बिना डांटे, बिना चिल्लाए! जापानी लोग ऐसे अपने बच्चों को सिखाते हैं डिसिप्लिन

हर मां-बाप चाहते हैं कि उनके बच्चों को अच्छे संस्कार मिले, पर यह आसान काम नहीं। इसके लिए पेरेंट्स को यह समझने की जरूरत है कि यह केवल बच्चे पालने का नाम नहीं है, इसके लिए निरंतर कोशिशें और उसके साथ धैर्य की खास जरूरत होती है। जब भी हम बात बच्चों में अच्छे संस्कार और अनुशासन की करते हैं तो उसके लिए दुनियाभर में कई तरह के पेरेंटिंग स्टाइल की मिसाल दी जाती है। इनमें से ही परवरिश का एक तरीका जापान का है, जिसके बारे में आज हम बात करने वाले हैं।
जापानी पैरेंटिंग के वो नियम जो बच्चों को बनाते हैं बेहद अनुशासित
जापान विकास के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है और यही बात उनके यहां की परवरिश पर भी लागू होती है। इस देश में रहने वाले लोग पेरेंटिंग के लिए माइंडफुलनेस का इस्तेमाल करते हैं। वहां बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए पेरेटिंग के 5 नियमों को जरूर फॉलो किया जाता है:
दूसरों का अभिवादन विनम्रता से करें
जापान में बच्चा चाहे जितना छोटा हो, उसे शुरू से ही दूसरों का अभिवादन विनम्रता से करना सिखाया है। यह नियम उन्हें दूसरों के प्रति सम्मान की भावना जगाने में मदद करता है। जब बच्चे के आसपास सब लोग इस तरह व्यवहार करते हैं तो वह नेचुरली डिसिप्लिन सीख जाता है।
दूसरों की भावनाओं की परवाह करें
जापान में सामूहिक जागरूकता को अपनाया जाता है, यह नियम व्यक्ति को अनुशासित होने के मजबूर कर देता है। इसमें व्यक्ति को अपनी भावनाओं के साथ दूसरों की भावनाओं की परवाह करने पर जोर देना होता है, ताकि कोई भी अपने व्यवहार को लेकर जागरूक हो सके।
घर में घुसने से पहले जूतों को बाहर उतारना
जापानी जीवनशैली में घर के बाहर जूते उतारने का नियम सख्ती से फॉलो किया जाता है। यहां घरों में एक खास तरह का एंट्रेस होता है जिसे जेनकेन कहते हैं। मेहमानों और परिवार के सदस्यों को घर में घुसते ही इसी जगह पर अपने जूते उतारने होते हैं। ऐसा करने के पीछे लॉजिक घर की साफ-सफाई और मन की शुद्धता है।
एक बार में एक चीज ध्यान से करना
बच्चों के फोकस को बढ़ाने के लिए उन्हें मल्टीटास्किंग की जगह एक समय पर एक ही काम करने की सीख दी जाती है। ऐसा करना न केवल प्रोडक्टिविटी बढ़ाता है, बल्कि बच्चों की सुनने, देखने और महसूस करने की शक्ति भी दोगुना कर देता है।





