फेसबुक पर करनी है फ्रेंडशिप तो ऐसे परखें लोग

फेसबुक पर ‘फ्रेंड रिक्वेस्ट’ की नोटिफिकेशन। चाहे कोई जाना-पहचाना हो या फिर अनजान, दोस्ती की इस पेशकश को मंजूर या नामंजूर करने के पहले आप कम से कम एक बार रिक्वेस्ट भेजने वाले के प्रोफाइल पर नजर जरूर डालते होंगे और फिर तय करते होंगे कि इसे खुद से जोड़ना है या नहीं।
फेसबुक की दुनिया का कमाल ही कुछ ऐसा है कि आप अपने करीबियों को इस पर जोड़ें या न जोड़ें लेकिन अनजान लोगों के बारे में जानने की दिलचस्पी बढ़ जाती है। किसी के फेसबुक प्रोफाइल पर उसकी फोटो से लेकर ‘लाइक’ तक, कुछ भी आपको उसकी ओर आकर्षित कर सकता है और कुछ भी उसे आपके शक के घेरे में डाल सकता है। ऐसे में फेसबुक पर दोस्ती बढ़ाने की ख्वाहिश में रिस्क 50-50 का है, यह कहना गलत नहीं है।
फेसबुक प्रोफाइल का कितना महत्व है यह न सिर्फ हमारा ‘सिक्स्थ सेन्स’ समझता है बल्कि तमाम बड़ी कंपनियों के लिए यह किसी भी व्यक्ति की पर्सेनालिटी और योग्यता परखने का बड़ा हथियार है। हम फेसबुक में कंपनियों के गणित में उलझने के बजाय आपकी भावनाओं की गुत्थी सुलझाने की यहां कोशिश करे रहे हैं जिससे फेसबुक पर किसी की दोस्ती की पेशकश आपके लिए मुसीबत का सबब न बने।
इस बारे में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. डी.एस. नरबान से मिली जानकारी और व्यक्तित्व विकास संबंधी विविध शोधों के आधार पर जानिए, फेसबुक पर दोस्त बनाने से पहले उसके व्यक्तित्व की पहचान कैसे की जा सकती है।
प्रोफाइल की पहचानः नाम से लेकर फोटो तक
फेसबुक पर किसी भी प्रोफाइल की पहचान सबसे पहले किससे करते हैं? फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने वाले का नाम और फिर फोटो। सबसे पहले बात करते हैं प्रोफाइल पर क्या नाम है।
नामः आमतौर पर फेसबुक प्रोफाइल पर हम अपना नाम या ईमेल आईडी को ही अपनी पहचान के रूप में पेश करते हैं। कई बार नाम की जगह लोग कोई पंचलाइन, गाने की लाइन, फेक नाम (जैसे कूलगॉय या बबलीगर्ल) आदि का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में इनके प्रोफाइल पर अगर इनकी उम्र 25 से कम है तो यह बेहद सामान्य है क्योंकि अक्सर किशोर और युवा प्रोफाइल पर नाम की जगह ऐसे विशेषण देते हैं।
कई बार यह कोई फेक अकाउंट भी हो सकता है जिसे पहचानने के लिए उससे संबंधित जानकारी और फ्रेंड लिस्ट पर गौर करें, अगर जानकारी गोलमोल हो या दोस्त वास्तविक न लगें तो यह किसी का फेक अकाउंट भी हो सकता है।
फोटोः फेसबुक की प्रोफाइल फोटो भी व्यक्तित्व के कई राज खोलती है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी के एक शोध की मानें तो फेसबुक पर हमारी गतिविधियां हमारी मान‌स‌िक स्थिति का संकेत देती हैं।
सामान्य व्यक्ति आमतौर पर फेसबुक पर अपनी फोटो या पोट्रेट लगाने से गुरेज नहीं करते है। कुछ लोग प्रोफाइल फोटो पर किसी अभिनेता या चर्चित व्यक्ति या फिर बच्चे या सीनरी की भी फोटो लगाते हैं। जरूरी नहीं कि ऐसे प्रोफाइल फेक या गलत ही हों।
कई बार किसी मशहूर सेलिब्रिटी की फोटो लोग इसलिए भी लगाते हैं ‌क्योंकि वे अधिक से अधिक लोगों के करीब बने रहना चाहते हैं। कई बार फोटोजेनिक न होने की वजह से भी लोग अपनी फोटो लगाने से बचते हैं।
अगर किसी प्रोफाइल पर वास्तविक फोटो न लगी हो तो आप ‘अबाउट’ से उसकी जानकारी ले सकते हैं। उम्र और मैरिटल स्टेटस के बारे में अगर कोई जानकारी नहीं है या फिर इंट्रेस्ट में सिर्फ महिलाएं या सिर्फ पुरुष जैसी जानकारी है तो इसका मतलब यह हो सकता है कि सामने वाले की रुचि सिर्फ दोस्ती न होकर डेटिंग या फ्लर्ट हो, या फिर कोई फेक अकाउंट हो।
फ्रेंडलिस्ट भी रखती है मायने
चूंकि फेसबुक दोस्त बनाने का खुला प्लेटफॉर्म है, इसलिए इस पर आपको कोई अनजान व्यक्ति फ्रेंड रिक्वेस्ट क्यों भेज रहा है इसके पीछे उसकी मंशा समझना जरूरी है। ऐसे में अगर उसके प्रोफाइल पर दोस्तों की लिस्ट छिपाई नहीं है तो वह भी आपकी जांच का एक मापदंड हो सकती है।
अगर कोई व्यक्ति कम उम्र का है तो हैरानी की बात नहीं कि उसके 300-400 से अधिक दोस्त हैं लेकिन अगर उसकी उम्र अधिक है तो गौर करें उससे संबंधित दूसरी जानकारियों पर, मसलन वह कितनी कंपनियों में काम कर चुका है या कैसी कम्युनिटी से जुड़ा है। अगर उसके कार्यक्षेत्र या सामाजिक दायरे में आपको अधिक बदलाव दिख सकते हैं तो उसके दोस्तों की लंबी फेहरिस्त वाजिब है। लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो सोचने की बात है।
इसी तरह, उसकी फ्रेंडलिस्ट में किस तरह के लोग अधिक हैं, इसे देखकर भी आप यह अंदाजा लगा सकते हैं कि आप में उसका क्या रुझान हो सकता है। म्युचुअल फ्रेंड (आपके और उसके सांझा दोस्त) भी उसकी विश्वसनीयता दर्ज कराने में मददगार हैं।
कोई अपने प्रोफाइल से कैसे लोगों को जोड़कर रखता है यह उसकी वास्तविक रुचि पर निर्भर करता है। जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति अपने फेसबुक अकाउंट पर अपने परिवार या रिश्तेदारों को जोड़े ही, इसलिए इससे उसका व्यक्तित्व नहीं परखा जा सकता है।
वॉल पर स्टेटस अपडेट और लाइक्स
फेसबुक पर हमारी गतिविधियों का आंकलन हमारे लाइक्स और स्टेटस अपडेट के जरिए भी किया जाता है। वैसे तो लाइक्स हमारी रुचि की ओर इशारा करती हैं और इनके आधार पर कंपनियों के एचआर हमारे रुझानों का भी पता लगाते हैं लेकिन किसी का असल व्यक्तित्व जानने में इनसे भ्रम भी हो सकता है। मसलन, दूसरों की वॉल पर कई बार ऐसे पेज या पोस्ट हमें दिखते हैं जो पसंद तो आते हैं पर हम उनसे जुड़े नहीं होते, अमूमन ऐसी चीजों को ही हम अधिक लाइक करते हैं।
ऐसे में लाइक किए गए पेज हमारे रुझानों से कितने मेल खाते हैं, इसकी जानकारी के लिए आप प्रोफाइल से जुड़ी दूसरी गतिविधियों पर गौर करें। मसलन, कोई व्यक्ति अपने बारे में अंग्रेजी में जानकारी देने में व्याकरण संबंधी बेसिक गलतियां करें और उसके लाइक्स में आपको केवल अंग्रेजी फिल्में, गानें और किताबों के नाम दिखें तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए।
लाइक की तरह स्टेटस अपडेट भी किसी के व्यक्तित्व को समझने का जरिया हो सकते हैं। वॉल पर फोटो, कॉपी पेस्ट वाले विचार आदि डालना बेहद सामान्य है और इससे किसी के विचारों को भांपा नहीं जा सकता है। लेकिन उसके सामान्य से अपडेट पर कितनी सारी कमेंट्स आ रही हैं, कैसी कमेंट्स आ रही हैं, इससे उसके व्यक्तित्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कुछ लोग अपने सोने से लेकर खाने-पीने तक की गतिविधियों को वॉल पर अपडेट करते हैं, मनोविज्ञान के आधार पर ऐसे लोगों को ‘अटेंशन सीकर’ यानी हर समय दूसरों का ध्यान अपनी ओर खींचने वाले लोगों में रखा जाता है। यही वजह है कि अक्सर कम उम्र के लोग अपनी वॉल पर इस तरह की अपडेट अधिक करते हैं क्योंकि वे हर समय अपने दोस्तों का ध्यान खींचना चाहते हैं।
और भी हैं इशारे
फेसबुक पर अपने से जुड़ी किन जानकारियों को व्यक्ति छिपाता है और किन जानकारियों को सामने रखता है, यह उसकी सोच से संबंधित हो सकता है।
फेसबुक पर नई-नई दोस्ती के दौरान यह देखा जा सकता है वह आपको कब और कैसे मैसेज करता है। क्या ऑनलाइन होते ही उसके मैसेज शुरू हो जाते हैं तो वह आप में अधिक रुचि ले रहा है, ऐसा मान सकते हैं। अगर आपके मैसेज का समय से जवाब न मिले तो इससे नकारात्मक रूप में लेने के बजाय यह मान सकते हैं कि वह व्यस्त हो। हां, अगर बार-बार ऐसा हो रहा है या आपके ऑनलाइन होने के बाद वह इनविजिबल दिखे और ऐसा बार-बार हो तो हो सकता है कि उसकी आप में रुचि कम हो।
वहीं कोई व्यक्ति किस समय अधिक ऑनलाइन रहता है, कितनी देर तक ऑनलाइन दिखता है, इनके आधार पर उसके बारे में सोच नहीं कायम की जा सकती है। हां, बहुत अधिक समय तक फेसबुक पर सक्रिय रखना जरूर उसके व्यक्तित्व से संबंधित समस्या का इशारा हो सकता है।
फेसबुक पर बहुत अधिक सक्रियता मनोविज्ञान में आईएडी यानी इंटरनेट एडिक्शन डिसॉडर कहलाता है। इसमें व्यक्ति अपनी दिनचर्या के अहम कार्यों को छोड़कर हर समय सोशल मीडिया पर सक्रिय रहता है। ऐसे लोगों में अवसाद, असुरक्षा व अकेलेपन जैसी समस्याओं की आशंका अधिक होती है। आमतौर पर ऐसे लोगों की फेसबुक पर दोस्तों की फेहरिस्त बहुत लंबी दिखती है।
फेसबुक पर किसी से दोस्ती एक अच्छे रिश्ते की शुरुआत हो सकती है लेकिन तब जब आप इसके नफा-नुकसान समझकर सही इंसान को चुनें। अगर आपके पास किसी की फ्रेंड रिक्वेस्ट पेंडिंग है, तो उम्मीद है अब उसे परखने में आपको जरूर आसानी होगी।

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