डबल इंजन की सरकार को लगा बहुत बड़ा झटका, राष्ट्रीय पुरस्कार की दौड़ से उत्तराखंड बाहर

डबल इंजन की सरकार के जमाने में उत्तराखंड के हित संवरने के सपने दिखाए गए हैं, मगर महिला सशक्तिकरण और बाल विकास विभाग से जुडे़ एक मामले में राज्य के हित पर चोट पड़ने के आसार पैदा हो गए हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए उत्तराखंड पहले ही बाहर हो गया है।
डबल इंजन की सरकार को लगा बहुत बड़ा झटका, राष्ट्रीय पुरस्कार की दौड़ से उत्तराखंड बाहर
इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए केंद्रीय महिला सशक्तिकरण और बाल विकास विभाग के स्तर पर अंतिम तिथि को अचानक से बदल दिए जाने की वजह से ये स्थिति बनी है। हालांकि उत्तराखंड पुरानी डेडलाइन के हिसाब से ही अपना दावा ठोंकने जा रहा है। उसे भरोसा है कि उसके दावे को स्वीकार कर लिया जाएगा और राष्ट्रीय पुरस्कार से वह नहीं चूकेगा।

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दरअसल, केंद्रीय महिला सशक्तिकरण और बाल विकास विभाग की ओर से पहले जो सूचना भेजी गई थी, उसमें 31 मई 2017 तक सर्वश्रेष्ठ आंगनबाड़ी कार्यकत्री राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए पैनल भेजने के लिए कहा गया था। उत्तराखंड में ये विभाग अपने स्तर पर तैयारी कर रहा था। फिर अचानक से दूसरी सूचना 15 अप्रैल 2017 को आई, जिसमें पैनल भेजने की तारीख एक महीने घटाकर 30 अप्रैल 2017 बता दी गई।

उत्तराखंड का संबंधित विभाग इस तय समयसीमा तक पैनल केंद्र को भेज नहीं पाया है। इसके बाद, तकनीकी तौर पर पुरस्कार की दौड़ से उत्तराखंड बाहर हो गया है। हालांकि विभागीय अफसरों के मुताबिक, आम तौर पर केंद्र स्तर से दावा न करने की स्थिति में रिमाइंडर भेजा जाता है। इस बार रिमाइंडर भी नहीं आया है। इसलिए बहुत संभव है कि उत्तराखंड के दावे को स्वीकार किया जाएगा।

राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए दावे की प्रक्रिया

टेक होम, स्कूल चले योजना, स्वास्थ्य सेवाओं जैसे पांच मानकों पर बेहतर काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्री अपना दावा जिले स्तर पर बनी कमेटी के पास भेजती है। इस कमेटी के अध्यक्ष संबंधित जिले के डीएम होते हैं। ये कमेटी एक से लेकर चार या पांच नाम तय करके राज्य स्तर पर बनी स्टीयरिंग कमेटी के पास भेजती है। इसके बाद पूरे प्रदेश में से तीन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का पैनल केंद्रीय स्तर पर भेजा जाता है। इनमें से किसी एक को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलता है।

राज्य के पुरस्कार पर भी लगा इस बार ग्रहण
केंद्र के अलावा राज्य सरकार भी अपने स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को पुरस्कार प्रदान करती है। हर जिले से एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री को इस पुरस्कार के लिए चुना जाता है। इसकी प्रक्रिया भी जिले से लेकर राज्य स्तर की स्टीयरिंग कमेटी से होकर गुजरती है। इस बार चुनाव आचार संहिता की वजह से इस प्रक्रिया पर काम नहीं हुआ। बजट का भी अभाव रहा और किसी को ये पुरस्कार नहीं दिया गया। 

उत्तराखंड सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि हम 31 मई 2017 के आधार पर ही इस पुरस्कार के लिए अपना दावा प्रेषित कर रहे हैं। हमारे लेवल पर कहीं कोई कमी नहीं रही है, इसलिए पूरी उम्मीद है कि हमारे दावे को स्वीकार किया जाएगा।

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