चीन में ऐसी है मुस्लिमों की जिंदगी, मुश्किलों का करना पड़ता है सामना

आईएस में शामिल हो चुके उईगर आतंकियों ने चीन लौटने का एलान किया है। साथ ही धमकी दी है कि वे चीन में खून की नदियां बहाएंगे। उइगर चीन की मायनॉरिटी मुस्लिम कम्युनिटी से हैं।

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चीन में ऐसी है मुस्लिमों की जिंदगी, मुश्किलों का करना पड़ता है सामना

 इनमें से कई यहां की दमनकारी नीति से तंग आकर आईएस में शामिल हो गए हैं। दरअसल, चीन में मुस्लिम कम्युनिटी पर काफी पाबंदियां हैं। चीन में 2 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम हैं। यहां 30 हजार से ज्यादा मस्जिदें और 10 मुस्लिम एथनिक ग्रुप हैं। इनमें से एक ‘उइगर’ कम्युनिटी ऐसी भी है, जिसे पिछले कई सालों से सेंसरशिप का सामना करना पड़ रहा है।

उइगर मुसलमान खुद को चीन का निवासी नहीं मानते। तुर्क मूल के उइगर मुसलमानों की इस क्षेत्र में आबादी एक करोड़ से ऊपर है। चीन का मानना है कि उइगर लीडर्स मुस्लिम बहुल शिंजियांग प्रोविन्स में आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। शिंजियांग में उइगर मुसलमानों की आबादी एक करोड़ से ज्यादा है। उइगर मुसलमान तुर्की भाषा बोलते हैं।

चीन, पाकिस्तान पर उइगर मुसलमानों को भड़काने का आरोप भी लगा चुका है। चीन सरकार के अनुसार, पाकिस्तान के कुछ इलाकों में उइगर मुसलमानों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए ट्रेंड किया जा रहा है।
शिनजियांग प्रांत में रहने वाले उइगर मुस्लिम चीन के खिलाफ मूवमेंट चला रहे हैं। ‘ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट’ का मकसद चीन से अलग होना है। दरअसल, 1949 में पूर्वी तुर्किस्तान, जो अब शिनजियांग है। शिनजियांग को एक अलग राष्ट्र के तौर पर कुछ समय के लिए पहचान मिली थी, लेकिन उसी साल यह चीन का हिस्सा बन गया। 1990 में सोवियत संघ के पतन के बाद इस क्षेत्र की आजादी के लिए यहां के लोगों ने काफी संघर्ष किया।

इस आंदोलन को मध्य एशिया में कई मुस्लिम देशों का सपोर्ट भी मिला था, लेकिन चीनी सरकार के आगे किसी की नहीं चली। बीते कुछ समय के दौरान इस क्षेत्र में हान चीनियों की संख्या में जबर्दस्त बढ़ोत्तरी हुई है। ताकि, उइगर मुस्लिमों के आंदोलन को दबाया जा सके। चीन की वामपंथी सरकार के इस रुख के चलते इस क्षेत्र में हान चीनियों और उइगरों के बीच टकराव की खबरें आती रहती हैं।

2008 में शिनजियांग की राजधानी उरुमची में हुई हिंसा में 200 लोग मारे गए, जिनमें अधिकांश हान चीनी थे। इसके बाद 2009 में उरुमची में ही हुए दंगों में 156 उइगुर मुस्लिम मारे गए थे। नमाज़ नहीं पढ़ सकते, दाढ़ी नहीं रख सकते। चीनी सरकार ने सरकारी नौकरी करने वाले उइगर मुसलमानों की पांच वक्त की नमाज़ पर पाबंदी लगाई हुई है। इसका हमेशा से विरोध होता रहा है। चीन में उइगर मुस्लिमों को दाढ़ी रखने की मनाही है। उइगर महिलाओं के बुर्का पहनने की भी मनाही है।  चीन सरकार ने 2008 में दाढ़ी रखना बैन किया था, क्योंकि दंगे बढ़ रहे थे। लेकिन आज भी ऐसे बहुत उइगर हैं जो लंबी दाढ़ी रखते हैं।
उइगर महिला पर्दा करके पेट्रोल स्टेशन, बैंक और हॉस्पिटल नहीं जा सकतीं। वह सरकारी नौकरी भी नहीं कर सकतीं। समुदाय में महिलाओं के लिए हिजाब या बुर्का पहनने पर कोई जोर-जबर्दस्ती नहीं है। हालांकि आज भी ज्यादातर महिलाएं पर्दा करती हैं। ताइपेक को दुनिया की सबसे छोटी टोपी माना जाता है। अगर कोई उइगर महिला इसे पहनी दिखती है, तो इसका मतलब है कि वह शादीशुदा है।
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