झारखंड में 19 महीने के अपने कार्यकाल के बाद राज्यपाल रमेश बैस अब महाराष्ट्र का करेंगे रुख…

झारखंड में 19 महीने के अपने छोटे से कार्यकाल के बाद राज्यपाल रमेश बैस अब महाराष्ट्र का रुख करेंगे। 12 राज्यों के राज्यपाल और 1 केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल बदले गए हैं। रमेश बैस अब महाराष्ट्र के नए गर्वनर होंगे। झारखंड में बतौर राज्यपाल 19 महीने का कार्यकाल रमेश बैस के लिए विवादों भरा रहा। जिस मुद्दे पर उनका सरकार से सबसे ज्यादा टकराव हुआ वह था ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर चुनाव आयोग का मंतव्य। चुनाव आयोग ने मंतव्य भेजा। राजभवन में लिफाफा पहुंचा लेकिन महीनों बीतने के बाद भी यह राज ही रहा कि लिफाफे में क्या था क्योंकि वह खुला ही नहीं। सिलसिलेवार ढंग से इस पूरे विवाद को जानेंगे। 

बीजेपी ने सीएम पर लगाया था गंभीर आरोप
अप्रैल 2022 में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने प्रेस वार्ता कर सीएम हेमंत सोरेन पर रांची के अनगड़ा में खनन पट्टा का लीज लेने का आरोप लगाया था। आरोप था कि मुख्यमंत्री ने पद का दुरुपयोग करते हुए खनन पट्टा का लीज हासिल किया। खनन पट्टा को पर्यावरण क्लियरेंस मिल गया जबकि खनन विभाग मुख्यमंत्री के पास ही है। बीजेपी ने राज्यपाल से शिकायत की और राज्यपाल ने इसे केंद्रीय निर्वाचन आयोग के पास अग्रसारित कर दिया। 25 अगस्त 2022 को चुनाव आयोग ने अपना मंतव्य भेज दिया। चर्चा ने जोर पकड़ा कि मुख्यमंत्री की विधायकी रद्द की जा चुकी है। बरहेट में उपचुनाव तक की बात होने लगी थी। सत्तापक्ष और विपक्ष इंतजार करता रहा लेकिन लिफाफा नहीं खुला। 24 सितंबर को जब पत्रकारों ने राज्यपाल से पूछा कि लिफाफा कब खुलेगा तो उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि वह इतनी जोर से चिपका है कि खुल ही नहीं रहा। 

कई अनुरोधों के बाद भी नहीं खुला वो लिफाफा
इससे पहले 15 सितंबर 2022 को मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग से कहा कि हमें मंतव्य की प्रति उपलब्ध कराएं। आयोग ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि निर्वाचन आयोग और राज्यपाल के बीच हुआ संवाद विशेषाधिकार के दायरे में आता है। जब तक राज्यपाल मंतव्य को सार्वजनिक नहीं करते, आयोग का ऐसा करना विशेषाधिकार का उल्लंघन होगा। 15 सितंबर को ही मुख्यमंत्री राज्यपाल से भी मिले थे। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से अनुरोध किया था कि उन्हें मंतव्य की कॉपी उपलब्ध कराई जाए ताकि वह विधि-सम्मत कदम उठा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल की चुप्पी से झारखंड में राजनीतिक भ्रम की स्थिति बन रही है। जनता परेशान है कि क्या होने वाला है। स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। इससे भी पहले 1 सितंबर को यूपीए के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर मंतव्य की कॉपी उपलब्ध कराने की मांग की थी। इसमें सुप्रियो भट्टाचार्य और महुआ माजी सरीखे नेता थे। 

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