यूपी में अधिकारियों की लापरवाही उजागर कागजों तक सिमटा स्वच्छता अभियान

शासन स्तर से जारी निर्देशों पर भी गंभीर नहीं हैं जिला स्तरीय अधिकारी
प्रधानों व कर्मचारी संगठनों ने संसाधनों की कमी को बताया अभियान में रोड़ा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। प्रदेश भर के गांवों में दो सप्ताह तक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया लेकिन गांवों के हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। बरसात के मौसम में गंदगी कम न होने से बीमारियों का प्रकोप बरकरार है। वहीं सरकार का फोकस बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में होने के कारण अन्य इलाकों में सफाई अभियान कागजों तक ही सिमट कर रह गया है। ऐसे में स्वच्छता अभियान के माध्यम से बीमारियों को मात देने की सरकार की कोशिशों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
पंचायतीराज विभाग में दो चरणों में सफाई अभियान चलाया गया। पहला आदेश एक अगस्त 2017 को अपर मुख्य सचिव ने जारी किया था। जिसमें पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए 9 अगस्त से 15 अगस्त तक खुले में शौच से आजादी सप्ताह मनाने को कहा गया था। जिला केंद्रों में प्रभारी मंत्रियों के अलावा जनप्रतिनिधियों से अभियान की शुरूआत कराई जानी थी। 10 अगस्त को जिला व ब्लाक पर होर्डिंग्स, पोस्टर व बैनर लगने थे और 12 व 13 अगस्त को विद्यालयों में वाद विवाद प्रतियोगिता व नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया जाना था। इतना ही नहीं 14 अगस्त को स्वच्छता पर खेलकूद प्रतियोगिताएं व 15 अगस्त को विजेताओं व स्वच्छताग्रहियों को सम्मानित किया जाना था। कुल मिलाकर कार्यक्रमों की भरमार थी परंतु कितने ब्लाकों में प्रोग्राम हुए हैं, इस बात की जानकारी देने के लिए विभाग में कोई तैयार नहीं है। इसके बाद मुख्य सचिव के निर्देश पर इस स्वच्छता अभियान को एक सप्ताह के लिए आगे बढ़ाया गया लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को छोडक़र अन्य स्थानों पर भी यह अभियान अधिक प्रभावी न हो सका। वहीं प्रधान संगठन के वीरपाल सिंह ने आरोप लगाया कि गांवों में सफाई अभियान चलाने के पर्याप्त संसाधन ही नहीं हैं। अधिकतर स्थानों पर सफाईकर्मी कम हैं अथवा उन्हें अन्य स्थानों पर ड्यूटी पर लगाया है। सफाई कर्मचारी संघ के कार्यकारी सदस्य रामकिशन का कहना है कि सफाई करने के लिए जरूरी उपकरण नहीं हैं। कूड़ा निस्तारण के लिए गांवों में उपलब्ध करायी भूमि पर अवैध कब्जे होने के कारण कूड़ा निस्तारण नहीं हो पाता। इसलिए अभियान चलाने में मुश्किल हुई है।

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