बच्चों में चारित्रिक गुण विकसित करने की सर्वश्रेष्ठ अवस्था बचपन -संयुक्ता भाटिया

सीएमएस, आनन्द नगर एवं राजाजीपुरम में डिवाइन एजुकेशन कान्फ्रेन्स

लखनऊ। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, आनन्द नगर द्वारा ‘डिवाइन एजुकेशन कान्फ्रेन्स’ का भव्य आयोजन शनिवार को विद्यालय प्रांगण में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में पधारी लखनऊ की महापौर संयुक्त भाटिया ने दीप प्रज्जवलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में भाटिया ने कहा कि बच्चों में चारित्रिक गुणों को विकसित करने की सर्वश्रेष्ठ अवस्था बचपन ही है, अतः बचपन में ही चारित्रिक उत्कृष्टता, जीवन मूल्यों एवं संस्कारों की सुदृढ़ नींव रखी जानी चाहिए। उन्होंने ‘डिवाइन एजुकेशन कान्फ्रेन्स’ के माध्यम से परिवार, स्कूल तथा समाज के सहयोग से बच्चों में ईमानदारी, चारित्रिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक गुणों को विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रभावशाली प्रयासों के लिए सी.एम.एस. की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

समारोह में बोलते हुए सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी ने इस अवसर पर कहा कि शिक्षा एक सतत् और रचनात्मक प्रक्रिया है। समाज की समृद्वि एवं प्रगति हेतु बच्चों को भौतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कर उनके व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास ही शिक्षा का मुख्य लक्ष्य है। बालक को आगे चलकर क्या बनेगा, किस रूप में समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होगा, यह इस बात पर निर्भर है कि बाल्यावस्था में उसके प्रकार की शिक्षा प्रदान की गई है। सी.एम.एस. आनन्द नगर कैम्पस की प्रधानाचार्या रीना सोती ने कहा कि ‘डिवाइन एजुकेशन कान्फ्रेन्स’ बच्चों में निहित क्षमताओं को विकसित करने एवं आध्यात्मिक, सामाजिक तथा भौतिक ज्ञान से परिपूर्ण ‘टोटल क्वालिटी पर्सन’ बनाने में अत्यंत उपयोगी हैं।

इसके अलावा, सी.एम.एस. राजाजीपुरम (प्रथम कैम्पस) द्वारा डिवाइन एजुकेशन कान्फ्रेन्स का आयोजन आज सी.एम.एस. कानपुर रोड ऑडिटोरियम में किया गया। इस अवसर पर छात्रों ने ईश्वर भक्ति से परिपूर्ण अपने गीत-संगीत के माध्यम से ईश्वरीय एकता का ऐसा आलोक बिखेरा कि दर्शक व अभिभावक मंत्रमुग्ध हो गये। छात्रों ने अपने अभिभावकों के समक्ष विद्यालय द्वारा प्रदान की जा रही नैतिक व आध्यात्मिक शिक्षा से परिपूर्ण ज्ञान का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं वार्षिक परीक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को पुरष्कृत कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए सी.एम.एस. राजाजीपुरम (प्रथम कैम्पस) की प्रधानाचार्या निशा पाण्डेय ने कहा कि विद्यालय के वातावरण का बालक के जीवन पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। उद्देश्यहीन एवं एकांगी शिक्षा के परिणाम स्वरूप मानव के मूल्यों में निरन्तर हा्रस होता जा रहा है। अतः ऐसे प्रयास किये जाने चाहिए जिससे भौतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक तीनों प्रकार की शिक्षा प्रदान कर बालक को विश्व नागरिक बना सकें।

 

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