गर्मियों में राजस्थान को ना करें इग्नोर, माउंट आबू में इन जगहों पर जरूर जाएं

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अक्सर गर्मियों में छुट्टियों पर जाने की जब कोई प्लानिंग कोई करता है तो राजस्थान को अधिक गर्मी की वजह से नजरअंदाज कर दिया जाता है. लेकिन राजस्थान में माउंट आबू एक ऐसा हिल स्टेशन है जहां लोग बड़ी संख्या में गर्मियों में छुट्टियां बिताने जाते हैं. ये देशी और विदेशी पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र है. भौगोलिक स्थिति की वजह से यहां का वातावरण राजस्थान के बाकी शहरों से काफी अलग है. यहां बाकी राजस्थान की तरह भीषण गर्मी नहीं पड़ती है. आबू पहाड़ राजस्थान का इकलौता पहाड़ी शहर है जहां घूमने लायक एक से बढ़कर जगहें हैं. यहां कई ऐसी प्राकृतिक और ऐतिहासिक घूमने लायक जगहें हैं जो पर्यटकों को आर्कषित करती हैं.आइए जानते हैं माउंट आबू के प्रमुख स्थलों के बारे में. गर्मियों में राजस्थान को ना करें इग्नोर, माउंट आबू में इन जगहों पर जरूर जाएं

माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण्य
अगर आपको भी तरह-तरह के पक्षियों को देखना पसंद है तो माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण्य देखना पसंद करेंगे.यहां लगभग 250 विभिन्न तरह की पक्षियां पाई जाती है. इसके अलावा तेंदुएं, स्लोथबियर, सांभर, चिंकारा और लंगूर पाए जाते हैं. माउंट आबू जाने के बाद अभ्यारण्य पर्यटन पर जरूर जाते हैं ताकि वो वन्य जीवों को देख सकें और आनंद उठा सकें. 

अचलगढ़ किला व मंदिर
अचलगढ़ किले को मेवाड़ के राजा राणा कुंभ ने एक पहाड़ी के ऊपर बनवाया था. इस किले में 15वीं शताब्दी में बना अचलेश्वर मंदिर है जिसमें भगवाम शिव की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान शिव के पैरों के निशान भी हैं. यहां से नजदीक में ही काशीनाथ जैन मंदिर भी है जहां पर्यटक जरूर जाते हैं. यह किला चारों ओर खूबसूरत नजारों से घिरा हुआ है. 

नक्की झील
नक्की झील भी माउंट आबू के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है. हिंदु मान्यताओं के अनुसार इस झील को देवताओं बश्काली नाम के राक्षस से अपनी जान बचाने के लिए नाखुन से कोदा था. यह एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट माना जाता है. आपको बता दें कि इसी झील में महात्मा गांधी की अस्थियां भी विर्सजित की गई थीं.यहां नौकायान की भी सुविधा है जिसका पर्यटक भरपुर आनंद उठाते हैं. झील से चारों और का दृश्य काफी खूबसूरत दिखता है.  

गोमुख मंदिर
गोमुख मंदिर की खासियत है कि इसके परिसर में एक गाय की मूर्ति है जिसके सिर पर से प्राकृतिक रूप से एक धारा बहती रहती है. इसलिए इस मंदिर को गोमुख मंदिर कहते हैं. मंदिर में अरबुआदा सांप की एक विशाल मूर्ति है. ऐसा मान्यता है कि गुरु वशिष्ठ ने इस जगह पर एक यज्ञ किया था जिसके फलस्वरूप यहां चार राजपूत कुलों की उत्पति हुई थीं. यहां एक और स्थान है जिसे अग्नि कुंड के नाम से जाना जाता है. 

गुरु शिखर
गुरु शिखर माउंट आबू का सबसे ऊंचा स्थान है जहां पर गुरु दत्तात्रेय का मंदिर है. इस मंदिर में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों ही विराजमान हैं. यहां चारों ओर से प्राकृतिक दृष्य बेहद खूबसूरत दिखते हैं. इस मंदिर को बेहद शांत माना जाता है. मंदिर से कुछ ही दूरी पर पीतल की घंटी है जो लोगों को आकर्षित करती है. 

कैसे पहुंचे माउंट आबू
फ्लाइट द्वारा: अगर आप माउंट आबू फ्लाइट से जाना चाहते हैं तो माउंट आबू से सबसे नजदीक डबोक एयरपोर्ट है जो उदयपुर में स्थित है. डबोक माउंट आबू से 185 किलोमीटर दूर है. यहां लगभग सभी एयरलाइंस की फ्लाइट जाती है. डबोक एयरपोर्ट से आप बस या गाड़ी से माउंट आबू आसानी से पहुंच सकते हैं.

ट्रेन द्वारा: भारत के कई बड़े शहरों से माउंट आबू के लिए ट्रेनें चलती हैं.माउंट आबू से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन आबू रोड है. आबू रोड रेलवे स्टेशन तक बैंगलोर, दिल्ली, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद,देहरादून, मैसूर सहित कई जगहों से ट्रेनें चलती हैं. 

बस द्वारा: माउंट आबू में देश के कई शहरों से डायरेक्ट बसें चलती हैं. दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड गुजरात से भी आप आसानी से बस द्वारा माउंट आबू पहुंच सकते हैं. 

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