रामचरितमानस की ये चौपाई बदल सकती है आपकी किस्मत,जप करने से मिलेगी सभी कष्टों से मुक्ति

इस बात से तो आप सभी अवगत ही होगें हमारे हिन्‍दु धर्म शास्‍त्रों में रामायण को विशेष महत्‍व दिया गया है,अगर बात की जायेग रामचरितमानस जैसे महत्‍वपूर्ण ग्रंथ की तो शायद ही कोई ऐसा घर होगा जिसके घर में यह ग्रंथ नही होगा। हालांकि अधिकांश लोगों को रामायण सीरियल या राम लीला से ही जानकारी मिल सकती है पर बहुत लोग रामायण को पढ़कर भी रामायण में निपुण हुये है।रामचरितमानस की ये चौपाई बदल सकती है आपकी किस्मत,जप करने से मिलेगी सभी कष्टों से मुक्ति

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि तुलसीदास महराज ने रामायण लिखकर मनुष्‍य का जीवन सफल कर दिया है। आपको बता दें कि रामचरितमानस को तुलसीदास ने अवधी भाषा में लिखी है जो कि 16वीं शताब्‍दी में लिखी गई थी। यह एक महाकाव्‍य है, रामायण में आप लोगों को ढेर सारी चौपाइया मिलेगी। जानकारी के लिये बता दें कि अगर कोई व्‍यक्ति रामायण चौपई को पढ़ ले और उसका अथे समझ ले तो समझ लीजिये उसका जीवन सफल हो गया है, इसी क्रम में आज कुछ ऐसी चौपाईयों के संबंध में बताने वाले है जो विधिपूर्वक जाप करने पर जीवन की विभिन्‍न प्रकार की मनोकामनाये पूर्ण हो जाया करती है,जिन चौपाइयों के संबंध में आज हम बात कर रहे है वो कुछ इस प्रकार से है……….

परीक्षा में सफलता के लिए : जेहि पर कृपा करहिं जनुजानी। कवि उर अजिर नचावहिं बानी।। मोरि सुधारहिं सो सब भांती। जासु कृपा नहिं कृपा अघाती।।
लक्ष्मी प्राप्ति के लिए : जिमि सरिता सागर मंहु जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।। तिमि सुख संपत्ति बिनहि बोलाएं। धर्मशील पहिं जहि सुभाएं।।
रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति के लिये : साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहि सिद्धि अनिमादिक पाएं।।
प्रेम वृद्धि के लिए : सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीती।।

धन-संपत्ति की प्राप्ति के लिए : जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं। सुख सम्पत्ति नानाविधि पावहिंII
सुख प्राप्ति के लिए : सुनहि विमुक्त बिरत अरू विबई। लहहि भगति गति संपति नई।।
विद्या प्राप्ति के लिए : गुरु ग्रह गए पढ़न रघुराई। अलपकाल विद्या सब आई।।
शास्त्रार्थ में विजय पाने के लिए : तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा। आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।।
विपत्ति में सफलता के लिए : राजिव नयन धरैधनु सायक। भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।।
पुत्र प्राप्ति के लिए : प्रेम मगन कौशल्या निसिदिन जात न जान। सुत सनेह बस माता बाल चरित कर गान।।
दरिद्रता दूर करने के लिए : अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद धन दारिद्र दवारिके।।
विवाह के लिए : तब जनक पाइ बसिष्ठ आयसु ब्याह साज संवारि कै। मांडवी श्रुतिकीरित उरमिला कुंअरि लई हंकारि कै।।
अकाल मृत्यु से बचने के लिए : नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट। लोचन निज पद जंत्रित प्रान केहि बात।।
मुकदमा में विजय पाने के लिए : पवन तनय बल पवन समाना।बुधि विवके बिग्यान निधाना।।
रोगों से बचने के लिए : दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम काज नहिं काहुहिं व्यापा।।
जहर को खत्म करने के लिए : नाम प्रभाऊ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को।।
खोई हुई वास्तु वापस पाने के लिए : गई बहारे गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।
शत्रु को मित्र बनाने के लिए : वयरू न कर काहू सन कोई। रामप्रताप विषमता खोई।।
भूत प्रेत के डर को भगाने के लिए : प्रनवउ पवन कुमार खल बन पावक ग्यान धुन।
जासु हृदय आगार बसहि राम सर चाप घर।।
ईश्वर से माफ़ी मांगने के लिए : अनुचित बहुत कहेउं अग्याता। छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।।
सफल यात्रा के लिए : प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। हृदय राखि कौशलपुर राजा।।
वर्षा की कामना की पूर्ति के लिए : सोइ जल अनल अनिल संघाता। होइ जलद जग जीवनदाता।।
प्रसिद्धि पाने के लिए : साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।।
ज्ञान प्राप्ति के लिए : तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा। आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।।

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