जानिए कौन तय करता है क्रिकेट मैच के बाद कौन होगा मैन ऑफ़ द मैच, सुनकर बिल्कुल भी नहीं होगा यकीन…

क्रिकेट भारत का सबसे लोकप्रिय खेल मन जाता है जब या इंग्लैंड का राष्ट्रीय  खेल है भारत का राष्ट्रीय खेल हाँकी है पर इसकी लोकप्रियता इतनी अभी तक नहीं हुई जितनी क्रिकेट की आज के समय में है | अगर आप क्रिकेट प्रेमी है तो  आपको यह भी पता होगा  भारत में क्रिकेट के कितने प्रसंशक है | जैसे फुटबाल के सबसे ज्यादा  फैन ब्राजील में है उसी तरह क्रिकेट के  सबसे ज्यादा फैन इंडिया में मौजूद है |  क्रिकेट मैच ख़तम होने के बाद जब बारी आती है मैं आफ था मैच की जो की उसको दिया जाता है जिसने पूरे मैच में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया होता है चाहे बह जीतने वाली टीम से हो या हारने वाली टीम से हो अगर उस खिलाडी ने सबसे ज्यादा रन बनाये है या सबसे ज्यादा विकेट लिए है तो मैं आफ था मैच उसको ही दिया जाता है | और पुरस्कार के तौर पर उस खिलाडी को अच्छी खासी धनराशी भी दी जाती है  वैसे यह सब बाते तो

हर क्रिकेट प्रेमी  जानता ही होगा पर कुछ ऐसी भी मैन आफ था मैच को लेकर ऐसी बातें है जो शायद ही आपको पता होगी मैच के समाप्त होते ही सभी लोग अंदाजा लगाने लगते है की मैं आफ था मैच किसको दिया जायेगा क्योकि दर्शक पूरा समय यही देखते है जिसने सबसे ज्यादा रन बनाये है या सबसे ज्यादा विकेट लिए है उसको को  मैं आफ था मैच दिया जायेगा परन्तु ऐसा नहीं है | दर्शक बीएस इतना ही देखकर सिर्फ

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अंदाजा लगाते रहते है इसी  वजह से यह तुक्का कभी कभी गलत साबित हो जाता है | दरअसल मैं आफ तह मैच का फैसला केवल इस बात पर ही नहीं होता की सबसे ज्यादा रन किसने बनाये या सबसे जयादा विकेट किसने लिए कुछ और भी बहुत सी बारीकियां होती है जो दर्शको की नज़र से साफ़ साफ़ बच  जाती है पर कमेंटेटर की नज़रों से नहीं जो विभिन्न भाषाओँ में मैच का पूरा हाल सुनाते रहते है |

तुरंत बाद उनका एक पैनल बैठता है और फिर एक एक पॉइंट पर चर्चा की जाती है की इस मैच का मन आफ द मैच किसको घोषित करना है | और फिर सभी पनैल के मेम्बरों की सहमती के बाद एक नाम निकला जाता है जो हो है मैन आफ द मैच | कभी कभी ऐसा भी हो जाता है मैच का रेफरी भी अम्पायरों और कमेंटेटरों के पैनल का हिस्सा बन जाता है |  यह सब छोटे मैच में होता है और जब बात चैम्पियंस ट्राफी या फिर हो वर्ल्ड कप जैसे बड़े मैच की तब भी यही प्रोसेस अपनाया जाता है | परन्तु उनके पैनल में जो मेम्बरों को जो संख्या होती है वो काफी बड़ी होती है | ऐसा करने का एक मात्र यही कारन होता है की कही इंटरनेशनल लेवल के मैच में कहीं गलती न हो जाये  इसी लिए हर तरह की सावधानी बरती जाती है और फिर जाकर एक मैन आफ द मैच वाले खिलाडी का सिलेक्शन होता है |

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