अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के लिए आज मतदान

अमेरिका में मंगलवार को होने जा रहे मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के लिए अहम परीक्षा साबित होंगे। इन चुनावों से तय होगा कि उनके कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों में कांग्रेस के दोनों सदनों पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बना रहेगा या डेमोक्रेट अपनी पकड़ मजबूत करेंगे।
महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत, आव्रजन और ईरान युद्ध को लेकर मतदाताओं की नाराजगी चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है। प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलने पर डेमोक्रेट सरकार के विधायी एजेंडे को चुनौती देने और प्रशासन के कामकाज की जांच करने की बेहतर स्थिति में होंगे। वहीं, सीनेट का नियंत्रण नियुक्तियों और न्यायिक पदों पर फैसलों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों पर भी नजर
इन चुनावों में भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों और मतदाताओं की भूमिका पर भी नजर रहेगी। नतीजे न केवल ट्रंप की नीतियों के प्रति जनसमर्थन का संकेत देंगे, बल्कि 2028 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले दोनों पार्टियों की रणनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं।
न्यूज एजेंसी रॉयटर के अनुसार, चुनाव जीतने के लिए ट्रंप ने पानी की तरह पैसा बहाया है। उनके मागा इंक ने लगभग 28 करोड़ डालर और उनके समर्थक टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने 36.6 करोड़ डालर खर्च किए हैं।
मतदान के तुरंत बाद होगी वोटों की गिनती
अमेरिकी चुनाव सहायता आयोग (ईएसी) के आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 23.45 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। 21 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लिया था। जस्टिस डिपार्टमेंट ने निगरानी के लिए देशभर में 1000 मानीटर तैनात किए गए हैं।
मतदान के तुरंत बाद मतगणना शुरू होगी और अगले दिन तक अंतिम परिणाम जारी हो सकते हैं। हालांकि, चुनाव पूर्व न्यूयार्क टाइम्स- सिएना यूनिवर्सिटी पोल में डेमोक्रेटों को छह राज्यों, टेक्सास, कंसास, मेन, अलास्का, मिशिगन और ओहायो, में बढ़त मिलती दिख रही है।
एक नजर में चुनाव
मतदान की तारीख: 3 नवंबर, 2026 (मंगलवार)
दांव पर: अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों का नियंत्रण
कुल सीटें: प्रतिनिधि सभा की 435 और सीनेट की 100 में से 35 सीटें
मौजूदा स्थिति: रिपब्लिकन पार्टी के पास दोनों सदनों में बहुमत
मुख्य मुकाबला: डेमोक्रेट प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने की कोशिश में। सीनेट में भी चुनौती
चुनाव की अहमियत: नतीजे तय करेंगे कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के आखिरी दो साल में कितनी आसानी से अपना एजेंडा आगे बढ़ा पाएंगे।
कांग्रेस में बहुमत का गणित
प्रतिनिधि सभा
435 कुल सीटें
218 बहुमत का आंकड़ा
219 रिपब्लिकन
214 डेमोक्रेट
2 खाली सीटें
चुनावी गणित: डेमोक्रेटों को प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम चार सीटों पर जीत चाहिए। सभी सीटों पर मुकाबला होने के कारण कुछ करीबी चुनाव नतीजे तय कर सकते हैं।
सीनेट
100 कुल सीटें
53 रिपब्लिकन
45 डेमोक्रेट
2 निर्दलीय (डेमोक्रेटों के साथ)
35 सीटों पर होंगे इस बार चुनाव
चुनावी गणित: सीनेट में डेमोक्रेटों को बहुमत के लिए कम से कम चार सीटों का शुद्ध लाभ हासिल करना होगा। 50-50 की स्थिति में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस निर्णायक वोट दे सकते हैं। फ्लोरिडा और ओहायो में दो विशेष चुनाव भी हो रहे हैं।
अमेरिकी कांग्रेस को समझें
प्रतिनिधि सभा: इसके 435 सदस्य निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं। हर सदस्य का कार्यकाल दो साल का होता है। इसका मोटे तौर पर भारतीय लोकसभा से तुलना की जा सकती है।
सीनेट: हर राज्य से दो सीनेटर चुने जाते हैं। कुल 100 सदस्य होते हैं और उनका कार्यकाल छह साल का होता है। हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सीटों पर चुनाव होता है।
मध्यावधि चुनाव: राष्ट्रपति चुनाव के दो साल बाद होने वाले ये चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होते हैं। इनमें राष्ट्रपति पद दांव पर नहीं होता, लेकिन कांग्रेस का नियंत्रण बदल सकता है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव की अहमियत
1. ट्रंप के एजेंडे पर असर: प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटों को बहुमत मिला तो वे रिपब्लिकन विधेयकों को रोकने, बजट पर दबाव बनाने और प्रशासन के कामकाज की जांच कराने की बेहतर स्थिति में होंगे।
2. नियुक्तियों पर नजर: सीनेट सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की नियुक्तियों पर मुहर लगाती है। यहां बहुमत खोने से ट्रंप के लिए नियुक्तियों को मंजूरी दिलाना कठिन हो सकता है।
3. राष्ट्रपति की शक्तियां बरकरार: कांग्रेस के किसी सदन में हार से ट्रंप राष्ट्रपति पद नहीं खोएंगे। उनके पास वीटो और कार्यपालिका की शक्तियां बनी रहेंगी।
मतदाताओं के सामने बड़े मुद्दे
महंगाई और जीवन-यापन का खर्च: रोजमर्रा की चीजों की कीमतें मतदाताओं की नाराजगी का बड़ा कारण बन सकती हैं।
आव्रजन: सीमा सुरक्षा और आव्रजन नीतियों पर दोनों पार्टियों के बीच तीखा मतभेद है।
ईरान युद्ध: युद्ध और उससे जुड़े आर्थिक असर को लेकर सरकार की नीतियां भी चुनावी बहस का हिस्सा हैं।
अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवा: रोजगार, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकती है।
इतिहास के आईने से मध्यावधि चुनाव
अमेरिकी इतिहास में मध्यावधि चुनावों के दौरान राष्ट्रपति की पार्टी को अक्सर प्रतिनिधि सभा में सीटें गंवानी पड़ी हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर चुनाव में नतीजा एक जैसा होगा।
2018 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकनों ने प्रतिनिधि सभा में 41 सीटें गंवाई थीं, जबकि सीनेट में दो सीटें बढ़ाई थीं। यह उदाहरण बताता है कि दोनों सदनों के नतीजे अलग-अलग हो सकते हैं।
भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों पर भी नजर
गवर्नर और अन्य अहम पद
विवेक रामास्वामी — ओहायो: रिपब्लिकन उम्मीदवार के तौर पर गवर्नर पद की दौड़ में हैं। उनका मुकाबला डेमोक्रेट एमी एक्टन से है।
सरिथा कोमातिरेड्डी — न्यूयार्क: रिपब्लिकन उम्मीदवार के रूप में अटार्नी जनरल लेटिशिया जेम्स को चुनौती दे रही हैं।
नित्या रमन — लॉस एंजिलिस: नगर पार्षद रमन मेयर पद के चुनाव में मौजूदा मेयर कैरेन बैस के सामने हैं।
प्रतिनिधि सभा में भारतवंशी उम्मीदवार
रो खन्ना — कैलिफोर्निया: डेमोक्रेट सांसद, फिर से चुनाव मैदान में।
प्रमिला जयपाल — वॉशिंगटन: डेमोक्रेट सांसद, दोबारा चुनाव लड़ रही हैं।
सुहास सुब्रमण्यम — वर्जीनिया: डेमोक्रेट सांसद, फिर से मैदान में।
अमी बेरा — कैलिफोर्निया: डेमोक्रेट सांसद, पुनर्निर्वाचन की कोशिश में।
भारतीय मूल के अन्य उम्मीदवार भी विभिन्न राज्यों और स्थानीय निकायों के चुनावों में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की भी बेहद अहमियत
कुछ क्षेत्रों में प्रभाव: कैलिफोर्निया की सिलिकान वैली और न्यू जर्सी के कुछ इलाकों में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की अच्छी मौजूदगी है। करीबी मुकाबलों में उनकी भागीदारी अहम हो सकती है।
पार्टी की पसंद: एक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रतिनिधि सभा के चुनाव में 66 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी उत्तरदाताओं ने डेमोक्रेट उम्मीदवारों को पसंद किया, जबकि 18 प्रतिशत ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन किया।
प्रमुख चिंताएं: महंगाई, रोजगार, अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवा जैसे घरेलू मुद्दे समुदाय के मतदाताओं के लिए अहम हैं। अमेरिका-भारत संबंध भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सर्वेक्षण में इसे सबसे बड़ी चिंता बताने वालों की संख्या कम थी।
नवंबर में मंगलवार को ही मतदान की वजह
अमेरिका में संघीय चुनाव के लिए नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाला मंगलवार तय है। यह परंपरा उस दौर में बनी, जब देश की अर्थव्यवस्था कृषि पर अधिक निर्भर थी। नवंबर फसल कटाई के बाद का समय था और मंगलवार चुनने से ग्रामीण मतदाताओं को रविवार के बाद यात्रा करके मतदान केंद्र पहुंचने का समय मिलता था।





