विवेक की हत्या से राजधानी में उबाल, सबने की निंदा

लखनऊ : एप्पल के रिजनल मैनेजर विवेक तिवारी से शहरवासियों में बेहद गुस्सा ने है। सभी विपक्षी पार्टियों और आम शहरियों ने घटना की कड़ी निंदा की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उल्लेखनीय है कि सुलतानपुर निवासी विवेक तिवारी अपने सहयोगी को घर छोड़ने के लिए जा रहे थे, तभी देर रात पुलिस ने रोकने पर गाड़ी न रोकने पर उनको गोली मार दी थी जिससे विवेक तिवारी की अस्पताल में मौत हो गयी और दो मासूम बेटियों और पत्नी के साथ एक हंसता—खेलता परिवार बिखर गया।
-पी.एन. सिंह, समाजसेवी
गोमतीनगर में विगत रात्रि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा विवेक तिवारी की हत्या ने लखनऊ वासियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। योगी सरकार में पुलिस बेलगाम हो चुकी है। चोरी से लेकर तमाम अपराध पुलिस की निगहबानी में हो रहे हैं। पुलिसिया वसूली से आम नागरिक, व्यापारी, पटरी दुकानदार एवं सामान्य राहगीर सभी त्रस्त हैं। विवेक तिवारी की हत्या इसी क्रम की पराकाष्ठा है, अन्यथा डेढ़ बजे रात को किसी व्यक्ति को उसके सहकर्मी के साथ कार में जा रहे होने पर हाथ देकर रोकने और फिर गोली मार देने का क्या औचित्य है? पुलिस की गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार पर सरकार को गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है। खाकी की गुंडगर्दी का यह आलम है कि पुलिस जनप्रतिनिधियों तक को कुछ नहीं समझती। पूर्व की सरकारों में जनप्रतिनिधियों के दबाव में पुलिस की गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार पर काफी हद तक लगाम था।
-विजय शंकर सिंह, पूर्व डीआईजी, यूपी पुलिस
सरकार और अफसरों की एक अघोषित नीति बनती जा रही है कि वे अधीनस्थों को मुठभेड़ों के लिये उकसायें। मैं यहां प्रोत्साहन शब्द जान—बूझकर नहीं लिख रहा हूँ क्योंकि जिस तरह से राजनेताओं से लेकर बड़े अफसरों तक मुठभेड़ करके अपना खोखला शौर्य दिखाने की होड़ में दौड़ते हैं, वह कभी-कभी लगता है कि विभाग, सरकार, समाज और कानून सबके लिये घातक है।
-अभिषेक सिंह आशू, प्रदेश प्रवक्ता, सेकुलर समाजवादी पार्टी
यूपी पुलिस निरंकुश हो गयी है। पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिसमें पुलिस ने निदोर्ष लोगों की गोली माकर हत्या कर दी और बाद में उसे एनकाउंटर दिखा दिया। मैं इस घटना की घोर निंदा करता हूं। यह घटना बताती है कि प्रदेश में कानून—व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गयी है, इसके लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
-ज्योसना सिंह, अधिवक्ता
पुलिस का काम जानता की सुरक्षा करने का होता है। राजधानी की इस घटना ने आम लोगों में डर का मौहल बना दिया है। अभी तक लोग केवल बदमाशों के डर से रात में नहीं चलते थे अब पुलिस का डर भी हो गया है। विवेक तिवारी की गाड़ी को रोकने के तमाम दूसरे उपाय सिपाही कर सकते थे। वे अपने बचाव में आत्मरक्षा की बात कहकर कानून को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें अपनी जान को खतरा था तो गाड़ी के टायर पर फायर कर सकते थे सीधे सिर में गोली मारने की कोई वजह नहीं थी।
-प्रियंका गुप्ता, समाजसेविका
सत्ता के नशे चूर ये पुलिसवाले किसी को भी गोली मार सकते हैं और उसे एनकाउंटर का नाम दे सकते हैं। प्रदेश में अराजकता और गुंडा राज है जिसके लिए प्रदेश सरकार ज़िम्मेदार है। आम आदमी की सुरक्षा ख़तरे में है! आज स्व. विवेक तिवारी के साथ जो घटना हुई, वह कल मेरे साथ या आपके साथ भी हो सकती है, इसका विरोध हम सबको मिलकर करना होगा। जब तक दोषियों को सज़ा ओर विवेक तिवारी के परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे।
-शालिनी श्रीवास्तव, शिवकीर्ति फाउंडेशन की उपाध्यक्ष
सरकार पुलिस को “मित्र पुलिस” बनाने का काम करने की बात कह रही और पुलिस जनता पर ही गोलियां चला रही है। घटना पर पुलिस जिस तरह से बयान बदल रही उससे साफ है कि कुछ ना कुछ बचाने का काम हो रहा है। पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए रखा जाता है वो जनता की मदद करने के बजाए जिस तरह से काम कर रही उससे पुलिस मित्र पुलिस बनती नही दिख रही है। इस घटना से आम जनमानस के बीच डर का मौहल बन रहा है। लोग रात में चलने से डरेंगे।
-रीता सिंह, सरल केयर फाउंडेशन की प्रेसीडेंट
विवेक तिवारी ने अपनी सहयोगी महिला को सुरक्षा के कारण अपने साथ लेकर उसके घर छोड़ने जा रहे थे। यह बताता है कि महिला सुरक्षा को लेकर वे कितना सजग थे। महिला सुरक्षा के ही कारण वे सूनसान जगह पर शायद अपनी गाड़ी नहीं रोकना चाहते रहे होंगे। पुलिस को अगर कुछ गलत दिखा तो उनकी गाड़ी के टायर पर गोली मारकर रुकने को मजबूर करते। सीधे सिर में गोली मारने की घटना से पता चलता है कि पुलिस की नीयत में पहले से ही खोट थी।
-सुमन सिंह रावत,पावर विंग संस्था की प्रेसीडेंट
समाज में वैसे ही अपराधियो का भय फैला हुआ है। इसमें अगर पुलिस भी जनता के साथ ऐसा सलूक करने लगी तो नागरिक अधिकारों का क्या होगा? यह सोचने का विषय है। पुलिस को जिस संयम का पालन करना चाहिए था, वह नही किया गया। यह सरकार और पुलिस के चेहरे पर बदनुमा धब्बा बन गया है जिसको साफ करना आसान नहीं रह गया है।





