आईपीएल मैचों के लंबा चलने पर बीसीसीआई बरते सख्ती: सुनील गावस्कर

 जैसे-जैसे आईपीएल अपने आधे पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, यह साफ दिख रहा है कि पिछले साल की फाइनलिस्ट रॉयल चैलेंजर्स बेंलगुरु और पंजाब किंग्स अपनी शानदार लय को इस सीजन भी जारी रखे हुए हैं और पहले से भी बेहतर नजर आ रही हैं। खेल में आत्मविश्वास क्या कर सकता है, यह इन टीमों के प्रदर्शन से साफ दिखाई देता है। जो चीजें उनके लिए पिछले साल तक मुश्किल लगती थीं, अब वे उन्हें बेहद आसानी से कर रही हैं।

दरअसल, इस साल के आईपीएल में हर चीज पिछले वर्षों से बेहतर नजर आ रही है। सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, बल्कि इसके आसपास का पूरा माहौल भी शानदार है। मैं यह बात एक कमेंटेटर के नजरिए से कह रहा हूं। होटल, यात्रा कार्यक्रम, सब कुछ पिछले साल से ज्यादा बेहतर है। उड़ानों के इतने विकल्प हैं कि अगर रात देर से होटल लौटें, तब भी अगली सुबह की फ्लाइट नाश्ते से पहले पकड़ने की मजबूरी नहीं रहती। हालांकि, एक चीज जरूर सुधारी जा सकती है और वह है मैच खत्म होने में लगने वाला समय।

बीसीसीआई हर साल आईपीएल टीमों के लिए एसओपी जारी करता है और पिछले कुछ वर्षों से ओवरों के बीच टाइमर भी लागू है, ताकि अगला ओवर 60 सेकेंड के भीतर शुरू हो जाए। अगर कोई टीम दो चेतावनियों के बाद भी नियम तोड़ती है तो विपक्षी टीम को पांच रन पेनाल्टी के रूप में दिए जाते हैं। यह शानदार नियम है और ज्यादातर टीमों ने इसका पालन भी किया है।

अंपायरों और मैच रेफरी को यह भी देखना चाहिए कि कहीं बल्लेबाज ही अगला ओवर शुरू होने में देरी का कारण तो नहीं बन रहे। यहां भी पांच रन की पेनाल्टी जैसा नियम लागू हो सकता है, ताकि बल्लेबाज समय बर्बाद न करें और फील्डिंग टीम पर बेवजह दबाव न पड़े। जब टी-20 क्रिकेट की शुरुआत हुई थी, तब मैदान पर 180 मिनट की उलटी गिनती वाली घड़ी होती थी, क्योंकि मैच उसी समय में खत्म होना चाहिए था।

बाद में हर विकेट गिरने पर नए बल्लेबाज को आने के लिए दो मिनट की छूट दी गई यानी अगर पांच विकेट गिरते हैं तो 10 मिनट अतिरिक्त मिल जाते हैं। इसके साथ सिएट टायर का स्ट्रैटेजिक टाइम आउट भी जुड़ गया और मैच लगभग एक घंटा ज्यादा खिंच जाता है। यहीं बीसीसीआई को और सख्ती करनी चाहिए।

आजकल सभी बल्लेबाज डगआउट में बैठे रहते हैं, पहले की तरह ड्रेसिंग रूम में नहीं। इसलिए नए बल्लेबाज को आने की समय सीमा दो मिनट से घटाकर एक मिनट की जा सकती है। अगर बल्लेबाज तैयार न हो तो कुछ चेतावनियों के बाद पेनाल्टी रन लागू होने चाहिए। इसी तरह स्ट्रैटेजिक टाइम आउट के बाद पहली गेंद ठीक दो मिनट 30 सेकेंड में फेंकी जानी चाहिए।

अभी अक्सर ओवर खत्म होने, अंपायर के टाइम आउट संकेत देने और दोबारा खेल शुरू होने तक लगभग तीन मिनट लग जाते हैं। गर्मी के मौसम में खिलाड़ियों को आराम और पेय पदार्थ की जरूरत होती है, लेकिन इसका गलत फायदा उठाया जा रहा है। यहां भी रन पेनाल्टी बड़ा फर्क ला सकती है। आज जब टूर्नामेंट में इतनी बड़ी रकम दांव पर लगी है तो आर्थिक जुर्माना टीमों के लिए ज्यादा मायने नहीं रखता।

अक्सर फ्रेंचाइजी खिलाड़ियों का जुर्माना भी खुद भर देती हैं। जब तक सजा ऐसी न हो जो मैच के नतीजे को प्रभावित करे, तब तक उसका असर नहीं होगा। यही वजह है कि जब टीम समय पर ओवर पूरे नहीं कर पाती और आखिरी ओवर में 30 गज के बाहर एक खिलाड़ी कम रखने की सजा मिलती है, तो घबराहट दिखती है। क्योंकि वह सीधे मैच पर असर डालती है।

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