बीजेपी के विरुद्ध तृणमूल, वामो व कांग्रेस आ सकते हैं एक मंच पर

कोलकाता– बंगाल समेत पूर्वी भारत के कुछ राज्यों में भाजपा के बढ़ते प्रभाव को देख कर राज्य के सत्ता पक्ष, विपक्ष और वामपंथी दल सभी सशंकित हैं। राष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ दल तृणमूल, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और दूसरा विपक्षी दल वाममोर्चा एक मंच पर आ चुके हैं।

बीजेपी के विरुद्ध तृणमूल, वामो व कांग्रेस आ सकते हैं एक मंच पर

एक दूसरे के घोर विरोधी तीनों दलों के सांसदों और विधायकों ने राष्ट्रपति चुनाव में एक पंक्ति में खड़ा होकर मतदान किया। सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के विरुद्ध मुखर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि यह राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की नीति है।

राज्य में वे सरकार की गलत नीतियों के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए स्वतंत्र है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक किसी पार्टी की राष्ट्रीय नीति प्रदेश की नीति हो ही सकती हैं और यहां तक कि स्थानीय निकायों तक में भी लागू हो सकती है। बशीरहाट समेत राज्य में कई सांप्रदायिक ¨हसा की घटनाओं पर राज्य का प्रबुद्ध और बुद्धिजीवी कहे जानेवाला तबका भी सांप्रदायिक ताकतों की बढ़ती गतिविधियों से चिंतित हैं।

नोबेल पुरस्कार विजेता अम‌र्त्य सेन ने भाजपा के विरुद्ध कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाममोर्चा को एकजुट होने का आह्वान किया है। सेन ने अपने एक बयान में कहा है कि ¨हदुत्व के नाम पर देश में विभेद पैदा करने की कोशिशों के विरुद्ध सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट होकर लड़नी चाहिए। अलग-अलग पार्टियों के विचार और नीतियों में फर्क स्वभाविक है, लेकिन व्यापक हित के लिए उन्हें भाजपा के विरुद्ध एकजुट होना चाहिए। सेन ने वाममोर्चा और कांग्रेस को आपसी मतभेद भुला कर भाजपा के विरुद्ध तृणमूल कांग्रेस के साथ मिल कर लड़ने की अपील की है। सेन की अपील पर परस्पर विरोधी तीनों दल कहां तक एकजुट हो पातें हैं यह तो समय बताएगा लेकिन राष्ट्रपति चुनाव के बाद उनके एक मंच पर आने की संभावना बढ़ गई है। राष्ट्रीय स्तर पर 18 विपक्षी पार्टियां एकजुट हुई हैं।

राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दिन ही वाममोर्चा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती ने तृणमूल कांग्रेस महासचिव व संसदीय कार्यमंत्री पार्थ चटर्जी के साथ बैठक की। हालांकि बैठक में सुजन ने कूचबिहार में माकपा कार्यालय पर तृणमूल समर्थकों द्वारा हमले की शिकायत की, लेकिन इसी के बहाने दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं में बातचीत की सिलसिला शुरू हुआ।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अधीर चौधरी ने कहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कांग्रेस विधायकों को तोड़ रही हैं। दूसरी ओर सहयोग की अपेक्षा कर रही हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो राज्य में विपक्ष सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के आक्रामक रुख की ओर संकेत कर रहा है और उससे बदलने की उम्मीद करते नजर आ रहा है। ममता ने भी खुद को भाजपा पर हमला करने तक केंद्रित कर लिया है। कांग्रेस और वामपंथी दलों के प्रति उनका सुर नरम हो गया है।

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