साल भर बाद मैरी कॉम ने की धमाकेदार वापसी, इस जिद ने बनाया बॉक्सर

पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन भारत की दिग्गज महिला बॉक्सर एमसी मैरी कॉम ने एशियन चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक हासिल कर लिया है. बुधवार को उन्होंने एशियन चैंपियनशिप टूर्नामेंट के 48 किलो लाइट फ्लाइवेट वर्ग के फाइनल में उत्तर कोरिया की किम हयांग मि को एकतरफा फाइट में 5-0 से शिकस्त दी.
इसके साथ ही लंदन ओलिंपिक ब्रॉन्ज मेडल विजेता मैरी कॉम ने एशियन चैंपियनशिप में अपना पांचवां गोल्ड मेडल जीत लिया. 35 साल की मेरी कॉम ने 2003, 2005, 2010 और 2012 में गोल्ड मेडल जीते थे.
मैरी कॉम ने करीब एक साल बाद मुक्केबाजी रिंग में गोल्डन वापसी की है. राज्यसभा सांसद मैरी कॉम पांच साल तक 51 किलो में भाग लेने के बाद 48 किलोवर्ग में लौटी हैं.
बता दें कि गोल्ड मेडल्स की चमक हासिल करने के लिए मैरी कॉम जीतोड़ कड़ी मेहनत करती हैं. उन्हें ‘सुपरमॉम’ के नाम से भी जाना जाता है. उनके तीन बच्चे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बॉक्सिंग करना नहीं छोड़ा है. उनकी फिटनेस देखकर कोई नहीं कह सकता कि वो तीन बच्चों की मां हैं.
2008 में इस महिला मुक्केबाज को ‘मैग्नीफिशेंट मैरी कॉम’ की उपाधि दी गई थी. उन्होंने 2000 में अपना बॉक्सिंग करियर शुरू किया था और तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद खुद को न केवल स्थापित किया बल्कि कई मौकों पर देश को भी गौरवान्वित किया.
मैरी कॉम ने जब बॉक्सिंग शुरू की थी, तो उन्हें अपने घर से समर्थन नहीं मिला था. घर वाले मैरी कॉम के बॉक्सिंग के खिलाफ थे, लेकिन कड़ी मेहनत और लगन ने उनके घर वालों को भी मना लिया. मैरी कॉम पर बॉलीवुड में फिल्म भी बन चुकी है. इस फिल्म में प्रियंका चोपड़ा ने मैरी कॉम का किरदार निभाया था.
गौरतलब है कि मैरी कॉम को पद्मश्री, अर्जुन अवॉर्ड और राजीव गांधी खेल रत्न जैसे अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है. उनका जन्म 1 मार्च 1983 को मणिपुर के एक गरीब किसान परिवार में हुआ था. उनके मन में बॉक्सिंग का आकर्षण 1999 में उस समय उत्पन्न हुआ जब उन्होंने खुमान लम्पक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में कुछ लड़कियों को बॉक्सिंग रिंग में लड़कों के साथ बॉक्सिंग के दांव-पेंच आजमाते देखा था. तब ही उन्होंने ठान लिया था कि वे हर हाल में बॉक्सर बनेंगी.





