल रहे ।
इस पृष्ठभूमि में कहा जा सकता है कि मोदी सरकार ने आसन्न लोक सभा चुनाव को ध्यान में रखकर भले ही जीत की संभावनाओं को प्रशस्त करने के लिए अंतरिम बजट में हर वर्ग को लुभाने के लिए भले ही सौगातों और वादों की झड़ी लगा दी हो, किंतु 2004 एवं 2014 के आम चुनाव के नतीजों के आधार पर कहा जा सकता है कि लोक लुभावन बजट प्रस्तुत करने मात्र से मोदी सरकार पुन: भारी बहुमत से केन्द्र में सत्तारूढ़ हो जाएगी, यह कोई जरूरी नहीं है। चुनाव में यदि भाजपा की जीत होती है तो उसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तिगत करिश्मे को श्रेय जाएगा।

Back to top button