केजरीवाल के ये दिग्गज, पहले छोड़ चुके हैं साथ

पत्रकारिता छोड़कर सियासत में कदम रखने वाले आशुतोष का राजनीति से मोहभंग हो गया है. उन्होंने आज आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. इस तरह से आशुतोष भी अरविंद केजरीवाल के साथ छोड़ने वाले लोगों में शामिल हो गए हैं. हालांकि, अभी पार्टी ने उनके इस इस्तीफे को अभी तक स्वीकार नहीं किया है.

बता दें कि केजरीवाल का साथियों से हाथ छूटने का सिलसिला भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल आंदोलन से ही शुरू हो गया था, लेकिन केजरीवाल के राजनीति में आने के बाद इसमें तेजी आई है. आशुतोष के साथ ही पार्टी के एक दर्जन से ज्यादा बड़े नेताओं ने अपना इस्तीफा देकर आम आदमी पार्टी से अलग हो चुके हैं. इनमें 9 बड़े ऐसे चेहरे हैं, जो आम आदमी पार्टी को खड़ी करने में अहम भूमिका अदा की थी.

1. आशुतोष ने 2014 में एक टीवी न्यूज चैनल के मैनेजिंग एडिटर के पद से इस्तीफा देकर आम आदमी पार्टी ज्वाइन की थी. उन्होंने 2014 में ही दिल्ली की चांदनी चौक से चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें बड़ी हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद माना जा रहा था कि आम आदमी पार्टी आशुतोष को राज्यसभा भेज सकती है. लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

आशुतोष ने बुधवार को ट्वीट कर लिखा कि हर सफर का अंत होता है. आम आदमी पार्टी के साथ मेरा शानदार और क्रांतिकारी सफर आज खत्म हुआ. मैंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने लिखा कि ये फैसला मैंने निजी कारणों से लिया है. जिन्होंने मेरा समर्थन किया, उन सभी को धन्यवाद.

2. शांति भूषण –

आम आदमी पार्टी को सबसे पहले चंदा देने वाले पूर्व कानून मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील शांति भूषण थे. शांति भूषण ने पार्टी की स्थापना पर 1 करोड़ रुपए का चंदा दिया था. हालांकि, 2014 से ही उनका आप से मोहभंग हो गया था. उन्होंने केजरीवाल को अनुभवहीन कहा और उनपर दिल्ली विधानसभा चुनावों में टिकट बंटवारे में गड़बड़ी, पार्टी में मनमानी चलाने जैसे आरोप लगाए. शांति भूषण पार्टी का साथ छोड़ने वाले सबसे पुराने लोगों में से थे.

3. प्रशांत भूषण-

एक समय में पार्टी के थिंक टैंक का अहम हिस्सा रहे और कानूनी मोर्चे पर पार्टी की कमान संभालने वाले प्रशांत भूषण आज पार्टी के साथ नहीं हैं. यूपीए शासन में हुए घोटालों में उनकी शिकायतों और अपीलों पर पार्टी ने काफी सुर्खियां बटोरीं. उन्होंने 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले केजरीवाल पर टिकट बंटवारे में मनमानी का आरोप लगाया था. केजरीवाल ने प्रशांत भूषण को पार्टी की पीएसी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति से बाहर करने के बाद पार्टी से भी बाहर कर दिया. इसके बाद उन्होंने योगेंद्र यादव के साथ मिलकर ‘स्वराज अभियान’ की शुरूआत की और बाद में पार्टी का गठन किया.

4. योगेंद्र यादव-

राजनीतिक विचारक योगेंद्र यादव का भी आम आदमी पार्टी की स्थापना में अहम रोल रहा. योगेंद्र पार्टी के लिए चुनावी रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाते थे. हालांकि, उन्हें भी 2015 में प्रशांत भूषण के साथ, पार्टी विरोधी गतिविधिय़ों के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया. फिलहाल वह प्रशांत के साथ ‘स्वराज अभियान’ पार्टी का गठन करके किसानों के मुद्दे को उठा रहे हैं.

5. प्रोफेसर आनंद कुमार-

समाजशास्त्री प्रोफेसर आनंद कुमार ने भी योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के साथ ही भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में हिस्सा लिया था. वह आम आदमी पार्टी के साथ शुरुआत से ही जुड़े रहे. उन्होंने 2014 में पार्टी की ओर से उत्तरी-पूर्वी दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ा था और दूसरे नंबर पर रहे थे. उन्हें भी 2015 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में आप से बाहर निकाला गया. फिलहाल वह अध्यापन कर रहे हैं.

6. मयंक गांधी

सामाजिक कार्यकर्ता मयंक गांधी ने अरविंद केजरीवाल के साथ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में जुड़े थे. इस दौरान वह आंदोलन की कोर कमेटी के 24 सदस्यों में भी शामिल थे. इसके बाद वह आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी शामिल रहे. केजरीवाल से मतभेद होने तक वह महाराष्ट्र में पार्टी प्रमुख भी बने रहे. उन्होंने प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को पार्टी से बाहर करने पर भी सवाल खड़े किए थे. उन्होंने केजरीवाल पर ईमानदारी की राजनीति से पीछे हटने, कार्यकर्ताओं का इस्तेमाल करके उन्हें छोड़ देने और राजनीति में अपनी रुचि खत्म होने का हवाला देकर नवंबर 2015 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.   

सेना में महिलाओं को मिलेगा बराबरी का दर्जा, अंतरिक्ष में जाएगा भारतीय: पीएम मोदी

7. शाजिया इल्मी

पत्रकारिता छोड़कर शाजिया इल्मी अन्ना हजारे के द्वारा शुरू किए लोकपाल आंदोलन से जुड़ी थी. इसके बाद वह आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी रहीं. 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी.  इल्मी ने केजरीवाल पर पार्टी में आतंरिक लोकतंत्र नहीं बनाने का आरोप लगाया. इसके बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया है.

8. विनोद कुमार बिन्नी

आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार में सबसे पहले विरोध की आवाज विनोद कुमार बिन्नी ने उठाई थी. बिन्नी आप के टिकट पर लक्ष्मीनगर से चुनाव जीते थे. आप में आने से पहले वह दो बार निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुके थे. दिसंबर 2013 में वह मंत्रालय बंटवारे से नाखुश हुए थे. इसके बाद उन्होंने पार्टी पर अपने सिद्धांतों से हटने का आरोप लगाया. जनवरी 2014 में उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया. जनवरी 2015 में वह बीजेपी में शामिल हो गए.

9. कपिल मिश्रा

दिल्ली की आप सरकार में जल संसाधन मंत्री रहे कपिल मिश्रा से मई 2017 में उनका मंत्रालय ले लिया गया था. उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी निलंबित कर दिया गया था. तब मिश्रा ने पार्टी छोड़ने की धमकी दे रहे कुमार विश्वास का साथ दिया था. मंत्रालय छिनने के बाद मिश्रा ने दावा किया था कि उन्होंने मुख्यमंत्री को एक शख्स से 2 करोड़ रुपए रिश्वत लेते देखा है. उन्होंने केजरीवाल सरकार पर कई घोटालों के आरोप भी लगाए थे और लगातार वे सवाल खड़े कर रहे हैं.

Loading...

Check Also

विधानसभा चुनाव: राहुल-मोदी की जोर आजमाइश, दल-बदल और जातीय समीकरण का कॉकटेल

विधानसभा चुनाव: राहुल-मोदी की जोर आजमाइश, दल-बदल और जातीय समीकरण का कॉकटेल

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे क्या होंगे इसे लेकर कयासों और बनते बिगड़ते …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com