नक्सलियों के सिर उठाते ही आंध्र ने भेजे दो करोड़ दस लाख

आंध्रप्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में गोदावरी नदी पर निर्माणाधीन पोलावरम राष्ट्रीय सिंचाई परियोजना के डूबान से सुकमा जिले के प्रभावित होनें वाले क्षेत्र के संयुक्त सर्वेक्षण के लिए आंध्रप्रदेश शासन ने छग शासन को दो करोड़ दस लाख सनतावन हजार रूपए की राशि उपलब्ध करा दी है। राशि का डिमांड ड्राफ्ट आंध्रप्रदेश से जलसंसाधन संभाग सुुकमा को दो दिन पहले भेजी गई है। सर्वे में दो करोड़ सत्तर लाख रूपए खर्च होनें का अनुमान लगाया गया है।

इसमें से 59 लाख 43 हजार रूपए आंध्रप्रदेश दस साल पहले ही दे चुका है। अंतर राशि अभी उपलब्ध कराई गई है। यह राशि ऐसे समय में मिली है जब सुकमा जिलें में नक्सली एक बार फिर उग्र हो गए हैं। ऐसी स्थिति में डूबान प्रभवित क्षेत्र का संयुक्त सर्वे वर्तमान परिस्थितियों में शुरू हो पाएगा इसे लेकर संदेह भी गहरा गया है।
गौरतलब है कि पिछले साल डेढ़ साल से सुकमा जिले में नक्सली गतिविधियों के हिसाब से शांति की स्थिति को देखते हुए छग शासन ने शांत जल्दी से जल्दी डूबान प्रभावित क्षेत्र के सर्वे के लिए आंध्रप्रदेश से पैसा भेजने का अनुरोध किया गया था। इसके लिए साल भर पहले आंध्रप्रदेश को डिमांड नोट यहां से भेजा गया था। सर्वे करने एजेंसी भी तय कर ली गई थी पर राशि समय पर नहीं मिलने से एजेंसी तय होनें के बाद निविदा निरस्त करनी पड़ गई थी।
दुबारा नई एजेंसी तय करना पड़ा
पैसे के आभाव में पहली निविदा निरस्त कर दुबारा निविदा बुलाकर हाल ही में नई एजेंसी सर्वे कार्य के लिए चिन्हित की गई है। विदित हो कि सुकमा जिले में नक्सलियों की सक्रियता के कारण पोलावरम बांध के बैक वाटर से डूबान प्रभावित संभावित क्षेत्र का संयुक्त सर्वे का काम करीब दस सालों से रूका पड़ा है। सर्वे नहीं होने से छग शासन को अभी तक डूबान से प्रभावित होनें वाले क्षेत्र की जमीनी हकीकत की भी अच्छी तरह से जानकारी नहीं है। डूबान से प्रभावित क्षेत्र की जो थोड़ी बहुत जानकारी उपलब्ध है वह आंध्रप्रदेश शासन द्वारा सालों पहले छग शासन से मिले राजस्व व वन भूमि से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर है।
सर्वे शुरू करने की तैयारी को एर्राबोर कांड ने दिया था झटका
पोलावरम बांध के बैक वॉटर से सुकमा जिले के डूब वाले क्षेत्रों के संयुक्त सर्वे के लिए दस साल पहले 18 सितंबर 2007 को 59 लाख 43 हजार रूपए आंध्रप्रदेश शासन ने दंतेवाड़ा जलसंसाधन संभाग के पास जमा कराया था। उस समय सर्वे शुरू करने की तैयारी चल रही थी कि सुकमा जिले के एर्राबोर में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन दर्जन जवान शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद सर्वे का विचार उस समय रोक दिया गया था। पिछले कुछ समय से शांति का माहौल बना हुआ था और इसी को ध्यान में रखकर आंध्रप्रदेश से सर्वे स्टीमेट दो करोड़ सत्तर लाख रूपए में से दो करोड़ दस लाख सन्तावन हजार रूपए की राशि जल्दी से जल्दी भेजने का अनुरोध शासन ने किया था। विदित हो कि हाल ही में नक्सलियों ने भेज्जी क्षेत्र में मुठभेड़ में 12 जवानों को शहीद करके अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। जिसके बाद से एक बार फिर क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है।
पोलावरम से कितने नुकसान की आंशका
पोलावरम बांध के डूबान से सुकमा जिले के कोंटा नगर पंचायत और पांच ग्राम पंचायतों के अठारह बसाहट क्षेत्रों के डूबने की आशंका है। करीब सात हजार राजस्व व वन भूमि के भी डूबने की संभावना जताई गई। डूबान से करीब 35 हजार तथा एर्राबोर-कोंटा के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग का करीब13 किलोमीटर के हिस्से के भी प्रभावित होनें की संभावना है। छग शासन ने परियोजना के निर्माण में समझौते के उल्लंघन का आरोप आंध्रप्रदेश शासन पर लगाते हुए 20 अगस्त 2011 को सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर किया है।
‘आंध्रप्रदेश शासन ने पोलावरम बांध के डूबान प्रभावित संयुक्त सर्वे के लिए पूरी राशि उपलब्ध करा दी गई है। राशि उपलब्ध कराने की जानकारी छग शासन को दे दी गई है।’
-जेके लकरा, कार्यपालन अभियंता जलसंसाधन संभाग सुकमा।





