मंजुला की मौत ने कैदियों की सुरक्षा पर खड़े किए सवाल

मुंबई. बाॅम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि महिला जेल में मंजुला शेट्टे की मौत ने राज्य की जेल में बंद कैदियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसलिए हम सरकार से जानना चाहते है कि जेल की आंतरिक सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए गए है। न्यायमूर्ति आरएम सावंत व न्यायमूर्ति साधना जाधव की खंडपीठ ने सरकार को एक सप्ताह के भीतर इस संबंध में जवाब देने का निर्देश दिया है।
मंजुला की मौत ने कैदियों की सुरक्षा पर खड़े किए सवाल
खंडपीठ ने कहा है कि जेल में सुविधाओं के मुद्दे को लेकर भी एक याचिका लंबित है। क्या उस याचिका में कैदियों की सुरक्षा के मुद्दे को शामिल किया गया है। सरकारी वकील इसकी भी जानकारी हमें दें। यदि सुरक्षा का मुद्दा लंबित याचिका में शामिल नहीं होगा, तभी हम इस याचिका पर सुनवाई करेंगे। गौरतलब है कि पुणे के येरवडा जेल में बंद बालू चौधरी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जेल में कैदियों की शिकायत पर ध्यान नहीं दिया जाता है। उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। कानून में मिले अधिकार भी कैदियों को नहीं दिए जाते।

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शिकायत करनेवाले कैदियों के साथ बदसलूकी के साथ-साथ उनकी पिटाई भी की जाती है। इसके अलावा जेल में पंखे तक नहीं हैं, जिससे गर्मियों के दिनों में कैदियों को काफी परेशानी होती है। जेल में कैदियों को अमानवीय स्थिति में रखा जाता है। याचिका में उल्लेखित इन तथ्यों पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि हाल ही में भायखला जेल कि कैदी शेट्टे की मौत ने जेल में बंद कैदियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। इसलिए हम सरकार से जानना चाहते हैं कि जेल की आंतरिक सुरक्षा को लेकर क्या इंतजाम किए गए हैं। खंडपीठ ने सरकारी वकील प्रजक्ता शिंदे को इस संबंध में जवाब देने को कहा है।
 
क्राइम ब्रांच ने शुरू की शेट्टे मामले की जांच
भायखला जेल में महिला कैदी मंजुला शेटे की हत्या मामले की जांच क्राइम ब्रांच ने शुरू कर दी। जांच अधिकारियों ने नागपाडा पुलिस से अब तक हुई छानबीन की जानकारी लेने के साथ जेल में लगे सीसीटीवी की तस्वीरें भी अपने कब्जे में ले ली हैं। इसके अलावा अधिकारी जेल में खाने-पीने के सामानों में भ्रष्टाचार के आरोपों की भी जांच करेंगे। हालांकि क्राइम ब्रांच के जांच शुरू करने से पहले सभी छह जेलकर्मी फरार हो गईं हैं।
 
संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) संजय सक्सेना ने क्राइम ब्रांच द्वारा मामले की छानबीन शुरू किए जाने की पुष्टि की है। हालांकि उन्होंने जांच का हवाला देते हुए और कुछ खुलासा करने से इनकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच के लिए चार टीमें बनाई है। जांच टीम में शामिल अधिकारी जेल में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच करने के साथ-साथ जेल के भीतर कैदियों के लिए लाए जाने वाले सामानों से जुड़ी जानकारी भी हासिल कर रहे हैं जिससे पता लगाया जा सके कि भ्रष्टाचार के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
 
आरोपों के मुताबिक कैदियों को दिए जाने वाले नाश्ते में दो अंडे और पांच पाव कम होने की शिकायत करने पर ही मंजुला की पीट-पीटकर जान ले ली गई। वहीं जेल के दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों पर भी शिकंजा कस सकता है क्योंकि पिटाई के बाद बुरी तरह जख्मी मंजुला को पांच घंटे जेल में रखा गया और मौत के बाद ही उसे अस्पताल में ले जाया गया। खुलासा हुआ है कि मंजुला की मौत अस्पताल में पहुंचने से आधे घंटे पहले ही हो गई थी। वहीं आरोपी महिला जेलकर्मियों की भी तलाश की जा रही है।
 
गुप्तांगों पर चोट के निशान नहीं
मंजुला की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ हो गया है कि उसकी मौत पिटाई के चलते ही हुई है। मंजुला के शरीर पर चोट के 13 निशान पाए गए। हालांकि गुप्तांगों पर चोट के कोई निशान नहीं है। एक महिला कैदी ने अपने बयान में दावा किया था कि आरोपी जेलकर्मियों ने मंजुला के गुप्तांग में लाठी डाली थी। 
जांच राज्य सीआईडी को सौंपने की मांग
कैदी मजूला शेट्टे की मौत को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में मामले की जांच स्टेट सीआईडी को सौंपने का अनुरोध किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप भालेकर ने इस संबंध में याचिका दायर की है। याचिका में अनुरोध किया है कि इस मामले में जिन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 377 भी लगाई जाए। याचिका में दावा किया गया है कि महिला जेल में कैदियों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए है।
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