भारत के कारण पड़ोसी देशों में प्याज के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर
मुंबई/ढाका.प्याज सिर्फ भारत में महंगी नहीं है। यह बांग्लादेश और मलेशिया जैसे दूसरे देशों को भी रुला रहा है। ज्यादातर एशियाई देशों में प्याज खाने का अभिन्न अंग है। पाकिस्तान की बिरयानी हो, मलेशिया की बेलकन या बांग्लादेश की फिश करी, सब में प्याज का इस्तेमाल होता है। लेकिन दिल्ली के साथ बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भी यह 80 रुपए किलो (वहां की करेंसी में 100 टका) बिक रही है। इससे पहले बांग्लादेश में प्याज कभी इतनी महंगी नहीं हुई थी। इसकी वजह भी भारत ही है।
भारत के कारण पड़ोसी देशों में प्याज के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर
भारत प्याज का सबसे बड़ा निर्यातक है। लेकिन घरेलू बाजार में 5 महीने में दाम 7 गुना बढ़ने के बाद सरकार ने पिछले महीने इसके निर्यात की न्यूनतम कीमत 850 डॉलर प्रति टन तय कर दी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 700 डॉलर तक के भाव पर खरीदार हैं। लेकिन इससे ज्यादा दाम पर कोई खरीदने को तैयार नहीं। जुलाई में भारत से औसतन 186 डॉलर प्रति टन के भाव पर निर्यात हुआ था।
ढाका के ट्रेडर मोहम्मद इदरीस ने कहा, हम इंतजार के सिवाय कुछ नहीं कर सकते। उम्मीद है कि दिसंबर में भारत में नई फसल आने के बाद दाम कम होंगे और वहां से निर्यात बढ़ेगा। भारतीय एक्सपोर्टर अजीत शाह ने भी कहा कि 850 डॉलर के रेट पर खरीदार बहुत कम हैं। कारोबारियों का कहना है कि प्याज निर्यात करने वाले सभी देशों में इस बार किल्लत है। पिछले साल रिकॉर्ड सप्लाई के कारण प्याज के दाम बहुत गिर गए थे। इसलिए भारत और पाकिस्तान में किसानों ने इस साल गर्मियों में इसकी बुवाई कम कर दी।
2016-17 में भारत से 24 लाख टन प्याज निर्यात हुआ था। सबसे ज्यादा बांग्लादेश, मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात को गया था। प्याज आयात करने वाले देशों में श्रीलंका, इंडोनेशिया और नेपाल भी हैं। अब ये चीन और मिस्र की तरफ देख रहे हैं। लेकिन इनके पास बेचने के लिए ज्यादा प्याज ही नहीं है। पाकिस्तान में भी सितंबर में दाम 50 रुपए किलो तक पहुंच गए थे। इसके बाद वहां की सरकार ने निर्यात पर अघोषित रूप से रोक लगा रखी है। निर्यातकों को जरूरी सर्टिफिकेशन ही नहीं मिल रहा है।
भारत से प्याज खरीदने को तरजीह
एशियाई देश भारत से प्याज खरीदना पसंद करते हैं। एक तो यहां के प्याज का फ्लेवर बेहतर होता है। दूसरा, यहां से ढुलाई का भाड़ा कम लगता है। और तीसरा, डिलीवरी भी जल्दी मिल जाती है। उन्हें मिस्र का प्याज मिलने में चार हफ्ते और चीन से सप्लाई आने में तीन हफ्ते लग जाते हैं। भारत से हफ्ते भर में पहुंच जाता है।
भारत में साल में प्याज की तीन फसलें होती हैं। खरीफ, लेट खरीफ और रबी। कुल उपज में खरीफ का हिस्सा 15%, लेट खरीफ का 20% और रबी का 65% होता है। स्टोरेज के लिहाज से रबी का प्याज ही अच्छी मानी जाती है। इस बार दोनों खरीफ की बुवाई पिछले साल से 29% कम हुई है। इस कारण अक्टूबर में मंडियों में 17% कम प्याज की सप्लाई हुई। राष्ट्रीय बागबानी अनुसंधान एवं विकास फाउंडेशन के डायरेक्टर पी.के. गुप्ता ने बताया कि दोनों खरीफ का उत्पादन पिछले साल के 75 लाख टन से करीब 25% कम रहने का अंदेशा है।





