बेटे को नहीं था मालूम, पिता हो गए हैं शहीद, अखबार देखकर बोला- मैं भी फौजी बनूंगा

ग्वालियरमुरैना. देखो! मेरे पापा का फोटो अखबार में आया है। मैं भी पापा की ही तरह फौजी बनूंगा। पापा जब ड्यूटी पर गए थे, तब मेरा माथा चूमकर कह रहे थे कि बेटा तुझे भी अपनी तरह फौजी बनाऊंगा। मैं फौजी जरूर बनूंगा। मासूम नीरज के मुंह से यह शब्द सुनकर हर किसी की आंखें छलक पड़ीं। नीरज कोई और नहीं बल्कि बीते रोज शहीद हुए जगराम सिंह तोमर का नौ वर्षीय बेटा है।

सुबह जब नीरज के हाथ में अखबार आया तो पहले पन्ने पर पिता का फोटो देखकर बिना खबर पढ़े अखबार लेकर घर से बाहर निकल आया और दरवाजे पर बैठे ग्रामीणों को फोटो दिखाते हुए खुश हो रहा था।
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दरअसल, शहीद जगराम के इकलौते बेटे को मालूम नहीं था कि उसके पिता इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। क्योंकि जगराम के शहीद होने की खबर परिजन तक पहुंची, तब तक नीरज सो गया था। सुबह उठते ही उसे अखबार में पिता का फोटो देखकर वह खुश था। लेकिन दिन गुजरते-गुजरते उसे पिता के शहीद होने की जानकारी मिली तो साढ़े तीन माह पहले उनसे हुई मुलाकात को याद कर बिलख उठा।
शहीद का शव ग्वालियर आया, मिलिट्री हॉस्पिटल में रखा
– नायब सूबेदार जगराम सिंह तोमर की पार्थिव देह रविवार दोपहर में ग्वालियर पहुंची।
– सेना के अफसर विशेष विमान से दोपहर 2.10 बजे एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे।
– यहां सेना, एयरफोर्स के अफसरों ने स्टेशन पर ही शहीद सैनिक की पार्थिव देह पर पुष्पचक्र व पुष्पांजलि अर्पित की।
– इसके बाद पार्थिव देह को खुले और फूलों से सजे ट्रक में लेकर मिलिट्री हॉस्पिटल, मुरार पहुंचा।
– सोमवार सुबह पार्थिव देह शहीद के मुरैना स्थित गांव तरसाना ले जाया जाएगा।
शहीद के घर के सामने भाजपाइयों ने लगाए नारे, परिवार ने जताई आपत्ति
– शहीद जगराम सिंह के पोरसा स्थित निवास के सामने से रविवार की शाम भाजपा की तिरंगा यात्रा निकाली गई। इसमें माइक के जरिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जिंदाबाद सहित अन्य भाजपा नेताओं के समर्थन में नारे लगाए जा रहे थे।
– शहीद जगराम सिंह के पोरसा स्थित निवास के सामने से रविवार की शाम भाजपा की तिरंगा यात्रा निकाली गई। इसमें माइक के जरिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जिंदाबाद सहित अन्य भाजपा नेताओं के समर्थन में नारे लगाए जा रहे थे।
– इस काफिले पर शहीद जगराम सिंह के भतीजे मुनेन्द्र ने आपत्ति लेते हुए कहा कि शहीद की पार्थिव देह अभी घर नहीं आई और भाजपा के लोग दरवाजे पर नारे लगा रहे हैं। शहीद के घर सांत्वना देने पहुंचना इन्होंने उचित नहीं समझा, उल्टे नरेन्द्र सिंह जिंदाबाद, अनूप सिंह जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। इन्हें शर्म आना चाहिए।
– अंत्येष्टि आज:शहीद जगराम सिंह की अंत्येष्टि सैनिक सम्मान के साथ सोमवार को उनके पैतृक गांव तर समा में की जाएगी। उनके बडे़ भाई गुजरात के बड़ौदा में रहते हैं, उनके इंतजार में अंतिम संस्कार रविवार को नहीं हो सका।
चार दिन पहले ही भतीजे से कहा धूमधाम से करूंगा बिटिया की शादी
– शहीद होने से चार दिन पहले 8 अगस्त को जगराम ने अपने भतीजे ज्ञानेन्द्र पुत्र मंगल सिंह से मोबाइल पर बात की थी। उस समय जगराम बहुत खुश थे।
– शहीद होने से चार दिन पहले 8 अगस्त को जगराम ने अपने भतीजे ज्ञानेन्द्र पुत्र मंगल सिंह से मोबाइल पर बात की थी। उस समय जगराम बहुत खुश थे।
– उन्होंने भतीजे से कहा कि बेटा अब मेरा वेतन 80 हजार रुपए महीने हो गया जो परिवार में सबसे ज्यादा है।
– अब मैं अपनी बिटिया की शादी बडे़ शान से करूंगा। एक सितंबर के बाद घर आ रहा हूं, फिर बेटे के लिए वर खोजने चलेंगे।
– अपने लिए गाड़ी भी खरी दूंगा, मैंने साइकिल बहुत चला ली। जगराम सिंह के बेटे के अलावा दो बेटियां रोशनी व खुशबू हैं।
– वह रोशनी की शादी की तैयारी कर रहे थे। शहीद जगराम अपने बडे़ भाई मंगल सिंह की पत्नी को मां की तरह सम्मान देते थे। क्योंकि मंगल सिंह की जिस दिन शादी थी, उसी दिन जगराम सिंह का जन्म हुआ था।





