फ्लॉप शो — विश्व हिंदू परिषद ( VHP) की धर्म सभा (Dharm Sabha)

 

आज अयोध्या में ढाई लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया था। लखनऊ से 150 बसें लगाई गयी थी। प्रत्येक विधायक और नगर निगम के पार्षदों को भीड़ जुटाने का लक्ष्य दिया गया था, फिर भी अपेक्षित भीड़ कहीं नही दिख रही है। मीडिया चैनल सुबह से माहौल बना रहे हैं लेकिन आम जन मानस की उदासीनता साफ दिख रही है। कोई चैनल 50 हजार तो कोई 70 हजार की भीड़ के दावे कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी ने अयोध्या में श्रीराम की कांस्य प्रतिमा लगवाने की घोषणा अवश्य की है किंतु ये स्टेचू पॉलिटिक्स भी अब परवान नही चढ़ने पा रही है। अमित शाह उद्धव ठाकरे से पूछ रहे हैं कि साढ़े चार साल बाद उन्हें अयोध्या आने की सुधि आयी है ? जबकि यही सवाल रामभक्त अमित शाह और मोदी के ऊपर उल्टा दाग रहे हैं।

आज पीएम मोदी के मन की बात 50वीं बार रेडियो पर सुनाई और टीवी चैनलों पर दिखाई गई है। मन की बात में एक बार भी राम मंदिर का जिक्र तक नही आया। इससे साफ पता चलता है कि माहौल बनाने का काम विहिप और संघ के जिम्मे छोड़ दिया गया है। सत्ता के गलियारों में आम चर्चा है कि योगी दूसरे कल्याण सिंह नही बनना चाहते। बात भी सही है नई नई कुर्सी कुर्बान करने के लिए बहुत बड़ा जिगर चाहिए। अभी धर्म संसद की बैठक चल रही है। बैठक का नतीजा क्या निकलेगा ? इसका अंदाजा लगाना बहुत आसान है। नोट कर लीजिए दोपहर बाद मीडिया चैनलों की ब्रेकिंग न्यूज ये होगी कि धर्म संसद में सन्तो ने केंद्र सरकार को संसद के शीत सत्र में राम मंदिर पर विशेष कानून बनाने का निर्णय सुनाया है। सरकार द्वारा अरबो खरबो रुपया इस आयोजन पर फूंक दिया गया फिर भी आम जनता इसे चुनावी स्टंट ही मान रही है। वो तो गनीमत है कि कार्तिक पूर्णिमा के स्नान को आई भीड़ अभी अयोध्या में डटी है वरना गिनती और भी कम होती। सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी पर अभी फिलहाल कोई टिप्पणी नही कर रहा हूँ क्योंकि अभी 9 दिसम्बर बाकी है। वैसे भी बासी कढ़ी में उबाल नहीं आता है —

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