पीएम करेंगे सबसे लंबे रेल-रोड ब्रिज का उद्घाटन, जानें ब्रिज के बारे में कुछ खास बातें

असम और अरुणाचल प्रदेश का 21 साल का लंबा इंतजार खत्म हो गया है। ब्रह्मपुत्र नदी पर डबल डेकर रेल और रोड ब्रिज (बोगीबील पुल) बनकर तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पुल को क्रिसमस के मौके पर 25 दिसंबर को देश को समर्पित करेंगे, जो कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन भी है। इससे दोनों राज्यों के बीच लोग आसानी से आ-जा सकेंगे।
साथ ही उत्तर पूर्वी सीमा पर तैनात सेना को भी आसानी से रसद आदि पहुंचाई जा सकेगी। यानी रक्षा मोर्चे पर भी यह पुल अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार हो गया है। यह पुल देश के पूर्वोत्तर इलाके की जीवन रेखा होगा और असम और अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर और दक्षिण तट के बीच संपर्क की सुविधा प्रदान करेगा। इससे अरुणाचल प्रदेश के अंजाव, चंगलांग, लोहित, निचली दिबांग घाटी, दिबांग घाटी और तिरप के दूरस्थ जिलों को
अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर रक्षा सेवाओं के लिए भी आड़े वक्त में खास भूमिका निभा सकता है।
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इस डबल-डेकर पुल से ट्रेन और गाड़ियां दोनों गुजर सकेंगी। ऊपरी तल पर तीन लेन की सड़क बनाई गई है।
नीचे वाले तल पर दो ट्रैक हैं। पुल इतना मजबूत बनाया गया है कि इससे मिलिट्री टैंक भी निकल सकेंगे।
असम से अरुणाचल जाने में 10 घंटे कम लगेंगे। डिब्रूगढ़-धेमाजी की दूरी 500 से घटकर 100 किमी बचेगी।
बोगीबील पुल असम समझौते का हिस्सा है, जिसे साल 1997-98 में अनुशंसित किया गया था।
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने 22 जनवरी, 1997 को इस पुल की आधारशिला रखी थी।
हालांकि, इस पर काम 21 अप्रैल 2002 को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय में शुरू हुआ।
यह संयोग ही है कि पुल के शुभारंभ की तारीख 25 दिसंबर है, जो वाजपेयी की वर्षगांठ का भी दिन है।
परियोजना में देरी के कारण इसकी लागत 85 फीसद बढ़कर करीब 5,920 करोड़ रुपए हो गई।
शुरु में इसकी लागत 3230.02 करोड़ रुपए थी। पुल की लंबाई 4.31 किमी से बढ़ाकर 4.94 किमी की गई।
रणनीतिक महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने पुल निर्माण को 2007 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था।





