हरियाणा कांग्रेस में अब चौेधर के लिए खींचतान के बीच अब अपशब्द पर बवाल, विधायक जयतीर्थ का तंवर के खिलाफ मोर्चा

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बावजूद हरियाणा कांग्रेस में विवाद समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। हरियाणा में पार्टी की चौेधर के लिए खींचतान के बीच अब अपशब्द का विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समर्थक व सोनीपत के राई हलके से कांग्रेस विधायक जयतीर्थ दहिया ने पार्टी के प्रदेश प्रधान डॉ. अशाेक तंवर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दहिया का आरोप है कि तंवर ने उन्हें गालियां दीं।
हरियाणा कांग्रेस में अब चौेधर के लिए खींचतान के बीच अब अपशब्द पर बवाल, विधायक जयतीर्थ का तंवर के खिलाफ मोर्चा
दिल्ली में पार्टी वाररूम के अंदर और बाहर खूब झगड़े कांग्रेस नेता
दहिया द्वारा कांग्रेस के हरियाणा प्रभारी गुलाम नबी आजाद को लिखित शिकायत देेने के बाद पार्टी में यह विवाद गर्माता दिख रहा है। बता दें कि मंगलवार शाम नई दिल्ली में 15 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड (कांग्रेस वाररूम) स्थित पार्टी कार्यालय में हुई लोकसभा चुनाव की हार की समीक्षा बैठक के अंदर और बाहर राज्य कांग्रेस के नेताओं ने एक दूसरे के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।
सिरे नहीं चढ़ रहा है नेताओं को एकजुट करने का आलाकमान का प्रयास
बैठक में विधायक जयतीर्थ दहिया ने पार्टी के प्रदेश प्रभारी व राष्ट्रीय महासचिव गुलाम नबी आजाद को प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर पर अपशब्द कहने के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। इतना ही नहीं दहिया ने पार्टी आलाकमान को अल्टीमेटम भी दिया है कि यदि दो या तीन दिन के अंदर अशोक तंवर के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वह पार्टी से इस्तीफा देने के साथ ही पार्टी मुख्यालय के समक्ष धरने पर भी बैठ सकते हैं। इसके बाद राज्य कांग्रेस के नेताओं को एकजुट करने का आलाकमान का प्रयास एक बार फिर धूमिल होता नजर आ रहा है। इससे राज्य कांग्रेस में द्वितीय पंक्ति के नेता बेहद चिंतित हैं क्योंकि तीन माह बाद राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं।
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बैठक खत्म होने के बाद कहे अपशब्द
सूत्रों के अनुसार जयतीर्थ दहिया ने गुलाम नबी आजाद को दी शिकायत में लिखा है कि तंवर ने उन्हें तब अपशब्द बोले जब वे बैठक के बाद 15 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड स्थित पार्टी कार्यालय से बाहर जाने वाले थे। उनके साथ तब पूर्व मुख्य संसदीय सचिव अनिल ठक्कर खड़े थे। इसके बाद वे तंवर की गाड़ी के पीछे भी दौड़े, मगर तंवर अपनी गाड़ी तेजी से भगा ले गए। दहिया ने यह भी लिखा है कि उन्होंने तंवर के खिलाफ मंगलवार की बैठक में कुछ भी नहीं कहा, मगर उनके पिछले बयानों से खफा तंवर ने उन्हें अपशब्द कहे। बेशक अभी जयतीर्थ दहिया पत्र के बारे में कुछ उजागर नहीं कर रहे हैं मगर उन्होंने अपने समर्थकों के बीच यह ऐलान जरूर कर दिया कि वे इस मामले में आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।
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दहिया के मुद्दे पर आलाकमान को असहज करेगा हुड्डा खेमा
बेशक जयतीर्थ दहिया को अपशब्द कहने के मामले में अभी प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर चुप्पी साधे हुए हैं, मगर मंगलवार की बैठक खत्म होने के बाद पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के दिल्ली निवास पर जुटे पार्टी विधायकों और नेताओं ने इसके लिए अगली रणनीति तैयार कर ली है। इसी रणनीति के तहत खुद हुड्डा रात्रि आठ बजे दिल्ली स्थित अपने निवास से जयतीर्थ दहिया के साथ गुलाम नबी आजाद के निवास पर तंवर के खिलाफ शिकायत करने पहुंचे थे। दहिया के मुद्दे पर हुड्डा खेमा पार्टी आलाकमान को भी कार्रवाई के लिए मजबूर करेगा। तंवर के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर हुड्डा खेमा सिर्फ उनका इस्तीफा चाहता है।
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40 मिनट तक खूब झगड़े कांग्रेस नेता
मंगलवार शाम कांग्रेस नेता करीब 40 मिनट तक पार्टी वाररूम में रहे और शुरूआत से अंत तक खूब झगड़े। सूत्र बताते हैं कि शुरूआत कांग्रेस विधायक डॉ.रघुबीर सिंह कादयान ने की। कादयान ने प्रदेश नेतृत्व बदलने की मांग कुछ तथ्यों के साथ की। इसके बाद विधायक गीता भुक्कल ने विधायक दल की नेता किरण चौधरी के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया। भुक्कल ने तो पूर्व सांसद दीपेंद्र हुड्डा को प्रदेश कांग्रेस की कमान देने की भी वकालत की और कहा कि उन्होंने लोकसभा चुनाव में प्रदेश में सबसे ज्यादा मत लिए हैं।
बताया जाता है कि विधायक करण सिंह दलाल ने कांग्रेस के परंपरागत मतदाताओं के भाजपा में जाने के लिए प्रदेश नेतृत्व को दोषी बताया। इसके बाद विधायक कुलदीप शर्मा ने तंवर की करनाल बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेशाध्यक्ष उनकी हार की समीक्षा उनकी अनुपस्थिति में करने आए।
तंवर भी तब तक पूरी तरह उखड़ चुके थे। उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि वे अनुसूचित जाति से हैं इसलिए हुड्डा समर्थक उन्हें दबाना चाहते हैं। पहले उन पर जानलेवा हमला करवा चुके हैं। अब ये चाहें तो उन्हें गोली मार दें मगर वे गलत बात बर्दास्त नहीं करेंगे। हार की समीक्षा में असल कारणों पर जाना चाहिए। हालांकि पूर्व मंत्री महेंद्र प्रताप सिंह ने पार्टी नेताओं को शांत करने का प्रयास किया मगर कोई चुप नहीं हुआ। बहरहाल, गुलाम नबी आजाद को बैठक से उठकर जाना पड़ा।





