जम्मू-कश्मीर अपने बलबूते कायम नहीं रह पाएगा : उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य का भविष्य भारत के साथ है। अगर घाटी के लोग भारत से अलग होकर आजादी चाहते हैं तो जल्द वे अपना अस्तित्व खो बैठेंगे। जम्मू-कश्मीर कभी अपने बलबूते पर कायम नहीं रह पाएगा।
उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार रात राधा कुमार की किताब ‘पैराडाइज एट वार, पॉलिटिकल हिस्ट्री ऑफ कश्मीर’ के विमोचन के मौके पर कहा कि मेरा मानना है कि ऐसे माहौल में जब एक तरफ पाकिस्तान और एक तरफ चीन नजरें गड़ाए बैठा है, जम्मू-कश्मीर की आजादी कायम नहीं रह पाएगी। यह मेरी व्यावहारिक सोच है और यह विश्लेषण जम्मू-कश्मीर की हकीकत पर आधारित है।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य के लोगों की आजादी की मांग उनकी भावनाओं पर आधारित है और वह उस पर कोई तर्क-वितर्क नहीं करना चाहते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में घाटी में जो हालात हैं, उससे लोग मुख्यधारा में शामिल दलों में भरोसा खो रहे हैं। उमर ने कहा कि कश्मीर में मुख्य पार्टियों की राजनीतिक जमीन सिकुड़ रही है, लेकिन यह स्थिर नहीं है। मुख्यधारा के राजनीतिक दलों और अलगाववादियों के बीच यह उतार-चढ़ाव लगा रहता है।
उन्होंने कहा कि पिछले साल लोगों को एक उम्मीद की किरण दिखाई दी थी, जब स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने गोली और दुर्व्यवहार की जगह कश्मीर के लोगों को गले लगाने की बात कही थी। एक साल बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं बदला है।





