नई दिल्ली . दिल्ली में भवन निर्माण के दौरान निकलने वाले मलबे का निपटारा राजधानी की स्थानीय निकाय संस्थाओं के लिए एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इससे निपटान को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने रोहिणी में एक नए रिसाइकिलिंग संयंत्र की स्थापना की है। इस संयंत्र में दिल्ली मेट्रो के निर्माण के दौरान निकलने वाले मलबे के अतिरिक्त दिल्ली शहर में निकलने वाले अन्य भवन निर्माण संबंधी मलवे का भी निपटान किया जा सकेगा।
डीएमआरसी द्वारा लगाए गए इस रिसाइकिलिंग संयंत्र के देखरेख और संचालन की जिम्मेदारी आईएल एण्ड एफएस इन्वायरमेंट नामक संस्था को सौंपी गई है। संयंत्र का उद्घाटन रविवार को डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक डा. मंगू सिंह और आईएल एण्ड एफएस इन्वायरमेंट के प्रबंध निदेशक महेश बाबू ने रोहिणी के रानीखेडा में किया है।
दिल्ली मे निकलता है रोजाना करीब पांच हजार टन मलबा
– डीएमआरसी के कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल के अनुसार इस संयंत्र से रोजाना करीब 150 टन मलबा रिसाइकिल हो सकेगा । डीएमआरसी के इस प्रयास से न केवल मलवे के निपटान की समस्या को कम किया जा सकेगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण की ओर एक बड़ा कदम होगा। ईडीएमसी के चीफ इंजीनियर पीके खंडेलवाल ने बताया कि वर्तमान समय में राजधानी में रोजाना पांच हजार टन भवन निर्माण से संबंधित मलबा निकलता है। उन्होंने बताया कि राजधानी के बुराड़ी में एक रिसाइकिलिंग संयंत्र का संचालन हो रहा है, जहां करीब दो हजार टन मलबेे का निपटान किया जाता है।
मलबा से बनेगी भवन निर्माण की यह सामग्री
डीएमआरसी के अनुसार मलबे को रिसाइकिल करने के बाद मलवे को कृत्रिम बालू, कंक्रीट की ईंटें, टाइल्स, और गिट्टी के रूप तब्दील किया जाएगा। जिसका उपयोग एक बार फिर भवन निर्माण और फुटपाथ आदि के बनाने में किया जा सकेगा। डीएमआरसी के इस प्रयास से पत्थरों, बालू आदि की खपत कम की जा सकेगी। जिससे प्राकृतिक संपदा का सरंक्षण भी हो सकेगा।
– हो सकेगी रिसाइकिलिंग डीएमआरसी के कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल रिसाइकिलिंग की पूरी प्रणाली सी एण्ड डी अपशिष्ट नियमों तथा दिशानिर्देशों के अनुसार होगी। क्रशिंग के दौरान ध्वनि प्रदूषण और धूल के नियंत्रण के लिए ‘वेट टेक्नोलॉजी’ का इस्तेमाल किया जाएगा। कंक्रीट के ढेर, हेड, रि-बार्स, कंक्रीट ब्लॉक, टूटी हुई ईंटे, सीमेंट प्लास्टर, गिट्टी, टूटे हुए पत्थर, रेत, बालू, छोटे पत्थर सहित इमारत को गिराने से निकलने वाली सामग्री जैसे रेलिंग, फ्रेम,, कांच आदि की रिसाइकिलिंग हो सकेगी।