पंजाब निकाय चुनाव: 9.59 घटा वोट प्रतिशत किसका करेगा नुकसान, बड़े शहरों में नहीं निकले मतदाता

पंजाब में निकाय चुनाव के दौरान इस बार वोट प्रतिशत 9.59 घट गया। साल 2021 में हुए चुनाव में ये वोट प्रतिशत 73.53 था जबकि साल 2026 में यह 63.94 प्रतिशत रह गया। इस बार मौसम का बड़ा असर देखने को मिला।

गर्मी की तल्खी के चलते बड़े शहरों में काफी मतदाता अपने घरों से ही नहीं निकले जबकि छोटे शहरों वाली नगर पंचायतों में अपेक्षाकृत अधिक वोटिंग हुई। जनादेश 29 को आएगा जिसके बाद साफ हो जाएगा कि किसे फायदा मिला है। 

इस बार बड़े शहरों वाले आठ नगर निगमों में वोट प्रतिशत 59.91 प्रतिशत रहा। कुल 1071403 मतदाताओं में से 641930 मतदाता ही वोट करने बूथों पर पहुंचे जबकि 429473 लोग मतदान करने नहीं आए। मध्यम शहरों वाले 75 नगर परिषदों में 2287637 में से 1488408 मतदाताओं ने वोट की जबकि 799229 मतदाता बूथों तक नहीं पहुंचे, लिहाजा वोट प्रतिशत 65.06 प्रतिशत रहा। छोटे शहरों वाली 19 नगर पंचायतों में 141643 में से 107903 मतदाताओं ने वोट किया। 33740 मतदाताओं ने मतदान नहीं किया। इनका वोट प्रतिशत 76.18 प्रतिशत रहा।

पिछली बार दलों के पास जितना वोट बैंक था, उससे अधिक प्राप्त करना इस बार सभी दलों के लिए बड़ी चुनौती बना रहा। उधर चुनावी ट्रेंड देखें तो मतदाताओं का झुकाव डबल इंजन की सरकार के लिए ही रहता है क्योंकि वे जानते हैं कि अपने इलाकों के विकास के लिए उन्हें वहीं सरकार चाहिए जो सूबे का नेतृत्व कर रही हो। इतना ही नहीं जीतने वाले आजाद प्रत्याशी भी सरकार के पाले में ही चले जाते हैं ताकि उनके वार्डों में भी काम सुचारू रूप से बेरोकटोक हो सकें।

मानसा के मतदाता ज्यादा जागरूक

इस बार सबसे ज्यादा वोटिंग मानसा नगर पंचायत (84.60 प्रतिशत) में हुई जबकि सबसे कम अमृतसर नगर पंचायत (53.06 प्रतिशत) दर्ज की गई। मानसा शहर के लोग वोटिंग को लेकर वाकई सजग रहते हैं क्योंकि साल 2021 में भी मानसा के मतदाताओं ने सबसे ज्यादा 82.99 प्रतिशत वोट किया था। इसके अलावा इस बार रूपनगर नगर पंचायत में भी 83.96 प्रतिशत, मलेरकोटला नगर पंचायत में 80.03 प्रतिशत, फाजिल्का में भी 80.22 प्रतिशत वोटिंग हुई यानी छोटे शहरों के मतदाताओं पर गर्मी की तल्खी का ज्यादा असर कम दिखा। बहुत कम मतदान वाले शहरों में फरीदकोट, गुरदासपुर, मोगा, मोहाली और तरनतारन शहर शामिल रहे। यहां मतदान 59 प्रतिशत के आसपास ही रहा। सभी जिलों में पिछली बार की अपेक्षाकृत कम मतदान ही देखने को मिला।

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