मुंबई में हर माह सामने आते हैं रेप के 50 मामले, महिलाओं की सुरक्षा पर उठे सवाल

मुंबई. महानगर में दो दिनों में सामूहिक दुष्कर्म की दो घटनाओं से खलबली मच गई है। एक मामले में पुलिस तीन दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों की पहचान नहीं कर पाई है वहीं दूसरे मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अब भी फरार है। हैरानी की बात ये है कि एक आरोपी लड़की के पिता का दोस्त है। इसके अलावा बांद्रा इलाके में सरे राह एक छात्रा ने अश्लील हरकत का भी मामला सामने आया है। इन घटनाओं ने महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित कहे जाने वाले मुंबई शहर पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुंबई पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि महानगर में हर महीने दुष्कर्म के 50 से ज्यादा मामले सामने आते हैं पुलिस इनमें से 15 फीसदी मामले भी सुलझा नहीं पा रही। नाबालिगों से दुराचार के मामले में तो सिर्फ 79 फीसदी मामलों में ही आरोपी पकड़े जा सकें हैं। दो जुलाई तक मुंबई में दुष्कर्म के 342 मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें से 53 की गुत्थी सुलझा पाने में पुलिस नाकाम रही है। महानगर में इस साल मई महीने में दुष्कर्म के 55 जबकि जून में 51 मामले सामने आए। वहीं साल पिछले साल पुलिस ने दुष्कर्म के 712 मामले दर्ज किए थे। इनमें से 632 में पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में कामयाब रही थी। वहीं साल 2015 में मुंबई में 710 मामले दर्ज किए गए थे इनमें से 642 की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली थी। अपराध की गुत्थी सुलझाने में नाकाम रही पुलिस का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने से संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) देवेन भारती ने बाहर होने की बात कहकर बातचीत करने से इनकार कर दिया।
गुत्थी सुलझाने में लगातार कमी
साल 2015 में दुष्कर्म के दर्ज मामलों में से 90 फीसदी मामलों को पुलिस ने हल करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अगले साल इसमें थोड़ी कमी आई और पुलिस 89 फीसदी मामलों की गुत्थी सुलझाने में सफल रही। जबकि इस साल अब तक पुलिस 85 फीसदी मामलों में ही आरोपियों पर शिकंजा कस पाई है। लगातार बेहतर होती तकनीक और चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी लगे होने के बावजूद मामले सुलझाने की दर कम होना हैरान करने वाला है।
साल 2015 में दुष्कर्म के दर्ज मामलों में से 90 फीसदी मामलों को पुलिस ने हल करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अगले साल इसमें थोड़ी कमी आई और पुलिस 89 फीसदी मामलों की गुत्थी सुलझाने में सफल रही। जबकि इस साल अब तक पुलिस 85 फीसदी मामलों में ही आरोपियों पर शिकंजा कस पाई है। लगातार बेहतर होती तकनीक और चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी लगे होने के बावजूद मामले सुलझाने की दर कम होना हैरान करने वाला है।
छेड़छाड़ के एक हजार से ज्यादा मामले
इस साल महानगर में महिलाओं से छेड़छाड़ के 1073 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। साथ ही 673 महिलाओं के अपहरण की घटनाएं सामने आईं हैं। अपहृत महिलाओं में 667 नाबालिग थीं। पिछले साल इस दौरान 595 महिलाओं के अपहरण की घटनाएं हुईं थीं।
इस साल महानगर में महिलाओं से छेड़छाड़ के 1073 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। साथ ही 673 महिलाओं के अपहरण की घटनाएं सामने आईं हैं। अपहृत महिलाओं में 667 नाबालिग थीं। पिछले साल इस दौरान 595 महिलाओं के अपहरण की घटनाएं हुईं थीं।





