महापर्व छठ पूजा के तीसरे दिन भगवान भास्कर को शाम को दिया जाएगा अर्घ्य, ये है पूजा का शुभ मुहूर्त

सूर्य उपासना और लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के तीसरे दिन शनिवार को भगवान भास्कर को शाम को अर्घ्य दिया जाएगा। वहीं, रविवार को सुबह अर्घ्य देने के बाद ही व्रती लोग अन्न-जल ग्रहण करेंगे। वहीं, छठ पूजन के व्रती, श्रद्धालु और आम जन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए उत्तराखंड में रहने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और बंगाल से जुड़े लोगों के संगठन पूर्वा सांस्कृतिक मंच ने राजधानी देहरादून में 18 छठ घाटों पर पूरी व्यवस्था अपने हाथों में ले ली है। इन घाटों पर वॉलंटियरों और डाक्टरों की तैनाती के साथ ही कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है।

चार दिवसीय छठ महोत्सव में दून के बाजार गुलजार हो उठे हैं। महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को खरना हुआ। खरना में पूरे दिन उपवास के बाद व्रतियों ने शाम को गुड़ और चावल की विशेष खीर (रसियाव) और रोटी बनाई। व्रतियों ने प्रसाद ग्रहण करने से पहले प्रसाद स्वरूप (नेवज) निकाला। जिसे व्रतियों के ग्रहण करने के बाद परिवार के अन्य सदस्य ग्रहण करते हैं।

पर्यावरण संरक्षण का लेंगे संकल्प 

पूर्वा सांस्कृतिक मंच के महासचिव सुभाष झा ने बताया कि मंच की ओर से जिन घाटों पर पूजा की व्यवस्था की गई है। वहां एक साथ भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया जाएगा और आरती की जाएगी। शाम को अर्घ्य के दौरान पांच बजे और सुबह छह बजे आरती की जाएगी। उन्होंने कहा कि शाम की आरती के बाद सभी व्रती और श्रद्धालु पर्यावरण का संकल्प लेंगे। इसमें सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने और किसी भी प्रकार के प्रदूषण नहीं फैलाने का संकल्प लिया जाएगा।

वहीं, मिथिला पूर्वी देवभूमि महासभा समिति की ओर से काट बंगला बस्ती भाग दो घाट की साफ सफाई की गई। समिति के अध्यक्ष विनोद झा ने बताया कि घाट को शनिवार रात को दुल्हन की तरह सजाया जाएगा। इस मौके पर कोषाध्यक्ष पंडित हरेराम झा, सचिव अरुण चौधरी, महासचिव त्रिवेणी राय, उपसचिव अमोद राय, सदस्य दीपक पंडित, सहयोगकर्ता अजय राणा और दीपक अरोड़ा स्थित अन्य लोग उपस्थित रहे।

बिहारी महासभा ने किया मुख्यमंत्री का धन्यवाद 

प्रदेश में पूर्वांचल के लोगों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने छठ पूजा की छुट्टी की घोषणा कर दी है। इसके लिए बिहारी महासभा के अध्यक्ष लल्लन यादव ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया।

एक ही परिवार के छह सदस्यों ने रखा छठ मैया का व्रत 

राजपुर रोड निवासी परिवार बिहार से बाहर रहकर भी अपनी सभ्यता और संस्कृति को संजोए हुए है। मंजू देवी ने बताया कि वह पिछले 12 सालों से छठ मैया का व्रत रख रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले उनकी सास व्रत रखती थीं। जो अभी बिहार में हैं और वहीं व्रत रख रही हैं। बाकि उनके परिवार में उनके साथ उनकी देवरानी रेखा देवी, रंबा झा, बेबी झा सहित उनकी बहु नीतू और बेटी प्रिति छठ मैया का व्रत रखती है। सभी महिलाएं साथ में खाना बनाती हैं और पूजा-अर्चना करती हैं।

अरुण ने किए 25 साल पूरे 

राजपुर रोड स्थित मकान नंबर 180 ए निवासी अरुण चौधरी ने बताया कि वह पिछले 25 सालों से छठ महापर्व मना रहे हैं और निष्ठाभाव से व्रत रख रहे हैं। बिजली विभाग में कार्यरत अरुण चौधरी ने बताया कि उनके परिवार में उनकी मां छठ मैया का व्रत रखती हैं। कुछ साल पहले उनकी तबीयत खराब हो गई थी। डॉक्टर तक ने जवाब दे दिया था तब उन्होंने व्रत रखा और एक सप्ताह में ही उनकी मां की तबीयत ठीक हो गई। तब से लेकर वह हर वर्ष छठ मैया का व्रत रखते आ रहे हैं।

शुभ मुहूर्त 

दो नवंबर यानी छठ पूजा वाले दिन सूर्य को अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त सुबह छह बजकर 33 मिनट और शाम को पांच बजकर 35 मिनट है। षष्ठी तिथि दो नवंबर की रात 12 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर तीन नवंबर को रात एक बजकर 30 मिनट तक रहेगी।

इसलिए की जाती है छठ पूजा 

छठ पूजा के लिए अलग-अलग कथाएं प्रचलित हैं। इनमें एक राजा प्रियवद की है, जो काफी लोकप्रिय है। माना जाता है कि राजा प्रियवद निसंतान थे। उन्होंने अपनी पीड़ा महर्षि कश्यप से साझा की। उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ करने को कहा। यज्ञ में आहुति के लिए बनाई गई खीर खाने से उनकी पत्नी रानी मालिनी को पुत्र की प्राप्ति हुई, लेकिन पुत्र मृत पैदा हुआ।

राजा प्रियवद पुत्र को लेकर श्मशान पहुंचे और पुत्र वियोग में अपने प्राण त्यागने लगे। तभी ब्रह्माजी की पुत्री देवसेना प्रकट हुईं। उन्होंने कहा कि वह मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं, इसलिए उनका नाम षष्ठी रखा गया है। जो कोई विधि विधान से उनकी पूजा करता है वह उनकी मांगें पूरी करती हैं। राजा प्रियवद ने उनके कहे अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को माता का व्रत रखा और उन्हें पुत्र प्राप्ति हुई।

दो नवंबर- डाला छठ अस्ताचल सूर्य को पहला अर्घ्य

तीन नवंबर-उगते सूर्य को अर्घ्य और व्रत का पारण

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