क्या आपको पता है आपके शरीर का ये हिस्सा लगातार हो रहा हैं खत्म?

डॉ. श्रीगोपाल काबरा के मुताबिक, जिस प्रकार जैन मुनि जीवन की सार्थकता और उपादेयता के चुकने का भान होने पर संथारा कर देह त्यागते हैं, उसी प्रकार प्राणी शरीर में ‘संत’ कोशिकाएं भी संथारा करती हैं। वे इसलिए संथारा करती हैं, ताकि अन्य अपना सार्थक जीवन जी सकें।
भ्रूण के सृजन काल में जब अंगों का विकास हो रहा होता है, तब चयनित कोशिकाओं का अंग में समायोजन और शेष का संथारा कर विलुप्त होना एक सतत प्रक्रिया है। अंगों में समायोजित न हुई कोशिकाएं अपनी उपादेयता चूक जाने पर संथारा द्वारा अपना जीवन त्यागकर अवशोषित हो जाती हैं। हथेली में अलग-अलग उंगलियां बनती हैं, क्योंकि उनके बीच की कोशिकाएं संथारा कर विलुप्त हो जाती हैं।
भ्रूण के सृजन काल में जब अंगों का विकास हो रहा होता है, तब चयनित कोशिकाओं का अंग में समायोजन और शेष का संथारा कर विलुप्त होना एक सतत प्रक्रिया है। अंगों में समायोजित न हुई कोशिकाएं अपनी उपादेयता चूक जाने पर संथारा द्वारा अपना जीवन त्यागकर अवशोषित हो जाती हैं। हथेली में अलग-अलग उंगलियां बनती हैं, क्योंकि उनके बीच की कोशिकाएं संथारा कर विलुप्त हो जाती हैं।अपोप्टोसिस की क्रिया में बाधा बढ़ाती है कैंसर का खतरा
रक्त की सभी कोशिकाएंलाल, श्वेत और बिंबाणु (प्लेटलेट्स) जन्म से ही निश्चित समयोपरांत आत्महनन के लिए प्रोग्राम्ड होती हैं। लाल रक्त कोशिकाएं 120 दिन और श्वेत कोशिकाएं सात से 10 दिन में अपना कार्यकाल समाप्त कर आत्महनन कर लेती हैं। इस सुनियोजित प्रोग्राम्ड आत्महनन को ‘अपोप्टोसिस’ कहते हैं।
रक्त की सभी कोशिकाएंलाल, श्वेत और बिंबाणु (प्लेटलेट्स) जन्म से ही निश्चित समयोपरांत आत्महनन के लिए प्रोग्राम्ड होती हैं। लाल रक्त कोशिकाएं 120 दिन और श्वेत कोशिकाएं सात से 10 दिन में अपना कार्यकाल समाप्त कर आत्महनन कर लेती हैं। इस सुनियोजित प्रोग्राम्ड आत्महनन को ‘अपोप्टोसिस’ कहते हैं।
कोशिकाओं में एक आत्महनन जीन होता है, जो एक जीन घड़ी द्वारा सक्रिय होता है। चयनित कोशिकाओं में एक जीन घड़ी प्रारंभ से ही चालू होती है, जो निर्धारित समय पर आत्महनन जीन को सक्रिय कर देती है।
कैंसर कोशिकाओं को आत्महनन के लिए प्रवृत्त करने में विकिरण और कीमोथेरेपी की मुख्य भूमिका होती है। तीव्र गति से विभाजित होती कैंसर कोशिका में आत्महनन जीन सुषुप्त होने से अमरत्व मिल जाता है, कैंसर उपचार आत्महनन जीन को वापस चैतन्य और सक्रिय कर देता है।
हर दिन मरती हैं अरबों कोशिकाएं
कैंसर उपचार में कैंसर कोशिका में कैंसरकारक अपोप्टोसिस जीन सुषुप्त करने और सक्रिय करने वाली प्रक्रियाओं में द्वंद्व होता है। अपोप्टोसिस जीन सुषुप्त रहा तो अमरत्व और सक्रिय हुआ तो नश्वरता।
कोशिका स्वयं भी अपनीआंतरिक संरचना या सक्रियता के छिन्न-भिन्न होने पर अपने आत्महनन जीन को सक्रिय कर सकती है। एक वयस्क में प्रतिदिन 50-70 अरब कोशिकाएं अपोप्टोसिस द्वारा आत्महनन करती हैं, फिर भी शरीर बना रहता है, कारण- प्रतिदिन उतनी ही नई कोशिकाएं निर्मित होती हैं।





