मोदी के खासमखास केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय बने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष

भाजपा ने साधा पूर्वांचल में ठाकुर-ब्राह्मण समीकरण

सरकार की कमान क्षत्रिय को सौंपने के बाद संगठन की डोर ब्राह्मण के हाथ में दी
संघ पृष्ठभूमि के डॉ. पांडेय को संगठन का लंबा अनुभव, रह चुके हैं प्रदेश महामंत्री
निकाय चुनाव में पार्टी को बढ़त दिलाना नये प्रदेशाध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती

लखनऊ। पहले रामशंकर कठेरिया, अशोक कटारिया, रामनरेश रावत, विद्यासागर सोनकर, लक्ष्मण आचार्य, विजय बहादुर पाठक, प्रियंका रावत और अंतिम दौर में स्वतंत्रदेव सिंह, संजीव वालियान और न जाने कितने नाम चले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लिए, लेकिन हाईकमान ने मुहर लगाई डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के नाम पर। योगी सरकार बनने के बाद जिस तरह से पूर्वांचल में ठाकुर लॉबी राजनीति पर हावी हुई है उसे देखते हुए भाजपा नेतृत्व ने महेंद्र नाथ पांडेय को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पूर्वांचल की ठाकुर और ब्राह्मण राजनीति के बीच संतुलन साधने का काम किया है। आरएसएस पृष्ठभूमि वाले डॉ. पांडेय स्वच्छ छवि के पूर्वांचल में ब्राह्मणों के नेता माने जाते हैं और फिलहाल चंदौली से सांसद डॉ. पांडेय केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री भी हैं। जल्द ही वह केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देंगे।
भाजपा में ठाकुर और ब्राह्मण स्थापना के समय से जुड़े रहे हैं। इधर पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने दलित और पिछड़ों को साधने का काम किया। लोकसभा चुनाव और उसके बाद से भाजपा दूसरे दलों के पिछड़ा और दलित वोट बैंक को तोड़कर अपने पाले में लाने में जुटी रही। इन जातियों के कई नेताओं को भाजपा में बड़े पद दिए गए। इससे सवर्ण जातियों में नाराजगी छाने लगी थी। जिसे महसूस करते हुए भाजपा ने योगी आदित्यनाथ के रूप में क्षत्रिय को सरकार की कमान सौंपी और संगठन की डोर ब्राह्मण के हाथ में दे दी है। महेंद्र नाथ पांडेय के प्रदेश अध्यक्ष का प्रभार तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। पार्टी ने दो वर्ष बाद होने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए महेंद्र नाथ को यह जिम्मेदारी सौंपी है। 
ध्यान रहे कि गत 19 मार्च को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के यूपी सरकार में डिप्टी चीफ मिनिस्टर की शपथ लेने के साथ ही तय हो गया था कि प्रदेश में भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा, हालांकि केशव ने तभी इस्तीफा दिया था किंतु अमित शाह ने उनका इस्तीफा स्वीकार न करते हुए इंतजार करने को कहा था। तभी से नये अध्यक्ष के लिए तमाम नामों पर चर्चा चल रही थी। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष डॉ. पांडेय को संगठन का खासा अनुभव है वह प्रदेश कार्यकारिणी में महामंत्री के साथ क्षेत्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं और छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय हैं। 1991 में वह सैदपुर से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए और सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए गए थे। गत लोकसभा चुनाव में चंदौली से सांसद चुने गए और जुलाई 2016 में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री बनाए गए। पीएम की वाराणसी सीट के नजदीक चंदौली सीट से सांसद होने के नाते डॉ. पांडेय का नाम पीएम मोदी के नजदीकी लोगों में लिया जाता है। पूर्वांचल खासतौर पर काशी क्षेत्र में उनका खासा प्रभाव है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के साथ डॉ. पांडेय के सामने पहली सबसे बड़ी चुनौती नगर निकाय चुनाव में पार्टी को बढ़त दिलाना है और उनके सामने अगला बड़ा टार्गेट 2019 का लोकसभा चुनाव है।

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