चंद्रयान 2 : जानिए, ऑर्बिटर, विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर करते हैं कैसे काम?

Chandrayaan 2 रात के करीब 2 बजे चांद की सतह पर लैंड करने वाला था। इस स्पेस शटल का विक्रम लैंडर से रात के करीब 1 बजकर 52 मिनट पर ISRO से संपर्क टूट गया। विक्रम लैंडर 2 सितंबर को दिन के करीब 1 बजे के आस-पास चंद्रयान के ऑर्बिटर से अलग हुआ था। आर्बिटर से अलग होने के बाद यह तेजी से चांद की सतह की तरफ बढ़ रहा था।

विक्रम लैंडर के पास प्रज्ञान रोवर को चांद की सतह पर सफलतापूर्वक लैंड कराने की जिम्मेदारी थी, क्योंकि विक्रम लैंडर ISRO के डायरेक्ट कम्युनिकेशन करने में सक्षम था। दुर्भाग्यवश विक्रम लैंडर का संपर्क ISRO के कम्युनिकेशन नेटवर्क से टूट किया, जिसके बाद ISRO और भारत एक इतिहास रचते-रहते रह गए। हालांकि, ISRO के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि चांद कि आखिरी कक्षा में घूम रहे ऑर्बिटर के विक्रम लैंडर वाले ट्रेजेक्टरी में पहुंचने के बाद ही यह पता चल पाएगा कि वास्तविक में क्या हुआ था।

विक्रम लैंडर
विक्रम लैंडर चंद्रयान 2 स्पेस शटल का अहम हिस्सा है, जो रोवर को चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंड कराने में सक्षम था। विक्रम लैंडर का नाम मशहूर वैज्ञानिक डॉ विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है। इसका वजन 1,471 ग्राम है और यह 650W की इलेक्ट्रिक पावर जेनरेट करने में सक्षम है। इस विक्रम लैंडर को पूरी तरह से भारतीय तकनीक के साथ बनाया गया है। विक्रम लैंडर को एक लूनर डे यानी कि धरती के 14 दिनों के बराबर कार्य करने के लिए सक्षम बनाया गया है।

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