उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट में हुए एमओयू की राह में रोड़ा बनी ये पॉलिसी

इन्वेस्टर्स समिट (डेस्टिनेशन उत्तराखंड)  के दौरान राज्य में ऊर्जा, पर्यटन व अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश का सरकार से करार (एमओयू) करने वाली कंपनियों को भी सीधे निवेश की अनुमति नहीं मिलेगी।उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट में हुए एमओयू की राह में रोड़ा बनी ये पॉलिसी

उत्तराखंड की खरीद नीति (प्रॉक्यूर्मेंट पॉलिसी) में तय निविदा प्रक्रिया के चलते निवेश पर करार करने के बावजूद इन कंपनियों को इस प्रक्रिया से गुजरना ही पड़ेगा। करार करने के बावजूद कंपनी निविदा में एल 1 (सबसे कम बोली) नहीं आती है तो, इस नीति के चलते उसे काम नहीं मिलेगा। 

खरीद नीति के इस पेच से एमओयू साइन कर चुकी कंपनियों और डेस्टिनेशन उत्तराखंड से भारी-भरकम निवेश का उम्मीद पाले सरकार को गहरा झटका लग सकता है।  अक्तूबर 2018 में हुए समिट (निवेशक सम्मेलन) में सरकार ने 15 अलग-अलग सेक्टरों में देश दुनिया की 673 कंपनियों के साथ निवेश के लिए करार किया था। समिट के माध्यम से कई बड़ी कंपनियों ने सरकार की ओर से चिन्हित 15 सेक्टरों में निवेश करने की इच्छा जताते हुए बकायदा करार पर हस्ताक्षर किए। लेकिन, अब खरीद नीति के तहत ऊर्जा, पर्यटन व अर्बन इंफ्रास्ट्रेक्चर सेक्टर में निवेश के लिए एमओयू करने वाले निवेशकों को निविदा प्रक्रिया से गुजरना होगा।

इन सेक्टरों में निवेशकों को सीधे निवेश की अनुमति नहीं है। इन्वेस्टर्स समिट में सबसे ज्यादा निवेश के प्रस्ताव भी इन्हीं सेक्टरों में मिले हैं। संबंधित विभागों की ओर से जल्द ही टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जो कंपनी टेंडर प्रक्रिया में भाग लेगी, उसमें एल-1 रहने वाली कंपनी को ही निवेश करने का मौका मिलेगा। ऐसे में एमओयू से निवेश को अपने खाते में सुनिश्चित मान चुकी कंपनियों को निविदा प्रक्रिया की प्रतिस्पर्धा में भी अव्वल आना होगा। 

इन सेक्टरों में होगा निवेश के लिए निविदाएं

प्रदेश की प्रॉक्यूर्मेेंट पॉलिसी के अंतर्गत पर्यटन, ऊर्जा व अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। प्रदेश में यदि किसी कंपनी ने रोपवे निर्माण करने के लिए सरकार से एमओयू किया है तो उस कंपनी को भी टेंडर प्रक्रिया में आना होगा। इसी तरह प्रदेश में सोलर प्रोजेक्ट, बस स्टैंड व अन्य क्षेत्रों में निवेश के लिए भी निविदा से काम मिलेगा। 

मार्च 2019 तक 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश को धरातल पर उतारने का लक्ष्य
सरकार ने मार्च 2019 तक प्रदेश में करीब 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश को धरातल पर उतारने का लक्ष्य रखा है। इस निवेश के लिए उद्यमियों से सहमति मिल चुकी है। जिसके लिए 17 सौ एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। सिंगल विंडो सिस्टम से अब तक 2464.1 करोड़ रुपये के निवेश की अनुमति निवेशकों को दी जा चुकी है। जिन निवेशकों को सभी विभागों से अनुमति प्राप्त हो चुकी है। वे जल्द ही निवेश को शुरू करेंगे। 

प्रदेश की प्रॉक्यूर्मेंट पॉलिसी के अनुसार ही कुछ सेक्टरों में एमओयू के बाद ही निविदा प्रक्रिया अपनाई जाएगी। विनिर्माण उद्योगों में निवेशक सीधे निवेश कर सकता है। लेकिन, पर्यटन, ऊर्जा व शहर के आधारभूत ढांचे से संबंधित निवेश में टेंडर प्रक्रिया अनिवार्य है।

सेक्टर वार निवेश के प्रस्ताव
सेक्टर         निवेश की राशि (करोड़ में)
ऊर्जा        40707.24
पर्यटन        15362.72
अर्बन इंफ्रास्ट्रेक्चर    14286.69
बायोटेक्नोलॉजी         125
कृषि एवं बागवानी    96.5
विनिर्माण उद्योग        17191
आईटी        4628
हेल्थ केयर        16890
आयुष वेलनेस        1751.55

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