प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने दिया पश्चिम बंगाल में भाजपा को झटका

कोलकाता। अभी 2019 के लोकसभा चुनाव का चुनाव होना बाकी है उससे पहले ही बीजेपी लगातार कही-न-कही लगातार झटके खा ही रही है वो चाहे उत्तर प्रदेश में माया-अखिलेश के गठबंधन की हो या फिर कुछ दिन पहले लोकसभा चुनाव में हुई हार की हो।
आज तो सुप्रीम कोर्ट ने भी बीजेपी को एक झटका दे दिया है सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी की रथयात्रा को पश्चिम बंगाल में अनुमति देने से किया इनकार दिया है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में सिर्फ बैठक करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि रथ यात्रा से सौहार्द बिगड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार से अपनी गणतंत बचाओ यात्रा के तहत बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) की प्रस्तावित जनसभाओं और रैलियों की अनुमति देने को कहा है।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई को अधिकारियों के साथ अपनी प्रस्तावित रथ यात्रा का संशोधित कार्यक्रम प्रस्तुत करने और आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने के लिए कहा।
जस्टिस एलएन राव और एसके कौल की बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा कि वह संविधान के तहत भाषण और अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार को ध्यान में रखते हुए रथ यात्रा के लिए भाजपा के संशोधित कार्यक्रम पर विचार करे।
पीठ ने कहा कि संभावित कानून व्यवस्था की राज्य सरकार की आशंका को निराधार नहीं कहा जा सकता है और भाजपा को उचित तरीके से आशंका का समाधान करने के लिए सभी संभव कदम उठाने होंगे।
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गौरतलब है कि रथयात्रा का मामला मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई और एसके कौलन की बेंच के सामने तत्काल सुनवाई के लिए रखा गया था। जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी थी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल में आगामी 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर 42 जगहों पर रथयात्रा निकालने की योजना है। जिसे भाजपा (BJP) लोकतंत्र बचाओ रैली का नाम दे रही है। लेकिन राज्य की ममता सरकार ने भाजपा को रैली निकालने की अनुमति नहीं दी है। जिस पर पार्टी पहले राज्य की हाईकोर्ट गई और वहां से रथयात्रा की अनुमति लेकर आई। हालांकि, इस अनुमति पर डबल बेंच ने फिर से रोक लगा दी। जिसके बाद पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और मामले की सुनवाई तय हो गई थी।
अदालत ने भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) को भी स्पष्ट किया था कि यात्रा कानून के दायरे में रहते हुए निकाली जाएगी। अगर इस दौरान सरकारी संपत्ति का नुकसान होता है तो इसके लिए भाजपा (BJP) जिम्मेदार होगी। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें सांप्रदायिक तनाव की आशंका जताई गई थी।
कोर्ट ने कई निर्देश भी दिए न्यायाधीश तपोव्रत चक्रवर्ती ने राज्य भाजपा को निर्देश दिया कि किसी भी जिले में रथयात्रा के प्रवेश से कम से कम 12 घंटे पहले उक्त जिले के पुलिस अधीक्षक को सूचित कर दिया जाए। सामान्य यातायात व्यवस्था बाधित ना हो। अदालत ने पुलिस अधिकारियों को भी पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने के साथ यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि कहीं भी कानून का उल्लंघन ना हो।

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