दीन दयाल उपाध्याय का अर्थ चिंतन पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी

सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर में आज नव स्थापित पण्डित दीन दयाल उपाध्याय शोध पीठ द्वारा दीन दयाल उपाध्याय का अर्थ चिंतन विषय पर प्रथम राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में कुल 25 शोध पत्र पढ़े गए। संगोष्ठी में भारत सरकार के वित्त रही मन्त्री शिव प्रताप शुक्ला मुख्य अथित के रूप में मौजूद रहे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दीन दयाल जी ये कहते थे कि अंधाधुन्द विकास इस देश के लिए बाधक होगा। योजनाओं को बनाते समय सम्बंधित विकास की आवश्यकता होगी। इस लिए अंधाधुन्द विकास भी नही करना चाहिए बल्कि सोच समझ कर समाज एवं देश के हित को ध्यान में रखकर विकास करना चाहिए। दीन दयाल जी कहते थे कि परिवार से बड़ा समाज और समाज से बड़ा देश है। उसको ध्यान में रखकर विकास पर चलें। विकास के कड़ी को जोड़ते जाएंगे तो निश्चित ही दीन दयाल जी के विचारों पर चलेते जाएंगे।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रोफेसर सुरेन्द्र दुबे ने कहा कि रोटी, कपड़ा, मकान, दवाई, पढाई ये पांच चीजो की जब तक पूर्ति नही होती तब हमारे सारे आर्थिक चिंतन बेकार है। जिस दिन ये पांचों चीज हमारे समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुच जाएगा उस दिन हमारी आर्थिक चिंतन का उद्द्देश्य पूरा हो जाएगा। विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद डुमरियागंज सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि समाज का विकास शिक्षा एवं ज्ञान से होता है, जो व्यक्ति के अंतिम क्षण तक साथ चलता है। सिद्धार्थनगर का विकास तभी होगा जब सिद्धार्थ विश्वविविद्यालय का विकास होगा। पण्डित दीनदयाल जी सोचते थे की जो अर्थ व्यवस्था होनी चाहिए वो सदैव राष्ट्र एवं समाज से जुड़ा होना चाहिए।
इटवा विधायक एवं बुद्ध विद्या पीठ डिग्री कालेज के प्रोफेसर डॉ0 सतीश द्विवेदी ने बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि समग्रता एवं समन्वय भी आर्थिक चिंतन में दिखना चाहिए ये दीन दयाल जी कहते थे। अधिकतम उत्पाद एवं न्यायोचित वितरण पर जोर देते थे कि उत्पादन से ज्यादा जोर वितरण पर होना चाहिए। पंडित दीन दयाल उपाध्याय का अर्थ चिंतन व्यवस्था निश्चित ही भारत के भविष्य का रास्ता दिखाता है। सदर विधायक श्यामधनी राही ने आये हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। इसके अलावा सुलभ इंटरनेशनल नई दिल्ली के वरिष्ट सलाहकार प्रो0 अनिल दत्त मिश्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वारणसी के पण्डित दीन दयाल उपाध्याय शोध पीठ के निदेशक डॉ0 एसके मिश्रा, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झाँसी के खाद्य एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के अध्यक्ष प्रो0 देवेंद्र कुमार भट्ट, सामाजिक चिंतक मुकेश जी, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक महेंद्र कुमार, प्रो0 एसके मिश्र, प्रो0 अनिल दत्त मिश्रा ने भी दीन दयाल उपाध्याय का अर्थ चिंतन विषय पर अपना विचार प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन पण्डित दीन दयाल शोध पीठ के संयोजक डीएन पाण्डेय ने करते हुए कहा कि अर्थ व्यवस्था की संरचना नीचे से ऊपर की ओर होनी चाहिए। अंत मे कुल सचिव उदय प्रताप सिंह ने संगोष्ठी में आये अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान परीक्षा नियंत्रक व्यास नारायण सिंह, वित्त अधिकारी विनोद कुमार, डॉ0 दीपक बाबू, डॉ0 शिवम शुक्ला, डॉ0 दिनेश प्रसाद, डॉ0 अरुण द्विवेदी, डॉ0 पूर्णेश नारायण सिंह, डॉ0 एनके गुप्ता, डॉ0 विजय पाण्डेय, डॉ0 अमित कुमार भारती, डॉ0 राजेन्द्र सिंह, डॉ0 राजेन्द्र बौद्ध, डॉ0 रविन्द्र पाण्डेय, डॉ0 वीणा गोपाल मिश्र, डॉ0 श्रीमती मंजू मिश्रा, दुर्गा प्रसाद दीक्षित एवं छात्र छात्राओं में सीमा जायसवाल, अजहर हुसैन, खुश्बू कसौधन, दिव्या गिरी, जया मिश्रा सहित भारी संख्या में प्रोफेसर, प्राचार्य, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।





