केजरीवाल को कानूनी कार्रवाई से बचा रहे हैं उनके खास मंत्री : भाजपा

नई दिल्ली । दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर मुख्य सचिव अंशु प्रकाश की पिटाई मामले में चार्जशीट में आरोपी बनाए गए सीएम केजरीवाल को बचाने का आरोप लगा है। यह गंभीर आरोप भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर लगाया है। 

यहां पर बता दें कि इसी महीने 13 अगस्त को दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ बदसलूकी व मारपीट मामले में तैयार की गई चार्जशीट दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में सीएम अरविंद केजरीवाल, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत 13 विधायकों को आरोपी बनाया गया है। बताया जा रहा है कि मारपीट मामले में पुलिस ने सबूतों के आधार पर जिस तरीके से मजबूत चार्जशीट तैयार की है वह केजरीवाल सरकार के लिए गले की फांस बन सकती है। वहीं, चार्जशीट दाखिल होने पर भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता ने आम आदमी पार्टी पर हमला बोल दिया था। विजेंद्र गुप्ता ने कहा था कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने सीएम पद पर बने रहने का अधिकार खो दिया है।

पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट में उत्तरी जिला पुलिस ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के तत्कालीन सलाहकार वीके जैन को ही मुख्य चश्मदीद गवाह बनाया है। वीके जैन ने अपने बयान में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खां व प्रकाश जारवाल द्वारा मुख्य सचिव को गला दबाकर सात थप्पड़ व घूसे मारने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अंशु प्रकाश की जब पिटाई की जाने लगी थी, तब उनका चश्मा जमीन पर गिर गया था।

पुलिस के अनुसार, वीके जैन के माध्यम से ही केजरीवाल ने मुख्य सचिव को सुबह से देर रात तक बार-बार फोन करवाकर बैठक के बहाने अपने आवास पर बुलाया था। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, मारपीट मामले में पुलिस ने सबूतों के आधार पर जिस तरीके से मजबूत चार्जशीट तैयार की है, वह सरकार के लिए गले की फांस बन सकती है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, इस केस का सबसे मजबूत सबूत सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी वीके जैन का बयान है।

यह है पूरा मामला

बता दें 19 फरवरी की आधी रात 12 बजे केजरीवाल के सिविल लाइंस स्थित आवास पर मुख्य सचिव के साथ हुई बदसलूकी व मारपीट की घटना के बाद 21 फरवरी की सुबह सिविल लाइंस थाना पुलिस ने वीके जैन से पूछताछ की थी। पहले तो उन्होंने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन दिल्ली पुलिस ने अगले दिन 22 फरवरी को मजिस्ट्रेट के सामने बंद कमरे में उनका धारा-164 के तहत बयान दर्ज करवा दिया था, ताकि वह सबकुछ सच बता सकें। मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान में उन्होंने घटना की पूरी घटना उजागर कर दी थी। तभी पुलिस ने उन्हें केस का मुख्य चश्मदीद गवाह बना लिया था।

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