बिना प्रमोशन हो गए 30 हजार कर्मचारी रिटायर, अभी 25 हजार को इंतजार…

भोपाल.प्रमोशन में आरक्षण मामले में 30 अप्रैल 2016 को हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद से मध्यप्रदेश में अभी तक 30 हजार से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी बिना प्रमोशन रिटायर हो चुके हैं। 25 हजार से ज्यादा को प्रमोशन का इंतजार है। सरकार विभागीय प्रमोशन में आरक्षण के पक्ष में है। उसने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर स्टे ले लिया है। इसी कारण किसी भी विभाग में डीपीसी (डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी) की बैठक नहीं हुई।

यही वजह है कि अधिकारी-कर्मचारी बिना प्रमोशन रिटायर होते जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में अगली सुनवाई 7 सितम्बर को है। यानी इस बीच कुछ हजार कर्मचारी और रिटायर हो जाएंगे। मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी रहे सुधीर कुमार श्रीवास हों या सहायक ग्रेड-1 रहते हुए रिटायर हुए भरतराज जैन या निरुपमा जोशी, सभी अंतिम प्रमोशन की राह देखते-देखते रिटायर हो गए।
400 थानों में टीआई नहीं, 3 हजार स्कूलों में प्राचार्य नहीं
वर्तमान में 25 हजार अफसराें, कर्मचारियों के प्रमोशन होना है। 40 हजार से अधिक पदों पर नई भर्ती होनी है। आरक्षण के विवाद के चलते प्रदेश के 400 से अधिक थानों में टीआई नहीं हैं। 3000 से अधिक स्कूलों में हेडमास्टर और प्राचार्य नहीं हैं। कई मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर नहीं हैं। इस वजह से एमसीआई ने उनकी मान्यता खत्म करने की चेतावनी दी है। यही हाल जल संसाधन, उच्च शिक्षा सहित सभी महकमों का है।
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यह विकल्प खुला… सरकार चाहे तो दे सकती है सशर्त प्रमोशन
सरकार चाहे तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रत्याशा में सशर्त प्रमोशन दे सकती है। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद नए नियम बनाकर प्रमोशन का रास्ता खोला जा सकता था। हालांकि सरकार ने अब नियम बनाने का निर्णय ले लिया है, लेकिन काफी देरी से।
आरक्षण के पक्ष में सरकार
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के पहले ही नए नियम तैयार करवा लिए हैं। इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग को प्रमोशन में दिया जा रहा आरक्षण बरकरार रखा है। इसे कैबिनेट सब कमेटी के सामने रखा जाएगा।
यह भी सवाल… कुछ लोगों को प्रमोशन, बाकी से भेदभाव क्यों?
2009-10 में सरकार ने सैकड़ों कर्मचारियों को सशर्त प्रमोशन दिया था। अप्रैल 2016 में पदोन्नति पर रोक लगने के बाद आलोक नागर को उप पंजीयक से पंजीयक, फर्म्स एवं संस्थाएं और पीडब्ल्यूडी में बीएल जायसवाल को अधीक्षण यंत्री से मुख्य अभियंता पद पर प्रमोशन दे दिए|
…लेकिन कानूनविदों की अलग राय सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ेगी
कानूनविदों का कहना है कि पदोन्नति नियम 2002 की जगह नए नियम बनाने का सरकार को पूरा अधिकार है पर इसे क्रियान्वित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जरूरी होगी। नहीं तो दिक्कत हो सकती है।
सरकार सशर्त प्रमोशन क्यों नहीं दे रही?
यदि हम सशर्त पदोन्नति देंगे तो लोग कोर्ट चले जाएंगे और समस्या और बढ़ जाएगी।
परेशान तो दोनों वर्गों के कर्मचारी हो रहे हैं?
सरकार प्रयास कर रही है। इस मामले में जल्द से जल्द सुप्रीम कोर्ट से फैसला आ जाए।
कई विभागों में पद खाली हो रहे हैं, क्या इससे काम प्रभावित नहीं हो रहा?
जहां ज्यादा आवश्यकता है वहां सेवानिवृत्त कर्मचारियों की भी सेवा ले रहे हैं।
नए नियम कब तक बन जाएंगे?
नए नियम बना रहे हैं। इसके लिए हमने विधि विशेषज्ञों की भी राय भी ली है।





