मंदिर में हमेशा पीतल का घंटा ही क्यों लगाया जाता है?

क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि पूजा की घंटी हमेशा पीतल धातु की बनी होती है? चाहे मंदिर का घंटा हो या फिर घर में इसतेमाल होने वाली छोटे आकार की घंटी, हमेशा इस धातु की ही होती है।

इनकी ध्वनि ने मन मस्तिष्क में एक अलग गूंज सी उठ जाती है और कैसे यह तुरंत मन में श्रद्धा और आध्यात्मिकता का भाव जगा देती है।

अलग-अलग संस्कृतियों और धार्मिक परंपराओं में, पीतल की घंटियां लंबे समय से ईश्वरीय जुड़ाव और आध्यात्मिक जागृति के शक्तिशाली प्रतीक के रूप में देखी जाती हैं, लेकिन कभी आपने सोचा है कि आखिर क्यों मंदिर के घंटे के लिए पीतल धातु का ही इस्तेमाल किया जाता है और इसका महत्व क्या है? आइए हम आपको बताते हैं इससे जुड़ी कुछ बातें और इसके महत्व के बारे में।

पीतल की आवाज वातावरण को शुद्ध करती है
पीतल को एक ऐसी घंटी के रूप में देखा जाता है जिनकी आवाज आस-पास के माहौल को शुद्ध करती है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार, पीतल की घंटियों से निकलने वाली गूंज ऐसी तरंगें पैदा करती है जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती हैं।

जब भी प्रार्थना के दौरान घंटी बजती है तो भक्तों का मन अपने आप भी ईश्वर की ओर केंद्रित हो जाता है और भटकते हुए विचार नियंत्रित होने लगते हैं। पीतल की घंटी से निकलने वाली तरंगें और आवाज मन को जगाती है और उसे ईश्वर से जोड़ती है।

दैवीय ऊर्जा का आगमन होता है
ऐसा कहा जाता है कि पीतल की घंटी बजाने से दैवीय ऊर्जा आकर्षित होने लगती है और आस-पास मौजूद किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्तियां दूर होने लगती हैं।

इसी कारण से मंदिरों, मठों और यहां तक कि घरों में भी पीतल की घंटी का ही इस्तेमाल किया जाता है। यही नहीं पीतल को सूर्य और गुरु की धातु माना जाता है और ऐसा कहा जाता है कि जब पीतल धातु से बना घंटा मंदिर में बजाय जाता है तो इससे सीधे ही आपका संदेश ईश्वर तक पहुंचता है। इसी वजह से जब घर में भी पीतल की घंटी बजाई जाती है तो सूर्य और गुरु को मजबूत करने में मदद मिलती है।

पीतल धातु को क्यों माना जाता है शुभ?
पीतल धतु तांबे और कांसे का मिश्रण होती है और ये दोनों ही धातुएं शुद्धता के गुणों से भरपूर मानी जाती हैं। पीतल किसी भी अन्य धातु की तुलना में एक लंबे समय तक चलने वाली और मधुर ध्वनि पैदा करने वाली धातु होती है।

यही नहीं जब इसका इस्तेमाल सजावटी घंटियों में भी किया जाता है, तब यह आध्यात्मिक भावना को और बढ़ाती है। इसीलिए इन्हें अक्सर ध्यान करने की जगहों, मंदिरों और शांतिपूर्ण जीवन-शैली वाले माहौल में लगाने की सलाह दी जाती है।

मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर पीतल धातु का इतेमाल ऐसी कई बातों को दिखाता है जो इसे पवित्र धातु के रूप में प्रस्तुत करती हैं। यही नहीं इनकी शुध्दता वातावरण को और ज्यादा पवित्र करने का आदेश देती हैं।

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