यही कारण है कि पंजाब व राजस्थान की धरती प्यासी है और पंजाब से नदियों का पानी लगातार जा रहा पाकिस्‍तान

पांच-छह महीने तक पाकिस्‍तान को जा रहा अतिरिक्‍त नदी जल रोकने की बातें होती रहीं, लेकिन हकीकत में कोई प्रबंध नहीं हुआ। यही कारण है कि पंजाब व राजस्थान की धरती प्यासी है और पंजाब से नदियों का पानी लगातार पाकिस्‍तान जा रहा है। पंजाब सहित कई राज्‍यों में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है, फिर भी हुसैनीवाला हेड से 14000 क्यूसिक की रफ्तार से पानी पाकिस्तान को शनिवार को छोड़ा जा गया।

14000 क्यूसिक पानी भारत छोड़ रहा है पाकिस्तान को,  न हुसैनीवाला हेड की सफाई हुई और न ही नहरों की

यह स्थिति जमीनी स्तर पर समय रहते काम न किए जाने से हो रही है। हुसैनीवाला हेड व हेड से निकलने वाली बीकानेर व इस्टर्न कैनाल की समय से सफाई व मरम्मत का काम किया गया होता, तो संभव है कि जल संपदा की बर्बाद होने और पाकिस्‍तान जाने से रोका जा सकता था।

भारत-पाकिस्तान सरहद के पास स्थित सतलुज नदी पर बने हुसैनीवाला हेड की डिजाइन क्षमता साढ़े चार लाख क्यूसिक पानी की है, लेकिन वर्तमान में इसकी क्षमता घटकर एक लाख क्यूसिक पानी स्‍टोरेज की ही रह गई है। यह स्थित नहरी विभाग, माइनिंग विभाग व अन्य संबंधित अधिकारियों की उदासीनता से पैदा हुई है। अधिकारियों की उदासीनता के कारण ही हेड में जमा नौ से 15 फीट तक साल्ट व कचरे को वर्षोंसे हटाया नहीं गया। यही नहीं हेड के परिक्षेत्र में लगातार अतिक्रमण हो रहा है, जिससे इसका परिक्षेत्र सिकुड़ता जा रहा है। आशंका है कि यदि यहीं हाल रहा है तो आने वाले समय में हेड की क्षमता एक लाख क्यूसिक से भी कम हो जाएगी।

हुसैनीवाला हेड की भंडारण क्षमता साढ़े चार लाख क्यूसिक घट कर रह गई एक लाख क्यूसिक पानी की हुई

नहरी विभाग के ही एक उच्च अधिकारी ने बताया कि पिछले दिनों पांच महीने तक जब गेट की मरम्मत का काम चल रहा था, उस दौरान यदि माइनिंग विभाग हेड की साल्ट के रूप में जमा मिट्टी व रेत को निकाल कर बेचता को करोड़ों रुपये राजस्व मिलता। इसका दो फायदा होता एक ओर हेड की सफाई हो जाती, जिससे जाे पानी पाकिस्तान को जा रहा है उसे यहां पर स्ट्राक किया जा सकता था, दूसरे लोगों को सस्ते दर पर रेत मिलने के साथ ही राज्य सरकार को भी करोडों रुपये मिलते।

उन्होंने बताया कि यहीं नहीं इस दौरान हेड से निकलने वाली ईस्टन और बीकानेर कैनाल की सफाई भी नहीं करवाई गई, जो कि अब करवाई जा रही है, यदि इन दोनों नहरों की सफाई पहले हुई होती तो तीन हजार क्यूसिक पानी इन नहरों में छोड़ा जा सकता था। इससे पंजाब व राजस्थान के लोगों को राहत मिलती। फिरोजपुर के डिप्टी कमिश्नर चंद्र गैंद ने कहा कि उन्हें हेड के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। वह एक-दो दिनों के अंदर पूरी जानकारी लेने के साथ मौका-मुआयना करेंगे, ताकि सही स्थित का पता लग सके और जो भी संभव कदम हो वह उठाए जा सके।

1988 वाले हालात बने तो संभाले नहीं संभलेगी स्थिति

सतलुज में अब तक आई बड़ी बाढ़ की बात होती है तो फिरोजपुर के लोगों को सन् 1988 की याद आ जाती है। उस समय जब दरिया का बहाव चार लाख क्यूसिक पानी पर आ गया था और इस पानी ने पूरे फिरोजपुर को अपनी चपेट में ले लिया था। ऐसे में यदि अब कभी इतना पानी दरिया में आया तो इसकी चपेट में फिरोजपुर ही नहीं माेगा, तरनतारन, कपूरथला व लुधियाना के अलावा अन्य हिस्सों के बड़े क्षेत्र भी आएंगे। क्योंकि, वर्तमान  में इतना पानी पाकिस्तान की ओर छोड़ने की क्षमता हुसैनीवाला हेड की नहीं रह गई है।

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