प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नाराज है कश्मीरी लोग, महबूबा मुफ्ती पर भी बढ़ रहा है उनका गुस्सा

जब श्रीनगर बाढ़ की चपेट में था तब कश्मीरियों को तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अधिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा था। मोदी के कश्मीर की बाढ़ का हवाई सर्वेक्षण कर और तुरंत एक हजार करोड़ की मदद देने के एलान से कश्मीरी प्रभावित थे। मोदी तब बार-बार कश्मीर आ रहे थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नाराज है कश्मीरी लोग, महबूबा मुफ्ती पर भी बढ़ रहा है उनका गुस्सा
 
उन्होंने पीएम के रूप में पहली दीपावली भी कश्मीर में ही बाढ़ पीड़ितों के बीच मनाई, लेकिन बदले हालात में कश्मीरी मोदी से निराश हैं और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है।भाजपा के मंत्री और केंद्रीय नेता बार-बार दावा करते हैं कि आम कश्मीरी केंद्र के विकास रथ पर बैठने को उतारू है, लेकिन धरातल की सच्चाई कुछ और कहती है।

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हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और कश्मीरियों के दिल में केंद्र और रियासत सरकार के बाबत जो एक उम्मीद जगी थी, वह दम तोड़ती दिख रही है। इन पंक्तियों के लेखक ने 2014 की बाढ़ के दौरान भी कश्मीरियों से श्रीनगर से लेकर अनंतनाग तक कई स्थानों पर बातचीत की थी। तब मोदी कश्मीरियों के भी हीरो थे, लेकिन बदले हालात में कश्मीरी मोदी को भी कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।

सियासी दलों के सामने वजूद का संकट

सियासी दलों के सामने वजूद का संकट है। पीडीपी के एक वरिष्ठ मंत्री मानते हैं कि उन्हें गांव जाने पर मौत का डर सताता है। गांवों में पीडीपी और नेकां के कार्यकर्ता अब घरों से बाहर निकलकर सार्वजनिक कार्यक्रम करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।

शायद यही कारण है कि कभी अलगाववादियों को दरिया में डुबो देने की बात करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला अब अलगाववादियों से बातचीत पर जोर देते हैं और पत्थरबाजों को आजादी का सिपाही बताने लगे हैं। पीडीपी और नेकां के अधिकांश नेता मानते हैं कि इस हालात में मुख्यधारा के कश्मीरी दलों के सामने वजूद का संकट खड़ा हो रहा है।

मुगल गार्डन निशात बाग के सामने बीस साल से रेहड़ी लगाने वाले मोहम्मद शोबान आखून कहते हैं कि मोदी को जंग करनी है तो करे इस कश्मीरी को केंद्र से अधिक रियासत सरकार से शिकायत है। आखून ने कहा उनके दो बेटे हैं और दोनों मजदूरी करते हैं। फिलहाल तरबूज बेचने के लिए रिहाड़ी लगाई है। पूंजी नहीं रही। दो दिन में दो तरबूज भी नहीं बिके। कैसे करें घर का गुजारा? इन बूढ़ीं आंखों में आतंकवादियों के प्रति भी गुस्सा है। अलगाववादियों के प्रति नफरत है, लेकिन केंद्र और रियासत सरकार के प्रति उससे अधिक गुस्सा है।

‘जो गद्दी पर बैठता है, वो कश्मीर को लूटता है’

आखून ने अमर उजाला से कहा कि भ्रष्टाचार क्यों नहीं रोकते। जो भी रियासत की गद्दी पर बैठता है, वह कश्मीर को लूटता है। लूटो तेरा धर्म है तो लूटो, लेकिन गरीबों के पेट पर लात क्यों मारी जाती है। वह कहता है कि पाकिस्तान से बंदूक लेकर उत्पात मचाने वालों को मारो, लेकिन हमारे बच्चे क्यों मारे जा रहे हैं।

दिहाड़ी लेकर पत्थर फेंकने वाले उपद्रवियों और पाकिस्तान के पैसे पर पांच सितारा जिंदगी जीने वाले अलगाववादियों के बारे में पूछे जाने पर आखून सरकार को ही दोषी ठहराते हैं। वह कहते हैं कि पैसे पाकिस्तान से आ रहे हैं तो अब तक रोका क्यों नहीं।

निशात बाग में टिकट काउंटर पर तैनात मुश्ताक अहमद कहते हैं कि इस सीजन में हर साल दिन में 15 हजार तक टिकट बिकते थे और आज एक दिन में हजार का आंकड़ा भी पूरा नहीं होता है। 

 
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