राज्य कर विभाग : आईएएस की बढ़ती तैनाती पर अफसरों का विरोध

राज्य कर विभाग में आईएएस अधिकारियों की स्वीकृत पदों से अधिक तैनाती का मुद्दा गरमा गया है। राज्य कर अधिकारियों के संगठन जीएसटी ऑफिसर्स सर्विस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति जताई है। शासन ने इस पत्र का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि 1.25 लाख करोड़ रुपये का राजस्व देने वाले इस महत्वपूर्ण विभाग को नए आईएएस का ट्रेनिंग सेंटर नहीं बनाना चाहिए।

असंतोष की शुरुआत कानपुर में आईएएस अधिकारी की तैनाती से हुई। कानपुर में अपर आयुक्त स्तर के दो पद हैं। पहले सैमुअल पाल को नियुक्त किया गया था। अब वर्ष 2019 बैच की आईएएस अधिकारी सान्या छाबड़ा को यह जिम्मेदारी दी गई है। एसोसिएशन ने इसे व्यापार कर सेवा नियमावली के प्रावधानों के विरुद्ध बताया है।

अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि विभाग में अपर आयुक्त ग्रेड वन के 22 पद स्वीकृत हैं। नियमावली के अनुसार, इस पद पर नियुक्ति केवल पदोन्नति के माध्यम से होगी। इसमें केवल विभागीय संवर्ग के अधिकारियों की ही तैनाती की जाएगी। पहले कानपुर और गाजियाबाद में विभागीय अधिकारी ही सर्वोच्च पद पर रहे हैं।

आदेश को निरस्त करने का अनुरोध
एसोसिएशन ने नियुक्ति विभाग के आदेश को निरस्त करने का अनुरोध किया है। अभी तक राज्य कर विभाग में तीन आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति हो चुकी है। जल्द ही बनारस या आगरा में भी अपर आयुक्त पद पर आईएएस अधिकारी को नियुक्त किया जा सकता है। विभागीय अधिकारियों में इस बात पर भी असंतोष है कि 20 से 25 साल की सेवा देने वाले अधिकारियों के ऊपर पांच-छह साल के राजस्व और कर के मामले में अनुभवहीन आईएएस को तैनात किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि 1.5 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जमा करने वाले इस विभाग को नए आईएएस अधिकारियों का ट्रेनिंग सेंटर बनाना सही नहीं है। इसका असर कर प्रबंधन के पूरे ढांचे पर पड़ सकता है।

Back to top button