भारत-पाकिस्तान के बीच किए जाएं सांस्कृतिक आदान-प्रदान तो दूरियां हो सकती है कम: प्रोफेसर शामिक घोष

कश्मीरी सूफी संत लल्लेश्वरी या लल्ल-दय्द की कविताओं का पहली बार बांग्ला में अनुवाद हुआ। पश्चिम बंगाल के प्रोफेसर शामिक घोष ने लल्लेश्वरी की कविताओं पर आधारित 40 बांग्ला गाने लिखे हैं। उन्होंने बताया कि संस्कृति ही एक मात्र ऐसी चीज है जिससे आपस में प्यार बांटा जा सकता है। अगर भारत-पाकिस्तान के बीच भी ऐसे प्रयास किए जाएं तो यह दूरियां कम हो सकती है।
श्रीनगर में लल्लेश्वरी की कविताओं पर आधारित सीडी के विमोचन के दौरान कहा कि उन्होंने पहली बार लल्लेश्वरी की कविता अपनी बेटी की 9वीं कक्षा की एनसीईआरटी की हिंदी किताब में पढ़ी। इससे वह प्रभावित हुए और नवंबर 2016 से इस कार्य में जुट गए। ऐसे आगे बढ़े कि फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस प्रयास से पश्चिम बंगाल और कश्मीर में सांस्कृतिक आदान-प्रदान की शुरुआत होगी।
प्रोफेसर शामिक घोष ने अमर उजाला से बात करते हुए बताया कि कला और संस्कृति के जरिये हम आपस में प्यार बांट सकते हैं। ऐसा करने से दूरियां भी कम हो सकती है। लल्लेश्वरी ने भी अपनी कविताओं में कहा है कि हिन्दू-मुस्लिम सब भाई-भाई हैं। राजनीतिक समाधान कुछ समय के लिए शांति ला सकता है, लेकिन अगर हम संस्कृति और कला को आपस में बांटेंगे तो उससे प्यार ज्यादा बढ़ता है क्योंकि हम एक दूसरे को सही से समझ पाते हैं। आज के दौर में उन सूफी संतों की कही गई बातें काफी महत्वपूर्ण हैं, चाहे वह बांग्ला के ललोन हो या फिर कश्मीर की लल्लेश्वरी, दोनों प्यार बांटने की बात करते हैं। केवल अगर 30-40 प्रतीशत लोग इन सूफी संतों की दी गई शिक्षा को अपनाएंगे तो यह दुनिया बादल जाएगी।





