रंग ला रही है नक्सलियों को सरेंडर कराने की मुहिम, 12 साल में 591 लौटे मुख्यधारा में

मुंबई. आदिवासी इलाके के भटके युवाओं को नक्सलवाद छोड़कर मुख्यधारा में लाने की मुहिम धीरे-धीरे ही सही कामयाबी की ओर बढ़ती दिख रही है। राज्य सरकार के नक्सल विरोधी अभियान की ओर से जो जानकारी दी गई है। उसके मुताबिक चौथे चरण के बाद हालिया ग्यारहवें चरण में सबसे ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। गड़चिरोली जिला इसमें सबसे आगे है। ग्यारह चरणों में आत्मसमर्पण करने वाले कुल 591 नक्सलियों में से 572 इसी जिले के हैं।
रंग ला रही है नक्सलियों को सरेंडर कराने की मुहिम, 12 साल में 591 लौटे मुख्यधारा में
 
दरअसल, आदिवासी इलाके के युवक-युवतियों से झूठे वादे और परिवर्तन का सपना दिखाकर नक्सली उन्हें अपने साथ जोड़ लेते हैं। लेकिन बाद में इन युवाओं को जब अपनी गलती का एहसास होता है उनके लिए मुख्यधारा में लौटना मुश्किल हो जाता है। नक्सली भी उन्हें धमकाते हैं। ऐसे में कई युवा अपनी इच्छा के खिलाफ नक्सलियों का साथ देते हैं। इन्हीं युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अगस्त 2005 से आत्मसमर्पण योजना शुरू की गई है। इसके चंद रोज बाद यानी 25 सितंबर को बड़ी कामयाबी मिली और मदन अय्या उर्फ बालना बलय्या ने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद भी नक्सलियों के आत्मसमर्पण का सिलसिला जारी रहा और गडचिरोली, यवतमाल, चंद्रपुर, गोंदिया जिलों में 591 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

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 अभियान शुरू होने के बाद पहले चरण में 77 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। चौथे चरण में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या सबसे ज्यादा 133 थी। जबकि बीते दो चरणों में क्रमशः 75 और 98 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के आगे हथियार डाले हैं। नक्सल विरोधी अभियान के विशेष पुलिस महानिरीक्षक शरद शेलार के मुताबिक जनसंवाद पर जोर देने के चलते नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं।

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