हरियाणा पंचायत चुनावः सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी, फैसले पर पूरे प्रदेश की निगाहें

पानीपत। हरियाणा पंचायती राज संशोधन कानून-2015 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी कोर्ट में सरकार की तरफ पक्ष रख रहे हैं, वहीं याचिकाकर्ता जगमती सांगवान भी पहुंची हुई है। सरकार जहां इस मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं है, वहीं याचिकाकर्ता ने भी मंगलवार को कोर्ट में जोरदार तर्क देते हुए अपना जवाब दाखिल किया था। अब देखना मुख्य रहेगा कि कोर्ट आज क्या फैसला सुनाती है। कोर्ट के फैसले पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी है।सरकार हारी तो लंबा टलेगा चुनाव
प्रदेशसरकार शीर्ष अदालत में हारी तो चुनाव का लंबे समय के लिए टलना तय है। कानून संशोधन पर सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में मामला सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच जाएगा। बुधवार को कोई फैसला आने के मद्देनजर ही राज्य कैबिनेट बैठक शाम 4 बजे रखी गई है। ताकि पंचायत चुनाव को लेकर सरकार फैसला कर सके।
प्रदेशसरकार शीर्ष अदालत में हारी तो चुनाव का लंबे समय के लिए टलना तय है। कानून संशोधन पर सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में मामला सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच जाएगा। बुधवार को कोई फैसला आने के मद्देनजर ही राज्य कैबिनेट बैठक शाम 4 बजे रखी गई है। ताकि पंचायत चुनाव को लेकर सरकार फैसला कर सके।
अगस्त में किया था सरकार ने कानून में संशोधन
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने 11 अगस्त को कैबिनेट मीटिंग में पंचायती राज कानून में बदलाव लाने संबंधी संशोधन विधेयक विधानसभा में ध्वनिमत से पारित किया था। पंचायत चुनाव लड़ने के लिए चार शर्तें लागू की गई थी। इसमें महिलाओं व एससी वर्ग के लिए शैक्षिक योग्यता 8वीं और बाकी सभी के लिए 10वीं पास, पर्चा भरने से पहले घर में टॉयलेट होना, सहकारी बैंक का लोन व बिजली बिल समेत सभी सरकारी देनदारियों का भुगतान निपटाना और 10 साल की सजा के प्रावधान वाले मामलों में प्रत्याशी का चार्जशीटेड न होना शामिल हैं।





