फ्रैंडशिप डे स्पेशल: वर्चुअल वर्ल्ड में नहीं मिलते हैं गले लगाकर आंसू पोंछने वाले दोस्त

इंदौर. दोस्ती, हताशा-निराशा में कांधे पर एक भरोसेमंद हाथ, कांपते और डगमगाते पलों में थामता एक प्रेमिल हाथ। दोस्ती, ज़िंदगी में पसरते अंधेरे के बीच रोशनी के क़तरे, रोशनभरी राहों में फूलों को खिलाती एक मुस्कुराहट, दु:खभरे दिनोें में उत्साह और उमंग का गीत गाती एक थरथराती आवाज़। यही दोस्ती है, यही दोस्ती का ज़ज्बा है। एक यही रिश्ता है जो हम खुद बनाते है। वर्चुअल दुनिया से पहले की दोस्ती के ऐसे ही मार्मिक किस्से हम पाठकों के लिए लाए है।

अलग अलग शहरों की एमएनसी में मिले थे प्लेसमेंट। आश्का, रिया, प्रमोद, विनय और ऋतु को दोस्तों से दूर जाना मंजूर नहीं था। इसलिए साथ मिलकर शुरू की खुद की कम्पनी। एक स्टार्टअप किया है इन्होंने फ्रेंड्स फॉर लाइफ। इसके ज़रिए कम्पनीज़ से टाईअप कर ज़रूरतमंद बच्चों को किताबें दिलवाते हैं।
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स्क्रीन पर कोई आपको गले लगाकर चुप नहीं करा सकता, सोशल वर्ल्ड में जान पहचान होती है दोस्ती नहीं
सोशल मीडिया हमें दोस्ती के मायने सिखा रहा है, हमारे दोस्त का जन्मदिन, फेसबुक पर दोस्ती की सालगिरह, फेसबुक पर आपकी सालगिरह और यहां तक कि उनकी टाइमलाइन पर कब और क्या मैसेज पोस्ट करना है, यह भी फेसबुक तय कर लेता है। हम कितनी तस्वीरें और वीडियो और टेक्स्ट मैसेज भेजते हैं, यह भी वर्चुअली तय होता है जिसके लिए हम भावशून्य होकर मशीन की तरह पोस्टिंग और टैगिंग के नेटवर्क में उलझ गए हैं। मसला यह है कि उन हजारों दोस्तों में से मुट्ठीभर भी नहीं जिनसे हम मिलते और बात करते हैं, उन्हें गले लगा सकते हैं, उनकी आंखें पढ़ सकते हैं या फिर उनका हाथ पकड़कर उनका साथ दे सकते हैं।
दोस्ती पर हुई रिसर्च कहती हैं
– 50 प्रतिशत बढ़ जाते हैं दोस्तों के सर्वाइव करने के चांस अगर उनकी बॉन्डिंग मजबूत हो तो। दोस्त की कंपनी बुरी आदतें बदल देती है।
(ब्रिग्स यंग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ऑफ साइकोलॉजी जुलियन हॉल्ट लनस्टाड की स्टडी)
(ब्रिग्स यंग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ऑफ साइकोलॉजी जुलियन हॉल्ट लनस्टाड की स्टडी)
– 1980 के बाद पैदा हुए लोग प्रमोशन के लिए दोस्ती तोड़ सकते हैं।
(दुनिया भर में हुई लिंक्डइन की एक स्टडी)
– 39110 ट्विटर यूजर्स पर हुए सर्वे में सामने आया कि दोस्तों के बीच सोशल मीडिया पर फ्रेंडशिप पैराडॉक्स महसूस किया जा रहा है जिससे साबित होता है कि दोस्तों की पॉपुलैरिटी से लोग नाखुश होते हैं। उनके बीच भले ही फ्रेंड का टैग होता है लेकिन दोस्ती नहीं जिसके टॉप-10 कारण हैं – बॉसी होना, विपरीत नजरिया, हाई मेंटेनेंस होना, लहजा, बुली करने की टेंडेंसी, हर्टिंग सेंस ऑफ ह्यूमर, पॉलिटिकल एफिलिएशन और उधार मांगने की आदत।
अच्छे दोस्त मतलब हेल्दी लाइफ
सोशल मीडिया पर दोस्ती नहीं जान-पहचान होती है। यह आपको दोस्ती जैसी सुरक्षा की भावना और सुकून नहीं दे सकती। वैदिक काल की मित्रता की परिभाषा अलग है। मजबूत दोस्ती ब्रेन के रिलैक्सेशन रिस्पॉन्स को एक्टिवेट करती है। पॉज़ीटिव कैमिकल्स की मात्रा बढ़ाती है। तनाव घटाती है। क्वालिटी ऑफ लाइफ बढ़ाती है। – डॉ. अंकित गुप्ता, न्यूरोफिज़िशियन
5 दोस्त ही होते हैं इमोशनली अटैच
साइंस कहता है कि मुखर इंसान हो या अंतर्मुखी, दोनों के ही दोस्त असल में केवल पांच होते हैं। ऑक्सफोर्ड के एंथ्रोपोलॉजिस्ट रॉबिन डनबार के मुताबिक हर शख्स की दोस्त बनाने की मैक्सिमम कैपेसिटी 150 है। इनमें पांच ही दोस्त ऐसे होंगे जिनसे हम सुख-दुख शेयर कर पाते हैं। दोस्ती कायम रखने के लिए नियमित रूप से बात करना ज़रूरी है। साइकोलॉजी के प्रिंसिपल्स कहते हैं कि मोरल सपोर्ट के लिए दोस्त होने जरूरी हैं। -डॉ. निशांत प्रदीप, सायकोलाॅजी एक्सपर्ट
साइंस कहता है कि मुखर इंसान हो या अंतर्मुखी, दोनों के ही दोस्त असल में केवल पांच होते हैं। ऑक्सफोर्ड के एंथ्रोपोलॉजिस्ट रॉबिन डनबार के मुताबिक हर शख्स की दोस्त बनाने की मैक्सिमम कैपेसिटी 150 है। इनमें पांच ही दोस्त ऐसे होंगे जिनसे हम सुख-दुख शेयर कर पाते हैं। दोस्ती कायम रखने के लिए नियमित रूप से बात करना ज़रूरी है। साइकोलॉजी के प्रिंसिपल्स कहते हैं कि मोरल सपोर्ट के लिए दोस्त होने जरूरी हैं। -डॉ. निशांत प्रदीप, सायकोलाॅजी एक्सपर्ट
दोस्त हैं तो डिप्रेशन से जल्दी उबरते हैं
कई सालों में मेरे पेशेंट्स पर की गई स्टडी कहती है कि जो पेशेंट्स अपने दोस्तों के साथ आते हैं वे फैमिली के साथ आने वाले पेशेंट्स की तुलना में जल्दी ठीक होते हैं। स्ट्रेस से जल्दी उबरते हैं। जिनका फ्रेंड सर्कल अच्छा होता है वे ज्यादा सफल और खुशमिजाज होते हैं । यूके की शेफिल्ड हैलम यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजिस्ट विल रीडर का कहना है कि इंटरनेट उन दोस्तों से जुड़ने में मददगार है जो दूरी की वजह से छूट गए हैं।





