ऐसे हैं अजब एमपी के गजब नजारे, सर्दियों में घूमें मध्य प्रदेश के ये खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट

मध्य प्रदेश भारत के खूबसूरत राज्यों में से एक है। मध्य प्रदेश में जहां एक ओर प्राकृतिक खूबसूरती देखने लायक है, तो वहीं दूसरी ओर यहां के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल भी देखते ही बनते हैं। मप्र में पर्यटन के हिसाब से बहुत कुछ देखा जा सकता है। यहां कुछ ऐसे पर्यटन स्थल हैं जहां लोगों का आना-जाना हमेशा लगा रहता है। पहाड़ों से गिरते झरने हों या सतपुड़ा पर्वत की खूबसूरती या घने जंगल या फिर प्रसिद्ध स्मारक, यहां के टूरिस्ट स्पॉट आप देखते रह जाएंगे। आइए आपको बताते हैं मप्र के कुछ ऐसे खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट जिन्हें आपको एक बार जरूर देखना चाहिए। 

रायसेन
मध्य प्रदेश के छोटे शहरों में सबसे पहला नाम रायसेन का आता है। रायसेन का नाम आते ही सबके जुबां पर वहां का हेरिटेज ट्रायंगल आता है। यहां की खास बात है मंदिर और मस्जिद दोनों एक ही परिसर में बने हुए हैं। दोनों धर्मों को एक समान देखा जाता है। यहां घूमने का सबसे अच्छा मौसम होता है अक्टूबर से दिसंबर तक। इस मौसम में लोग यहां के मनोरम दृश्य का आनंद उठाने आते हैं।
मध्य प्रदेश के छोटे शहरों में सबसे पहला नाम रायसेन का आता है। रायसेन का नाम आते ही सबके जुबां पर वहां का हेरिटेज ट्रायंगल आता है। यहां की खास बात है मंदिर और मस्जिद दोनों एक ही परिसर में बने हुए हैं। दोनों धर्मों को एक समान देखा जाता है। यहां घूमने का सबसे अच्छा मौसम होता है अक्टूबर से दिसंबर तक। इस मौसम में लोग यहां के मनोरम दृश्य का आनंद उठाने आते हैं।
रायसेन का किला
रायसेन के प्राकृतिक खूबसूरती को बढ़ाता है यहां का पुराना किला जो यहां के इतिहास का परिचय दिलाता है। रायसेन से किसी भी बस में बैठकर कर किले तक पहुंचा जा सकता है। किला घूमने का कोई पैसा या टिकट नहीं लगता है। यह किला बहुत पुराना है लेकिन आज भी इसकी खूबसूरती कायम है। इस किले को घूमने के लिए पूरे दो घंटे लगते है। बेहतर होगा साथ में कुछ खाने और पीने का पानी लेकर जाएं।
तितली गार्डन
रायसेन का तितली गार्डेन पूरे भारत में मशहूर है। यहां 65 प्रकार की तितलियां पाई जाती हैं। यह गार्डेन मध्यप्रदेश के गांव गोपालपुर में स्थित है। जहां जाने के लिए दस रुपये का टिकट लगता है। तितलियों के अलावा यहां कई अलग-अलग प्रकार के पेड़-पौधे भी पाएं जाते है, जिसकी प्राकृतिक खूबसूरती हर तरफ आकर्षित करती है।
पचमढ़ी
पचमढ़ी मप्र का एक मात्र हिल स्टेशन है। इसे क्विन ऑफ सतपुड़ा भी कहते हैं। पचमढ़ी के आसपास सुंदर पहाड़ियां हैं, जिसे लोग प्यार से यहां की रानी कहते है। यहां पांच पांडवों ने आज्ञातवास के समय ज्यादा समय बिताया था,जिसके बाद इसका नाम पचमढ़ी हो गया। पचमढ़ी का सुहावना मौसम देखने लायक होता है। यहां पूरे देश से लोग आते हैं। गर्मी और बारिश के समय यहां का मौसम पर्यटको के लिए जन्नत से कम नहीं होता। यह मध्यप्रदेश का सबसे ऊंचा पर्यटन स्थल है। गर्मी के मौसम में यहां पर ज्यादा संख्या में लोग घूमने आते हैं।
बांधवगढ़ नेशनल पार्क
बांधवगढ़ एक अभयारण्य है। यह एक नेशनल पार्क है। यह मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश का सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान है। यह 105 वर्ग किलोमीटर में फैला है। ऐसा माना जाता है बांधवगढ़ में प्राचीन काल में सफेद बाघ ज्यादा रहते थे। रीवा के राजा बांधवगढ़ में शिकार करने जाया करते थे। वहां उन्होंने एक किला भी बनवाया था। जहां शिकार करते वक्त देर रात होने के बाद उस किले में रुका करते थे। यह पार्क करीब 400 किमी तक फैला हुआ है। जिसमे जानवरों के अलावा इसमें कई तरह के पेड़ पौधे है। यह अभयारण्य बाघों के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है, विशेष रूप से बंगाल टाइगरों की संख्या यहां काफी ज्यादा है। यहां आपको जंगली जानवरों की कर्इ सारी प्रजातियां मिलेंगी। चीतल, सांभर, हिरण, जंगली कुत्ते, तेंदुएं, भेड़िए, सियार, लोथ बियर, जंगली सुअर, लंगूर जैसे जानवरों की यहां भरमार है। पक्षियों की तकरीबन 250 प्रजातियां हैं।
बांधवगढ़ एक अभयारण्य है। यह एक नेशनल पार्क है। यह मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश का सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान है। यह 105 वर्ग किलोमीटर में फैला है। ऐसा माना जाता है बांधवगढ़ में प्राचीन काल में सफेद बाघ ज्यादा रहते थे। रीवा के राजा बांधवगढ़ में शिकार करने जाया करते थे। वहां उन्होंने एक किला भी बनवाया था। जहां शिकार करते वक्त देर रात होने के बाद उस किले में रुका करते थे। यह पार्क करीब 400 किमी तक फैला हुआ है। जिसमे जानवरों के अलावा इसमें कई तरह के पेड़ पौधे है। यह अभयारण्य बाघों के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है, विशेष रूप से बंगाल टाइगरों की संख्या यहां काफी ज्यादा है। यहां आपको जंगली जानवरों की कर्इ सारी प्रजातियां मिलेंगी। चीतल, सांभर, हिरण, जंगली कुत्ते, तेंदुएं, भेड़िए, सियार, लोथ बियर, जंगली सुअर, लंगूर जैसे जानवरों की यहां भरमार है। पक्षियों की तकरीबन 250 प्रजातियां हैं।
सांची
सांची मध्यप्रदेश का सबसे लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेस है। भगवान बुद्ध ने यहां अपना काफी समय बिताया था। सांची स्तूप भारत के अमूल्य धरोहर में से एक है। इस पर दो सौ के नोट की फोटो चिपके हुए हैं। इसका नाम यूनिस्को द्वारा वर्ल्ड हैरिटेज में दर्ज हुआ है।
सांची मध्यप्रदेश का सबसे लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेस है। भगवान बुद्ध ने यहां अपना काफी समय बिताया था। सांची स्तूप भारत के अमूल्य धरोहर में से एक है। इस पर दो सौ के नोट की फोटो चिपके हुए हैं। इसका नाम यूनिस्को द्वारा वर्ल्ड हैरिटेज में दर्ज हुआ है।
उदयगिरी गुफाएं
उदयगिरी में करीब 25 गुफाएं हैं जो प्राचीन समय की बनी हुई हैं। यह विदिशा जिले में स्थित है। भिलसा से चार मील दूर बेतवा और बेश नदियों के बीच यह एक ऐतिहासिक स्थल है। यहां कुल बीस गुफ़ाएं हैं, जो हिंदू और जैन मूर्तिकारी के लिए प्रसिद्ध है। इस गुफा को घूमने के लिए लंबा समय लगता है। इसमें दिन में घूमा जा सकता है। शाम के वक्त यहां आना मना है।
कान्हा किसली
कान्हा किसली ही नहीं देश के बड़े नेशनल पार्क में से एक है। मध्य प्रदेश पार्क और जंगलों के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें से एक नाम कान्हा किसली का है। इस पार्क में लोग अलग-अलग तरह के जानवरों का दीदार करने आते हैं। यहां अतीत से जुडे़ कई ऐसी चीजें नजर आती है जिसके बारे में लोग सोचने पर मजबूर हो जाते है। यहां लोग देश- विदेश से घूमने आते हैं। जीवों को नजदीक से देखने के लिए आप सवारी का सफर तय कर सकते है। यह एक बाघ अभयारण्य है। यह तकरीबन 2051.74 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह एशिया के सबसे अच्छे उद्यान के रूप में गिना जाता है। यहां घास के मैदान, साल के पेड़ और बांस के जंगल देखने लायक हैं। यहां सबसे खास बाघ और दुर्लभ बारहसिंगा है। यहां पाया जाने वाला बारहसिंगा पूरे विश्व में कहीं नहीं पाया जाता। इस अभयारण्य में पक्षियों की तकरीबन 300 से भी अधिक प्रजातियां हैं। यह मप्र के बालाघाट जिले में है। यहां घूमने का सही समय 1 अक्टूबर से 30 जून के बीच है।
कान्हा किसली ही नहीं देश के बड़े नेशनल पार्क में से एक है। मध्य प्रदेश पार्क और जंगलों के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें से एक नाम कान्हा किसली का है। इस पार्क में लोग अलग-अलग तरह के जानवरों का दीदार करने आते हैं। यहां अतीत से जुडे़ कई ऐसी चीजें नजर आती है जिसके बारे में लोग सोचने पर मजबूर हो जाते है। यहां लोग देश- विदेश से घूमने आते हैं। जीवों को नजदीक से देखने के लिए आप सवारी का सफर तय कर सकते है। यह एक बाघ अभयारण्य है। यह तकरीबन 2051.74 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह एशिया के सबसे अच्छे उद्यान के रूप में गिना जाता है। यहां घास के मैदान, साल के पेड़ और बांस के जंगल देखने लायक हैं। यहां सबसे खास बाघ और दुर्लभ बारहसिंगा है। यहां पाया जाने वाला बारहसिंगा पूरे विश्व में कहीं नहीं पाया जाता। इस अभयारण्य में पक्षियों की तकरीबन 300 से भी अधिक प्रजातियां हैं। यह मप्र के बालाघाट जिले में है। यहां घूमने का सही समय 1 अक्टूबर से 30 जून के बीच है।
मांडू
मांडू मध्यप्रदेश का एकमात्र ऐसा जगह है जहां के राजा रानी की प्रेम कहानी के चर्चे आज भी होते रहते है। इस शहर को दुनिया का सबसे बड़ा किलों का शहर कहा जाता है। यहां के किले करीब 100 साल पुराने हैं। बता दें मांडू का पुराना नाम मांडव है। यहां मानसून में घूमना आपके लिए सबसे बेहतरीन समय होगा। यहां जहाज महल, मांडू का किला, रानी रूपमती का महल देखने लायक है। सबसे खास यहां की कुदरती खूबसूरती है जो बारिश के बाद और भी देखने लायक हो जाती है।





